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चीन ने कोरोना पर पहली बार जारी किया श्वेतपत्र, बताया- कब और कहां सामने आया कोरोना का पहला केस 

By अनुराग आनंद | Updated: June 7, 2020 18:44 IST

अपने श्वेतपत्र के माध्यम से चीन ने दुनिया को यह बताने की कोशिश की है कि कोरोना संक्रमण का पहला मामला कब और कहां सामने आया था।

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ठळक मुद्देश्वेतपत्र के माध्यम से चीन ने अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर सफाई देने का प्रयास किया है।चीन ने बताया कि पहले निमोनिया जैसे किसी बीमारी का मानव से मानव में संक्रमण फैलने के बारे में पता चला था।

नई दिल्ली: दुनिया भर में कोरोना संक्रमण के मामले में तेजी से वृद्धि हो रही है। कोरोना संक्रमण के दुनिया भर में फैलने के पीछे चीन की साजिश बताई जा रही है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन को दुनिया भर में जान बुझकर कोरोना संक्रमण फैलाने के लिए जिम्मेदार बताते रहे हैं। इन सबके बीच चीन ने कोरोना संक्रमण के मामले में पहली बार श्वेतपत्र जारी कर अपनी पक्ष रखा है।

इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट की मानें तो चीन ने एक श्वेतपत्र जारी किया है। अपने इस श्वेतपत्र के माध्यम से चीन ने दुनिया को यह बताने की कोशिश की है कि कोरोना संक्रमण का पहला मामला कब और कहां सामने आया था। इस श्वेतपत्र के माध्यम से एक तरह से चीन अपने ऊपर लग रहे आरोपों पर सफाई देने का प्रयास किया है।

जानें पहला मामला कब और कहां सामने आया-

बता दें कि कोरोना वायरस के प्रसार की खबर देर से देने के आरोपों से घिरे चीन ने रविवार को एकबार फिर खुद को निर्दोष बताया और कहा कि कोरोना का पहला मामला वुहान में 27 दिसंबर को सामने आया था। इसके साथ ही चीन ने बताया कि पहले निमोनिया और मानव से मानव में संक्रमण फैलने के बारे में पता चला था। चीन ने यह भी बताया कि जैसे ही इस बारे में सरकार व स्वास्थ्य विभाग को पता चला तो इस पर अंकुश लगाने के लिए तत्काल कार्रवाई शुरू कर दी गई थी।

जानें मानव से मानव में फैलने के बारे में कब पता चला-श्वेतपत्र के अनुसार वुहान में 27 दिसंबर 2019 को एक अस्पताल द्वारा कोरोना वायरस की पहचान किए जाने के बाद स्थानीय सरकार ने स्थिति को देखने के लिए विशेषज्ञों की मदद ली है। श्वेतपत्र में कहा गया कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग (एनएचसी) द्वारा गठित एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ टीम ने 19 जनवरी को पहली बार पुष्टि की कि यह मानव से मानव में फैल सकता है। चीन के अग्रणी श्वसन रोग विशेषज्ञ वांग गुआंगफा ने कहा कि 19 जनवरी से पहले इस बारे में पर्याप्त सबूत नहीं थे कि विषाणु मानव से मानव में फैल सकता है।

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