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इस गांव में हैं 200 से ज्यादा जुड़वा, अभी भी बढ़ रही तादाद, वैज्ञानिक ने बताया कारण

By वैशाली कुमारी | Updated: September 24, 2021 14:24 IST

केरल के कोडिन्ही गांव में प्रति एक हजार बच्चों में से लगभग 42 जुड़वा पैदा हो रहे हैं। जबकि ग्लोबल रेशियो की बात करें तो यह प्रति एक हजार में केवल 6 का है।

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ठळक मुद्देकोडिन्ही गांव में जुड़वा बच्चों की पैदाइश दुनियां के मुकाबले 7 गुना अधिक है कोच्चि से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस गांव में 2000 लोग रहते हैं जिनमें से 400 लोग जुड़वा हैं

जुड़वा बच्चों को पहचानना काफी मुश्किल काम है, कई बार तो दोनों के मां बाप भी चकमा खा जाते हैं। एक बार घर के लोगों को छोड़ दिया जाए तो बाहरी लोग इन्हें पहचानने में चक्कर खा जाते हैं। अब सोचिए की कैसा हो अगर एक साथ 200 से अधिक जुड़वा बच्चे आपके सामने आ जाए?

जी हां हम बात कर रहे हैं भारत के एक ऐसे गांव की, जहां कई जुड़वा बच्चे पैदा हो चुके हैं और आज भी उनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। केरल के कोडिन्ही गांव में प्रति एक हजार बच्चों में से लगभग 42 जुड़वा पैदा हो रहे हैं। जबकि ग्लोबल रेशियो की बात करें तो यह प्रति एक हजार में केवल 6 का है।

यानी कोडिन्ही गांव में जुड़वा बच्चों की पैदाइश दुनियां के मुकाबले 7 गुना अधिक है। कोच्चि से लगभग 150 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस गांव में 2000 लोग रहते हैं जिनमें से 400 लोग जुड़वा हैं।

एक साथ इतने अधिक जुड़वा होना वाकई आश्चर्यचकित करने वाला है, इस अनोखे रहस्य को जानने के लिए भारत, जर्मनी और ब्रिटेन के शोधकर्ताओं की टीम पहुंची थी उन्होंने गांव के लोगों के थूक के सैंपल आदि लिए। गांव के लोगों के कद काठी, त्वचा आदि शोध किया लेकिन अब तक कोई भी निष्कर्ष सामने नहीं निकला। साल 2008 में यहां 300 में से 30 बच्चे जुड़वा पैदा हुए, ताज्जुब की बात है कि सभी स्वस्थ थे। आमतौर पर दो में से एक बच्चा या फिर दोनों ही अस्वस्थ होते हैं। 

इसके अलावा यूपी के प्रयागराज के पास एक जगह है उमरी, यहां भी बाकी बच्चों कि तुलना में ज्यादा जुड़वा बच्चे पैदा होते हैं। हैदराबाद, दिल्ली, कोलकाता चेन्नई मुंबई आदि के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ यहां पहुंच चुके है लेकिन उनमें से कोई भी किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सके।

गांव में लगभग 250 परिवार रह रहे हैं, लेकिन यहां भी बीते पांच दशक में 100 से ज्यादा जुड़वा बच्चे पैदा हो चुके हैं।

बात करे कोडिन्ही की तो स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां जुड़वा बच्चों के पैदा होने का सिलसिला 70 साल पहले शुरू हुआ। और बीते एक दशक से और तेज हुआ है।

इस विषय पर काम कर रहे डॉक्टर कृष्णन सिरीबिजू कहते हैं, " यह गांव मेडिकल की दुनियां में एक चमत्कार है। मुझे लगता है इसके पीछे यहां के लोगों की डाइट है, उन्होंने कहा कि 60-70 साल पहले यहां शादियां  18 से 20 साल की उम्र में हो जाती थी जिसके कारण परिवार जल्दी शुरू हो जाता था, यह भी एक कारण हो सकता है। कोडिन्ही की  इसी विशेषता के कारण इसे जुड़वा लोगों का गांव कहा जाता है।

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