भारत सरकार द्वारा लागू किए गए संशोधित नागरिकता कानून को लेकर देशभर में उग्र प्रदर्शन किए जा रहे हैं। हाल में दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय की लाइब्रेरी में पुलिस द्वारा कथित मारपीट में एक आंख खो देने वाले एक छात्र का वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में छात्र ने अपनी हालात और अपनी हालत का जिक्र किया है। साथ ही एम्स में इलाज करा रहे छात्र ने कहा है कि इलाज के लिए शासन-प्रशासन से उसे मदद नहीं मिल रही है।
छात्र के वीडियो को पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट किया, जिसे लेकर लोग उन्हें ट्रोल करने लगे। लोगों का कहना है कि वह एजेंडा न चलाकर दोनों तरफ की बात रखें।
राजदीप सरदेसाई ने जो वीडियो ट्वीट किया, उसमें छात्र अपनी आंख की चोट दिखाता हुए कहता दिख रहा है, ''मेरा नाम मोहम्मद मिनहाजुद्दीन है.. मैं एलएलएम छात्र हूं जामिया मिल्लिया इस्लामिया में। यह घटना पंद्रह तारीख 2019 की है। उस दिन हम जामिया की सेंट्रल लाइबब्रेरी में पढ़ रहे थे.. एमफिल सेक्शन है जामिया की सेंट्रल लाइब्रेरी में अलग.. वहां हम लोग बैठे हुए थे.. तभी पता चला कि जामिया के सेंट्रल लाइवब्रेरी में पुलिसवाले घुस आए.. और उसी वक्त हम जहां बैठे हुए थे.. वहां 20-25 पुलिसवाले हेलमेट पहने हुए और फुल्ली आर्म्ड लाठी डंडों के साथ.. और घुसकर.. और बेतहाशा.. बेतरतीब सभी लोगों पर लाठियां बरसाने लगे। मेरे ऊपर भी लाठियां लगाई..
मेरी यह अंगुली फ्रेक्चर हुई.. उसके बाद उन्होंने एक डंडा मेरी आंख पर लगाया.. मारा.. उसके बाद भागने के लिए मैं टॉयलेट की तरफ गया। टॉयलेट में.. वीडियो जोकि बाद में वायरल हुआ.. लोगों ने देखा.. मेरे चारों तरफ से खून निकल रहा था। वो वीडियो काफी लोगों ने देखा.. उसके बाद कुछ लोग मुझे वहां से ले गए.. वहां से अलसिफा आ गया.. अलसिफा ने भी मुझे नहीं लिया.. काफी क्रिटिकल सिचुएशन थी.. तो वहां से रेफर करने के बाद हम एम्स ट्रॉमा आए.. फिर एम्स ट्रॉमा ने हमें रेफर कर दिया आई सेंटर.. तो हम राजेंद्र प्रसाद एम्स आई सेंटर हैं.. वहां मेरा इलाज हुआ.. आंखों का ऑपरेशन हुआ.. पता यह चला कि हमारी आंख में विजिबिलिटी चली गई।
डॉक्टर ने यह कहा है कि आपकी आंख की विजिबिलिटी नहीं आ सकती.. आंख की रौशनी नहीं आ सकती... फिर भी चांसेज हैं कि इसका असर दूसरी आंख पर पड़ सकता है..
इलाज किसी एडमिनिस्ट्रेशन की तरफ से नहीं हो रहा है.. जो भी हम कर रहे हैं.. दोस्तों और रिश्तेदारों की मदद से कर रहे हैं.. हम यहां आए भी थे तो प्राइवेट एंबुलेंस करके आए थे.. कहीं एडमिनिस्ट्रेशन की मदद से, गवर्नमेंट की तरफ से कोई मदद नहीं मिली।''
सरदेसाई के इस ट्वीट पर एक यूजर ने लिखा, ''हमेशा दोनों तरफ के वर्जन और प्रतिक्रियाएं दिखाएं। नहीं तो आप जानते हैं कि लोग आपसे क्या कहेंगे।''
प्रमिला नाम की यूजर दो चोटिल लोगों की तस्वीरें साझा करते हुए ट्वीट किया, ''ये पुलिस अफसर बस ड्राइवर आपको दिखाई नहीं देते? अरे कितना एजेंडा चलाएंगे? कभी हकीकत भी चलाइये।''
एक यूजर ने लिखा, ''राजदीप सरदेसाई , इस काम के पैसे लेते हो या फ्री सर्विस देते हो।''
राजदीप सरदेसाई के ट्वीट पर इसी तरह ढेरों प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।