जैसे आम लोग अपने काम के लिए बैंकों से लोन लेते है, उसी तरह बैंक अपने काम के लिए रिजर्व बैंक से लोन लेते हैं। इस लोन बैंक जिस रेट से ब्याज चुकाते हैं उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है, क्योंकि अगर रेपो रेट ज्यादा होगा तो बैंकों को महंगा लोन मिलेगा और वो अपने ग्राहकों को ज्यादा रेट पर लोन देंगे। वहीं अगर रेपो रेट कम होगो तो कों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध होगा और वो भी ग्राहकों को सस्ता कर्ज दे सकते हैं। Read More
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए केंद्रीय बैंक द्वारा मई, 2022 से बेंचमार्क ऋण दर (रेपो) में बढ़ोतरी का सिलसिला शुरू हुआ था। ...
RBI MPC Updates: RBI निकट-क्षेत्र संचार का उपयोग करके UPI के ऑफ़लाइन भुगतान की अनुमति देगा। यूपीआई लाइट के माध्यम से भुगतान सीमा ₹200 से बढ़ाकर ₹500 की गई। ...
सहकारी ऋणदाताओं सहित सभी विनियमित इकाइयां अब एनपीए का समाधान करने के लिए ‘‘समझौता निपटान और फंसी हुई राशि को तकनीकी बट्टे खाते में डालने’’ जैसे फैसले कर सकेंगी। उन्होंने कहा कि अब तक फंसी हुई संपत्ति के समाधान की अनुमति केवल अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ...
आरबीआई ने इस बार ब्याज दरों में इस बार कोई बदलाव नहीं किया है। साथ ही चालू वित्त वर्ष के लिए अपने आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान को भी 6.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा गया है। ...
सरकार ने आरबीआई से यह जिम्मेदारी दी है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा मुद्रास्फीति दो प्रतिशत घट-बढ़ के साथ चार प्रतिशत पर रहे। ...
Reserve Bank of India: नीतिगत समीक्षा बैठक के हाल में जारी ब्योरे को देखते हुए विशेषज्ञों को लगता है कि मुद्रास्फीति में नरमी आने के साथ दरों में कटौती भी शुरू हो जाएगी। ...