जैसे आम लोग अपने काम के लिए बैंकों से लोन लेते है, उसी तरह बैंक अपने काम के लिए रिजर्व बैंक से लोन लेते हैं। इस लोन बैंक जिस रेट से ब्याज चुकाते हैं उसे रेपो रेट कहते हैं। रेपो रेट का सीधा असर आम लोगों पर पड़ता है, क्योंकि अगर रेपो रेट ज्यादा होगा तो बैंकों को महंगा लोन मिलेगा और वो अपने ग्राहकों को ज्यादा रेट पर लोन देंगे। वहीं अगर रेपो रेट कम होगो तो कों को कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध होगा और वो भी ग्राहकों को सस्ता कर्ज दे सकते हैं। Read More
रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति की बैठक में रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला लिया गया है। फिलहाल रेपो रेट 4 और रिवर्स रेपो रेट 3.35 प्रतिशत है। ...
आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने तीन दिनों की मौद्रिक नीति समिति की बैठक के बाद बताया है कि इस बार रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। जाहिर है इससे ईएमआई पर कोई राहत नहीं मिलने जा रही है। ...
केंद्रीय बैंक कोविड-19 महामारी के प्रकोप से अर्थव्यवस्था को होने वाले नुकसान और लॉकडाउन के असर को सीमित करने के लिए लगातार कदम उठा रहा है। इससे पहले एमपीसी की बैठक मार्च और मई 2020 में हो चुकी है, जिनमें नीतिगत रेपो दरों में कुल 1.15 प्रतिशत की कटौती ...
रेपो रेट में 40 आधार अंकों की कटौती का फैसला किया गया है और अब नया रेपो रेट 4.40 फीसदी से घटकर 4 फीसदी पर आ गया है। इससे भविष्य में लोन की ब्याज दरें घटेंगी और लोगों की सस्ती दर पर कर्ज मिल सकेगा। ...
आरबीआई गवर्नर दास ने 50000 करोड़ रुपये के एलटीआरओ घोषणा की थी कि इसमे से राष्ट्रीय ग्रामीण एवं कृषि विकास बैंक (नाबार्ड) के जिम्मे 25,000 करोड़ रु पये, भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक (सिडबी)के 15,000 करोड ़और राष्ट्रीय आवास (एनएचबी) 10,000 करोड़ शामिल ...
रिजर्व बैंक ने दीर्घकालिक रेपो आधारित लक्षित ऋण सुविधा (टारगेटेड एलटीआरओ) के माध्यम से शुक्रवार को 25 हजार करोड़ रुपये की चौथी किस्त प्रणाली में डाल दी। इस तरह रिजर्व बैंक ने टारगेटेड एलटीआरओ के जरिये बाजार में एक लाख करोड़ रुपये डालने का लक्ष्य पूरा ...