चन्द्रग्रहण उस खगोलीय घटना को कहते हैं जब चंद्रमा पृथ्वी से ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में चला जाता है। इस दौरान सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा एक ही क्रम में लगभग सीधी रेखा में आ जाते हैं। विज्ञान के इतर हिन्दू धर्म में ज्योतिष शास्त्र की चन्द्रग्रहण की अपनी एक परिभाषा है जिसके अनुसार चंद्रमा के आगे राहु-केतु नाम की खगोलीय बिंदु बन जाती है। राहु-केतु ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक छाया ग्रह हैं। इनके प्रभाव से व्यक्ति विशेष पर बुरा असर पड़ता है इसलिए शास्त्रों में ग्रहण से बचने के लिए विभिन्न उपाय दर्ज हैं। Read More
विज्ञान के अनुसार चंद्र ग्रहण तभी लगता है जब एक समय पृथ्वी दरअसल चंद्रमा और सूर्य के बीच आ जाता है। इस वजह से चंद्रमा पर सीधे तौर पर सूर्य की रोशनी नहीं जाती और वह पूरी तरह पृथ्वी की छाया में आ जाता है। ...
जून का महीना आज से शुरू हो चुका है। इस महीने को खगोलीय दृष्टी से बेहद महत्वपू्र्ण बताया जा रहा है। जून के महीने में ही एक साथ दो ग्रहण लगने वाले हैं।हिन्दू धर्म में ग्रहण को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्रहण को आस्था की नजर से देखा जाता है। ग्रहो ...
हिन्दू धर्म में ग्रहण को काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। ग्रहण को आस्था की नजर से देखा जाता है। ग्रहों की चाल और राशि बदलने का असर क्या पड़ेगा इस बात को भी देखा जाता है। वहीं ये साल ग्रहण की दृष्टी से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रहण का हमारे जीवन पर भ ...