चन्द्रग्रहण उस खगोलीय घटना को कहते हैं जब चंद्रमा पृथ्वी से ठीक पीछे उसकी प्रच्छाया में चला जाता है। इस दौरान सूर्य, पृथ्वी और चन्द्रमा एक ही क्रम में लगभग सीधी रेखा में आ जाते हैं। विज्ञान के इतर हिन्दू धर्म में ज्योतिष शास्त्र की चन्द्रग्रहण की अपनी एक परिभाषा है जिसके अनुसार चंद्रमा के आगे राहु-केतु नाम की खगोलीय बिंदु बन जाती है। राहु-केतु ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक छाया ग्रह हैं। इनके प्रभाव से व्यक्ति विशेष पर बुरा असर पड़ता है इसलिए शास्त्रों में ग्रहण से बचने के लिए विभिन्न उपाय दर्ज हैं। Read More
सूर्य ग्रहण 30 अप्रैल की मध्यरात्रि 12 बजकर 15 मिनट पर लग रहा है। यह ग्रहण मेष राशि में लगेगा। जबकि इसके ठीक पंद्रह दिनों के बाद 16 मई को चंद्र ग्रहण लगेगा। ...
Eclipse 2022 Dates: साल 2022 आपके जीवन में दस्तक देने वाला है। नए साल में ग्रहण कितने लगेंगे? इनमें कितने सूर्य ग्रहण होंगे कितने चंद्र ग्रहण होंगे। आइए देखते हैं ग्रहण 2022 की पूरी लिस्ट। ...
चंद्रग्रहण के दौरान ग्रहण के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए जहां चंद्र ग्रह की शांति के लिए मंत्रोच्चारण एवं शिव आराधना की जाती है। तो वहीं ग्रहण की समाप्ति के बाद भी कुछ विशेष उपाय करने आवश्यक हैं। ...
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, आज 580 सालों के बाद सबसे लंबी अवधि वाला आंशिक चंद्रग्रहण लग रहा है। इससे पहले 18 फरवरी 1440 में पड़ा था। आइए जानते हैं आज लगने वाले चंद्रग्रहण से जुड़े सारे सवालों के जवाब। ...
ज्योतिषीय गणना के अनुसार, उपछाया चंद्रग्रहण वृष राशि और कृत्तिका नक्षत्र में लग रहा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, ग्रहण एक अशुभ अवधि होती है, इसके बुरे प्रभाव से बचने की सलाह दी जाती है। ...