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WhatsApp पर आया खतरनाक बग, आपके प्राइवेट मैसेज से कोई भी कर सकता है छेड़छाड़!

By जोयिता भट्टाचार्या | Updated: August 9, 2019 18:17 IST

WhatsApp में आई एक गड़बड़ी के कारण दुनियाभर के यूजर्स की चिंता बढ़ गई है। इस बग की मदद से कोई भी आपके व्हाट्सऐप को हैक कर सकता है और आपके मैसेज से छेड़छाड़ कर सकता है। हालांकि कंपनी ने इस दावे का खंडन किया है।

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ठळक मुद्देचेकपॉइंट ने कहा है कि WhatsApp की इस खामी से गलत इंफॉर्मेशन और फेक न्यूज को फैलाने के साथ ही ऑनलाइन स्कैम में भी हैकर्स को काफी मदद मिल सकती हैइस बग की मदद से कोई भी आपके व्हाट्सऐप को हैक कर सकता है और आपके मैसेज से छेड़छाड़ कर सकता है

पॉपुलर मैसेजिंग सर्विस WhatsApp अपने यूजर्स के लिए हर रोज कोई न कोई फीचर्स लाती रहती है। वहीं, व्हाट्सऐप के कई खामियां भी आए दिन नजर आती है। इसी के तहत व्हाट्सऐप में एक बड़ी गड़बड़ी का पता चला है। व्हाट्सऐप की इस गड़बड़ी से यूजर्स बड़ी मुश्किल में पड़ सकते हैं। जानी-मानी इजरायली साइबर सिक्योरिटी फर्म चेकपॉइंट ने कहा है कि WhatsApp की इस खामी से गलत इंफॉर्मेशन और फेक न्यूज को फैलाने के साथ ही ऑनलाइन स्कैम में भी हैकर्स को काफी मदद मिल सकती है।

WhatsApp में आई इस गड़बड़ी के कारण दुनियाभर के यूजर्स की चिंता बढ़ गई है। इस बग की मदद से कोई भी आपके व्हाट्सऐप को हैक कर सकता है और आपके मैसेज से छेड़छाड़ कर सकता है। हालांकि कंपनी ने इस दावे का खंडन किया है।

फेसबुक के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि हमने एक साल पहले इस मु्द्दे की सावधानी पूर्वक समीक्षा की थी। समीक्षा के बाद कहा जा सकता है कि यह सुझाव देना गलत होगा कि हम WhatsApp पर जो सुरक्षा देते हैं उसमें जोखिम का खतरा है।

बदल देता है मैसेज

चेक प्वाइंट ने इस खामी को एक टूल के जरिए बताने की कोशिश की है। इस टूल के इस्तेमाल से यह बताया गया है कि कैसे हैकर्स प्राइवेट और ग्रुप चैट को हैक कर सकते हैं। साथ ही अगर ग्रुप चैट के दौरान यूजर किसी ग्रुप मेंबर को प्राइवेट मैजेज भेजते हैं तो यह उस मैसेज को प्राइवेट के स्थान पर सभी ग्रुप मेंबर्स के लिए विजिबल कर देता है।

इतना ही नहीं व्हाट्सऐप के 'quote' फंक्शन के जरिए यह यूजर्स की पहचान बदलने के अलावा भेजे गए मेसेज को भी पूरी तरह बदल सकता है। इसमें उस मेंबर को भी ग्रुप का हिस्सा दिखाया जा सकता है जो कभी ग्रुप का हिस्सा था ही नहीं।

उदाहरण से समझे इस बग का इस्तेमाल कैसे हो सकता है

उदाहरण के तौर पर मान लीजिए कि आपके घर में किसी की तबीयत अचानक खराब हो गई और आपको छुट्टी की जरूरत है। आपने अपने बॉस को मैसेज किया कि घर में किसी की तबीयत ज्यादा खराब हो गई है और आप ऑफिस नहीं जा पाएंगे। लेकिन हैकर्स इस मैसेज को इस टूल की मदद से बदल सकते हैं कि मैं परिवार के साथ घूमने जा रहा हूं, इसलिए ऑफिस नहीं आऊंगा।

ऐसे में सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि ये हैकर्स इन मैसेज को अपनी मर्जी के अनुसार बदलकर कुछ भी कर सकते हैं। रिसर्चर्स ने इसका एक वीडियो भी जारी किया है जिसमें यह समझाने की कोशिश की गई है कि कैसे यह यूजर्स के चैट को मैनिप्युलेट कर सकता है।

पहले भी इस बग के बारे में दी गई थी जानकारी

यह ऐसा पहला मौका नहीं है जब व्हाट्सऐप के इस बग के बारे में रिपोर्ट सामने आई है। इससे पहले पिछले महीने सिक्योरिटी फर्म Symantec के शोधकर्ताओं ने दावा किया था कि WhatsApp और टेलीग्राम ऐप में एक बग है जिसकी मदद से कोई भी हैकर्स लोगों द्वारा भेजी गई मीडिया फाइल्स को एडिट कर सकता है और उसमें हेराफेरी कर सकता है। शोधकर्ताओं ने इस बग को मीडिया फाइल जैकिंग नाम दिया है।

व्हाट्सऐप की इस खामी का पता साल 2018 के आखिर में ही चल गया था, लेकिन उस वक्त कंपनी द्वारा इसे ठीक करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए गए थे। रिपोर्ट में कहा गया है कि व्हाट्सऐप के ग्रुप और प्राइवेट चैट में आई गड़बड़ी को ठीक किया जा चुका है जिसमें प्राइवेट मेसेज सभी ग्रुप मेंबर्स को दिखने लगते थे। हालांकि, बाकी दो कमियों को अभी ठीक किया जाना बाकी है। WhatsApp की पैरंट कंपनी फेसबुक ने इस बारे में रिसर्चर्स को बताया कि वॉट्सऐप कि बाकी दोनों कमियों को सीमित इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण ठीक नहीं किया जा सका है।

हैकर्स अब भी वॉट्सऐप मेसेज को बदलने साथ ही ऑनलाइन स्कैम को भी अंजाम दे सकते हैं। व्हाट्सऐप ने इस बारे में अब तक कोई भी ऑफिशियल बयान नहीं दिया है। हालांकि पिछले साल की चेकपॉइंट रिपोर्ट के जवाब में उसने ऐप में इस प्रकार की किसी भी गड़बड़ी को मानने से इनकार कर दिया था।

IT मंत्रालय भी आया था हरकत में

आईटी मंत्रालय ने भी कहा था कि डिजिटल प्लेटफॉर्म इस तरह के बड़े पैमाने पर मिसयूज के लिए अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते हैं और उकसाने वाले संदेश ओरिजिनेट करने वालों को खोजना जरूरी है। इस पर व्हाट्सऐप ने अपनी ओर से समाचार पत्रों, टेलीविजन और रेडियो में भी विज्ञापनों के जरिए अभियान चला, जिससे यूजर्स फर्जी सूचना सा प्रोपेगेंडा की पहचान कर सकें।

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