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वोडाफोन-आईडिया का संकट गहराया, बढ़ सकती हैं टैरिफ

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 27, 2020 12:32 IST

वोडाफोन-आईडिया पर एजीआर में 53,000 करोड़ का बकाया है.

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ठळक मुद्देकंपनी पहले ही पहले ही इशारा कर चुकी है कि अगर सरकार या कोर्ट ने मदद नहीं को वोडाफोन-आईडिया बंद हो सकती है.स्व-घोषित दिवालिया के मामलों में नियम-कानून पूरी तरफ से साफ नहीं हैं.

टेलीकॉम कंपनी वोडाफोन-आईडिया पर संकट के बादल गहराते जा रहे हैं. वित्तीय संकट में फंसी कंपनी को इस दलदल से निकलने के रास्ते नजर नहीं आ रहे हैं. यहां तक कि सरकार की मदद भी शायद ही इससे उबार पाए. सरकार की मदद के बावजूद कंपनी का जियो और एअरटेल के सामने खड़ा होना मुश्किल नज़र आ रहा है. इस वित्तीय संकट की बात करें तो वोडाफोन- आईडिया पर एजीआर में 53,000 करोड़ का बकाया है. इस रकम को चुकाने की आखिरी तारीख 23 जनवरी थी. सुप्रीम कोर्ट ने ये रकम चुकाने की तारीख तय की थी. कंपनी ने सुप्रीम कोर्ट में इस डेड लाइन को आगे बढ़ाने की अपील की है यही वजह कि मामला लटक रहा है.

क्या दिवालिया हो जाएगी कंपनी ?आर्थिक संकट से निकालने के लिए वोडाफोन-आईडिया को सरकार की ओर मिलने वाली आर्थिक मदद पर डोएचे बैंक का कहना है कि सरकार द्वारा मध्यम अवधि की बजाय तत्काल सहायता 'अच्छा सौदा' नहीं होगा. इस जर्मन बैंक का कहना है कि वोडाफोन-आईडिया की को-प्रमोटर आदित्य बिड़ला ग्रुप इस कंपनी को दिवालिया घोषित करने पर भी विचार कर सकती है जिससे वो फिर से कारोबार में शेयर खरीद सके.

क्या है बैंकों की राय बैंक का कहना है कि भारत में टेलीकॉम इंडस्ट्री के नियम-कानून साफ नहीं है. केंद्र सरकार वोडाफोन-आईडिया के प्रमोटर्स को दिवालिया कंपनी की प्रापर्टी खरीदने से रोकना चाह रही है जिससे कंपनी, कानून में मौजूद कमियों का फायदा नहीं उठा पाए. बैंक आगे कहता है कि स्व-घोषित दिवालिया के मामलों में नियम-कानून पूरी तरफ से साफ नहीं हैं.

बंद होने वाली है वोडाफोन-आईडिया ?वोडाफोन-आईडिया पर एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू(एजीआर) के मद में 53,000 करोड़ बकाया है. कंपनी के बंद के बारे में चेयरमैन कुमार मंगलम बिड़ला पहले ही इशारा कर चुके हैं कि अगर सरकार या कोर्ट ने मदद नहीं को वोडाफोन-आईडिया बंद हो सकती है.

वोडाफोन-आईडिया को बचाने का फॉर्मूला डॉएचे बैंक का कहना है कि अगर कंपनी को बचे रहना है तो वोडाफोन-आईडिया को अपने टैरिफ की कीमतों को और मंहगा करना होगा. दूसरा, सरकार की तरफ से भी अच्छी-खासी मदद लेनी चाहिए और बाज़ार में अपना शेयर बचा कर रखना होगा. बैंक का कहना है कि अगर तीन में दो ज़रूरतें पूरी हो भी गयी तो भी गारंटी नहीं है कि उसके लिए चीज़ें आसान हो जाएं.

मार्केट में बचेंगी बस दो कंपनियां ?टेलिकॉम सेक्टर के जानकार कहते हैं कि फिलहाल जियो, बाज़ार में अपना मार्केट शेयर बढ़ाने के लिए पूरा दम लगा रही है. नए ग्राहक बनाने के लिए कंपनी काफी अग्रेसिव कैंपेन कर रही है. जानकार इशारा करते हैं कि आने वाले 9 से 12 महीनों में टेलीकॉम सेक्टर में रिलायंस जियो और भारती एयरटेल ही राज करेंगी.

जियो की कीमत 66 अरब डॉलर टेलीकॉम सेक्टर के जानकार मानते हैं कि टैरिफ प्लान की कीमतें बढ़ने और नए ग्राहक जुड़ने के बाद जियो की ऑपरेटिंग आमदनी आने वाले दो सालों लगभग दो गुनी हो सकती है. इस आमदनी के 52,400 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है. साथ ही देश की लगभग आधी जनसंख्या यानि 50 करोड़ लोग जियो का ग्राहक हो सकते हैं. इकॉनामिक टाइम्स की खबर का अनुसार, ब्रोकरेज कंपनी सीएलएसए का कहना है कि वित्त वर्ष 2022 तक जियो के मोबाइल कारोबार की कुल कीमत 66 अरब डॉलर हो सकती है.

टॅग्स :वोडाफ़ोनटेलीविजन इंडस्ट्रीजियोमोदी सरकार
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