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गूगल, फेसबुक, अमेजन और एपल पर अपनी ताकत के बेजा इस्तेमाल का लगा आरोप, विशाल आकार को टुकड़ों में बांटने की उठी मांग

By रजनीश | Updated: July 31, 2020 10:04 IST

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेजन के आलोचक रहे हैं। उन्होंने हाल ही में इस बारे में ट्विटर पर भी लिखा, "अगर कांग्रेस बड़ी टेक्नॉलॉजी कंपनियों के कामकाज में पारदर्शिता नहीं लाती है और जो उन्हें साल भर पहले ही करना चाहिए था, मैं ये कार्यकारी आदेश के जरिए खुद ही कर दूंगा।"

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ठळक मुद्देगूगल पर छोटी कंपनियों का कॉन्टेंट चुराने का आरोप लगाया जिससे कि यूजर्स उन्हीं के वेब पेज पर ज्यादा समय देंफेसबुक पर इंस्टाग्राम जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों को खरीद लेने का आरोप है।

तकनीक की दुनिया में प्रतिस्पर्धियों को आगे बढ़ने से रोकने के मामले में इन दिनों अमेरिकी कांग्रेस में सुनवाई चल रही है। इस मामले में गूगल, फेसबुक, एपल और अमेजन जैसी दिग्गज कंपनियों के प्रमुखों को अपनी कंपनियों के बचाव में सफाई देनी पड़ रही है।इन कंपनियों पर अपनी ताकत के दुरुपयोग से प्रतिस्पर्धियों को दबाने का आरोप है। हालांकि अमेजन के मालिक जेफ बेजोस का कहना है कि दुनिया को 'बड़ी कंपनियों की जरूरत' है जबकि फेसबुक, एपल और गूगल का कहना है कि उनकी कंपनियों ने इनोवेशंस के अनुकूल माहौल तैयार किया है।

अमरीकी कांग्रेस में नियमों और कारोबारी प्रतिस्पर्धा में बाधा पहुंचाने के आरोपों पर सुनवाई चल रही है। इसी मामले में बड़ी टेक कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) को पेश भी होना पड़ा है। इन बड़ी कंपनियों की लगातार बढ़ती जा रही ताकत और उसके दुरुपयोग के चलते कुछ का मानना है कि इन्हें विभाजित कर दिया जाना चाहिए। कांग्रेस के डेमोक्रेट सदस्य कंपनी जगत के लोगों पर प्रतिस्पर्धा के मुद्दे को लेकर जोर दे रहे थे जबकि रिपब्लिकन सदस्य इस बात को लेकर ज्यादा फिक्रमंद थे कि ये कंपनियां सूचनाओं का प्रबंधन किस तरह से करती हैं, और क्या वे कंजर्वेटिव विचारों को दरकिनार भी करते हैं?सुनवाई कर रही समिति के एक सदस्य कांग्रेसमैन डेविड सिसिलाइन ने कहा कि एक साल की जांच के बाद ये बात सामने आई है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स ने "अपने विस्तार के लिए नुकसानदेह और दूसरों को बर्बाद करने वाले तरीके से अपनी ताकत का इस्तेमाल" किया है।डेविड सिसिलाइन ने कहा कि वो इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि ये कंपनियां एकाधिकारवादी मॉडल पर चल रही हैं और उन्होंने इसे रोकने के लिए कार्रवाई किए जाने की भी मांग की।सुनवाई के बाद आख़िर में उन्होंने कहा, कंपनियों को विभाजित किए जाने की ज़रूरत है और इन सभी को पूरी तरह से नियम-कायदों के दायरे में लाए जाने की जरूरत है।वहीं गूगल के सुंदर पिचाई, फेसबुक के मार्क जुकरबर्ग, अमेजन के जेफ बेजोस और एपल के टिम कुक ने जोर देकर कहा कि उन्होंने कुछ भी गैरकानूनी नहीं किया है और उनकी कंपनियां अमरीकी मूल्यों का पालन करती हैं।गूगल पर आरोपसुनवाई के दौरान सासंदों ने गूगल पर छोटी कंपनियों का कॉन्टेंट चुराने का आरोप लगाया जिससे कि यूजर्स उन्हीं के वेब पेज पर ज्यादा समय दें।अमेजन पर आरोपअमेजन प्लेटफॉर्म पर अपना सामान बेचने वाले लोगों से कंपनी के बर्ताव को लेकर शिकायत है। अमेजन के कारोबारी तौर-तरीके की जांच कर रहे यूरोपीय नियामक ने कहा कि अमेजन की दोहरी भूमिका प्रतिस्पर्धा विरोधी है और कांग्रेस को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए। डेविड सिसिलाइन ने कहा कि अमेजन एक तरफ तो दूसरे विक्रेताओं को अपनी साइट पर सामान बेचने की अनुमति देता है तो दूसरी तरफ खुद भी वही सामान ग्राहकों को बेचता है।फेसबुक और एपल पर आरोपफेसबुक पर इंस्टाग्राम जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों को खरीद लेने का आरोप है। वहीं एपल के एप स्टोर पर भी लोगों के सवाल हैं।  

इन कंपनियों पर कार्रवाई के सवाल पर रिपब्लिकन पार्टी के कुछ सदस्यों ने संकेत दिए कि वे कंपनियों को विभाजित करने के विचार के समर्थन में नहीं हैं। एक कमेटी मेंबर ने तो यह भी कहा कि 'बड़ा होना बुरी बात नहीं' है।

सुनवाई के दौरान ज्यादातर सदस्य प्रतिस्पर्धियों पर कारोबारी ताकत के इस्तेमाल और इन कंपनियों के अपने प्लेटफॉर्म पर अभिव्यक्ति की आजादी को मैनेज करने के तरीके पर सवाल उठे। राष्ट्रपति ट्रंप ने क्या कहा?अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अमेजन के आलोचक रहे हैं। उन्होंने हाल ही में इस बारे में ट्विटर पर भी लिखा, "अगर कांग्रेस बड़ी टेक्नॉलॉजी कंपनियों के कामकाज में पारदर्शिता नहीं लाती है और जो उन्हें साल भर पहले ही करना चाहिए था, मैं ये कार्यकारी आदेश के जरिए खुद ही कर दूंगा।"

ट्रंप ने संवाददाताओं से ये भी कहा कि व्हॉइट हाउस के अधिकारी इस सुनवाई पर नजर रखे हुए हैं। उन्होंने कहा, "बड़ी टेक कंपनियां जो कर रही हैं, वो बहुत बुरा है।" टेक एक्सपर्ट डैन आइव्स का कहना है कि वाशिंगटन में तूफान के बादल मंडरा रहे हैं लेकिन इस बात की संभावना कम ही है कि कांग्रेस कोई नया कानून लेकर सामने आएगा जो बड़ी टेक कंपनियों को बदलने पर मजबूर करेगा।दरअसल फेसबुक, गूगल, अमेजन जैसी कंपनियां काफी ताकतवर हो चुकी हैं और कई बार इन कंपनियों पर अपने ताकत के दुरुपयोग की बातें सामने आई हैं। फेसबुक पर तो आम जनमानस और उनकी सोच तक को प्रभावित करने के सवाल उठते रहते हैं।

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