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Surya Grahan 2026: फरवरी में वलयाकार सूर्य ग्रहण, आसमान में नज़र आएगा ‘रिंग ऑफ फायर’, जानें समय, तारीख व अन्य ज़रूरी जानकारी

By रुस्तम राणा | Updated: February 13, 2026 15:50 IST

यह वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां पर सूर्य ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका में दिखाई देगा।

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Surya Grahan 2026: इस महीने एक सबसे अद्भुत खगोलीय घटना होने वाली है। 17 फरवरी, 2026 को सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है। दिलचस्प बात है कि यह सूर्यग्रहण वलयाकार (Annular Solar Eclipse) होगा। इसे रिंग ऑफ फायर (Ring Of Fire) के नाम से जाना जाता है। आसमान देखने वालों के लिए एक रोमांचक पल होगा और वे इसकी सुंदरता को अपनी आंखों और अपने कैमरों में कैद कर पाएंगे। यह एस्ट्रोनॉमर्स के लिए उपयोगी है क्योंकि वे उसी आधार पर गहरा एनालिसिस करते हैं और आसमान देखने वाले हमेशा इस तरह के पलों को कैद करना पसंद करते हैं। वहीं ज्योतिष और धार्मिक दृष्टि से भी यह एक महत्वपूर्ण घटना होती है। 

सूर्य ग्रहण 2026 कब लगेगा? यह वलयाकार सूर्य ग्रहण फाल्गुन महीने की अमावस्या तिथि को लगेगा। यह ग्रहण मंगलवार (17 फरवरी 2026) को भारतीय समय अनुसार दोपहर 3.26 बजे से शुरू होगा और शाम 7 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। यह ग्रहण लगभग 4 घंटे 32 मिनट की अवधि का होगा। 

क्या सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई देगा?

यह वलयाकार सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां पर सूर्य ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा। यह ग्रहण मुख्य रूप से अंटार्कटिका में दिखाई देगा। बर्फीले महाद्वीप के अलावा, अर्जेंटीना और दक्षिण अफ्रीका के कुछ हिस्सों में सूर्योदय के बाद आंशिक ग्रहण दिखाई देने की संभावना है। इस दौरान ‘रिंग ऑफ फायर’ चिली, अर्जेंटीना, उरुग्वे, ब्राज़ील, कोट डी आइवर, घाना, टोगो, बेनिन और नाइजीरिया से दिखाई देने की उम्मीद है।

वलयाकार सूर्य ग्रहण क्या होता है?

वलयाकार सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य के सामने से गुजरता है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण से अलग होता है। Total Solar Eclipse में पृथ्वी के कुछ हिस्सों में दिन के समय अंधेरा छा जाता है। हालांकि, पूर्ण सूर्य ग्रहण के उलट वलयाकार सूर्य ग्रहण में सूर्य पूरी तरह से ढका नहीं होता।

वलयाकार सूर्य ग्रहण में आमतौर पर चंद्रमा की आकृति के चारों ओर चमकदार ‘रिंग ऑफ फायर’ (आग के छल्ले जैसी) दिखाई देती है। ध्यान देने वाली बात है कि ‘Annular’ का मतलब होता है ‘वलयाकार’ (अंगूठी के आकार का) और इसे देखने वाले लोग ग्रहण के दोनों किनारों से इसे आंशिक रूप में देख पाते हैं। ध्यान रहे कि वलयाकार सूर्य ग्रहण को नंगी आंखों से देखना सुरक्षित नहीं होता।

सूर्य ग्रहण 2026 का सूतक काल

सूर्य ग्रहण से 12 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है। इस दौरान शुभ काम करने से बचना चाहिए। सूतक काल ग्रहण खत्म होने तक रहता है। हालांकि, जिन जगहों पर ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां सूतक काल लागू नहीं होता और रोज़ाना के काम सामान्य रूप से किए जा सकते हैं।

ग्रहण के दौरान क्या करें

भजन, कीर्तन, ध्यान और मंत्र जाप करेंअपने इष्ट देवता या कुल देवता के मंत्रों का जाप करेंग्रहण खत्म होने के बाद, स्नान करें और घर में गंगाजल छिड़केंसूतक शुरू होने से पहले, दूध, दही, अचार और दूसरी खाने की चीज़ों में तुलसी के पत्ते डालें

टॅग्स :सूर्य ग्रहणज्योतिष शास्त्र
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