कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष को मनाई जाने वाली देवउठनी या देवोत्थान एकादशी पर भगवान श्रीविष्णु की पूरे विधि-विधान से पूजा की जाती है। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी चार महीने की नींद से जागते हैं। ...
रोहिणी व्रत में रोहिणी नक्षत्र का मुख्य स्थान होता है। इस दिन भगवान वासुपूज्य की पूजा की जाती है। साथ ही 3, 5 और 7 सालों के लिए इस व्रत को रखना पड़ता है। ...
वैकुण्ड चतुर्दशी का पर्व हर साल कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है. इस बार ये चतुर्दशी 10 नवंबर को पड़ रही है. हिन्दू मान्यातओं के अनुसार इस दिन भगवान विष्णु और शिव जी की पूजा का विधान है. इस दिन व्रत रखने का भी विशेष महत्व होता ह ...
देवउठनी एकादशी पर ना सिर्फ तुलसी की पूजा होती है बल्कि भगवान विष्णु अपनी नींद से जागते हैं और आज ही के दिन विवाह जैसे कार्यों का शुभारम्भ हो जाता है। ...
देवश्यनी एकादशी के बाद से सभी शुभ कार्य बंद हो जाते हैं। जो की देवउठनी एकादशी पर ही आकर वापिस से शुरू होते हैं। माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु अपनी नींद से जागते हैं। ...
करतारपुर साहिब इसलिए भी बेहद खास है क्योंकि गुरु नानक देव जी ने यहां अपनी आखिरी सांसे ली थी। सिर्फ यही नहीं अपने जीवन के 18 वर्ष उन्होंने यही गुजारे थे। ...
लोस सेवा देवउठनी एकादशी के साथ ही शहर में शहनाइयों की गूंज फिर सुनाई देगी. हालांकि लोगों में 7 और 8 नवंबर को एकादशी को लेकर असमंजस है किंतु ज्योतिषियों के अनुसार 8 नवंबर को ही देवउठनी एकादशी मनाई जाएगी. दरअसल 7 नवंबर को सुबह करीब 10 बजे से एकादशी प्र ...