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Karwa Chauth 2020: करवा चौथ का कठिन निर्जला व्रत आज, जानिए पूजा विधि, व्रत नियम, शुभ मुहूर्त, पूजन सामग्री और चांद देखने का शुभ समय

By गुणातीत ओझा | Updated: November 4, 2020 13:23 IST

विवाहित महिलाओं का पति की लंबी उम्र की कामना के लिए रखा जाना महापर्व करवाचौथ आज कई अच्छे संयोग में आया है।

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ठळक मुद्देकरवा चौथ कथा और पूजन का शुभ मुहूर्त  5:34 बजे से शाम 6:52 बजे तक है।सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखे जाने वाले इस व्रत को महिलाएं पति की दीर्घायु के  लिए रखती हैं।

Karwa Chauth 2020 Date, Puja Muhurat, Timing : विवाहित महिलाओं का पति की लंबी उम्र की कामना के लिए रखा जाना महापर्व करवाचौथ आज कई अच्छे संयोग में आया है। इस बार जहां करवा चौथ पर सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है, वहीं शिवयोग, बुधादित्य योग, सप्तकीर्ति, महादीर्घायु और सौख्य योग का भी निर्माण हो रहा है। ये सभी योग बहुत ही महत्वपूर्ण हैं और इस दिन की महत्ता और भी बढ़ाते हैं। खास तौर पर सुहागिनों के लिए यह करवा चौथ अखंड सौभाग्य देने वाला होगा। 

पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि करवा चौथ कथा और पूजन का शुभ मुहूर्त  5:34 बजे से शाम 6:52 बजे तक है। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी यानी करवा चौथ का व्रत। सूर्योदय से चंद्रोदय तक रखे जाने वाले इस व्रत को महिलाएं पति की दीर्घायु के  लिए रखती हैं। करवा चौथ व्रत में चंद्रमा की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस व्रत में चंद्रमा की पूजा करने से वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और पति की आयु लंबी होती है। इसलिए विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए इस व्रत को रखती हैं। इस दिन चंद्रमा के साथ-साथ शिव-पार्वती सहित गणेशजी व मंगल ग्रह के स्वामी देव सेनापति कार्तिकेय की भी विशेष पूजा होती है। 

करवा चौथ पर बन रहे हैं योगकरवा चौथ पर बुध के साथ सूर्य ग्रह भी विद्यमान होंगे, जो बुधादित्य योग बना रहे हैं। इस दिन शिवयोग के साथ ही सर्वार्थसिद्धि, सप्तकीर्ति, महादीर्घायु और सौख्य योग चार नवंबर को प्रातः 3:24 बजे से कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि सर्वार्थ सिद्धि योग एवं मृगशिरा नक्षत्र में चतुर्थी तिथि का समापन 5 नवंबर को प्रातः 5:14 बजे होगा। 

करवा चौथ मुहूर्तकरवा चौथ पूजा मुहूर्त- शाम 5:34 बजे से 6:52 बजे तकचंद्रोदय- 8:16 बजेचतुर्थी तिथि आरंभ- 03:24 (4 नवंबर)चतुर्थी तिथि समाप्त- 05:14 (5 नवंबर)

लाल रंग के कपड़े पहनें, मिलेगा पति का प्यारज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि करवाचौथ के दिन व्रत रखने वाली महिलाएं यदि लाल रंग के कपड़े पहनती हैं तो उन्हें जिंदगी भर पति का प्यार मिलेगा। माना जाता है कि लाल रंग गर्मजोशी का  प्रतीक है और मनोबल भी बढ़ाता है। साथ ही लाल रंग प्यार का प्रतीक भी माना जाता है। लाल रंग में महिलाएं अधिक सुंदर और आकर्षित दिखती हैं एवं सबके आकर्षण का केंद्र बिंदू बनती हैं। नीले, भूरे और काले रंग के कपड़े न पहनें, क्योंकि ये अशुभता के प्रतीक हैं।

छलनी की ओट से चंद्रदर्शनकरवा चौथ को लेकर मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा की किरणें सीधे नहीं देखी जाती हैं, उसके मध्य किसी पात्र या छलनी द्वारा देखने की परंपरा है क्योंकि चंद्रमा की किरणें अपनी कलाओं में विशेष प्रभावी रहती हैं। जो लोक परंपरा में चंद्रमा के साथ पति-पत्नी के संबंध को उजास से भर देती हैं। चूंकि चंद्र के तुल्य ही पति को भी माना गया है, इसलिए चंद्रमा को देखने के बाद तुरंत उसी छलनी से पति को देखा जाता है। इसका एक और कारण बताया जाता है कि चंद्रमा को भी नजर न लगे और पति-पत्नी के संबंध में भी मधुरता बनी रहे।

बाजार को  उम्मीदकरवा चौथे से बाजार को भी बड़ी उम्मीद है। दरसल, कोरोना महामारी के कारण मंदी है। जानकारों का मानना है कि दिवाली से पहले पड़ने वाले करवा चौथ से ही बाजार की रौनक लौट सकती है। इस दिन महिलाओं के लिए शॉपिंग की जाती है। उन्हें सोने के आभूषण भेंट किए जाते हैं।

करवा चौथ की पूजन सामग्री ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि करवा चौथ के व्रत से एक-दो दिन पहले ही सारी पूजन सामग्री को इकट्ठा करके घर के मंदिर में रख दें. पूजन सामग्री इस प्रकार है- मिट्टी का टोंटीदार करवा व ढक्कन, पानी का लोटा, गंगाजल, दीपक, रूई, अगरबत्ती, चंदन, कुमकुम, रोली, अक्षत, फूल, कच्चा दूध, दही, देसी घी, शहद, चीनी,  हल्दी, चावल, मिठाई, चीनी का बूरा, मेहंदी, महावर, सिंदूर, कंघा, बिंदी, चुनरी, चूड़ी, बिछुआ, गौरी बनाने के लिए पीली मिट्टी, लकड़ी का आसन, छलनी, आठ पूरियों की अठावरी, हलुआ और दक्षिणा के पैसे।

करवा चौथ की पूजा विधिकरवा चौथ पर दिनभर व्रत रखा जाता है और रात में चंद्रमा की पूजा की जाती है। इसके लिए पूजा-स्थल को खड़िया मिट्टी से सजाया जाता है और पार्वती की प्रतिमा की भी स्थापना की जाती है। पारंपरिक तौर पर पूजा की जाती है और करवा चौथ की कथा सुनाई जाती है। करवा चौथ का व्रत चांद देखकर खोला जाता है, उस मौके पर पति भी साथ होता है। दीए जलाकर पूजा की शुरुआत की जाती है। करवा चौथ की पूजा में जल से भरा मिट्टी का टोंटीदार कुल्हड़ यानी करवा, ऊपर दीपक पर रखी विशेष वस्तुएं, श्रंगार की सभी नई वस्तुएं जरूरी होती है। पूजा की थाली में रोली, चावल, धूप, दीप, फूल के साथ दूब अवश्य रहती है। शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय की मिट्टी की मूर्तियों को भी पाट पर दूब में बिठाते हैं। बालू या सफेद मिट्टी की वेदी बनाकर भी सभी देवताओं को विराजित करने का विधान है। अब तो घरों में चांदी के शिव-पार्वती पूजा के लिए रख लिए जाते हैं। थाली को सजाकर चांद को अर्घ्य दिया जाता है। फिर पति के हाथों से मीठा पानी पीकर दिन भर का व्रत खोला जाता है। उसके बाद परिवार सहित खाना होता है।

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