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Jyeshtha Amavasya 2020: कब है ज्येष्ठ अमावस्या? इसी दिन शनि जयंति और वट सावित्रि व्रत

By मेघना वर्मा | Updated: May 16, 2020 10:30 IST

अमावस्या का दिन पुण्य के लिए जाना जाता है। इस दिन पितरों की शांति के लिए लोग पिंड दान, तर्पण जैसे कार्य करते हैं।

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ठळक मुद्देज्येष्ठ माह की अमावस्या का महत्व सबसे अधिक बताया जाता है।ज्येष्ठ अमावस्या के दिन दो और भी धार्मिक पर्व पड़ते हैं।

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार हर महीने पूर्णिमा और अमावस्या आती है। अमावस्या का दिन पुण्य के लिए जाना जाता है। इस दिन पितरों की शांति के लिए लोग पिंड दान, तर्पण जैसे कार्य करते हैं। वहीं ज्येष्ठ माह की अमावस्या का महत्व सबसे अधिक बताया जाता है। ज्येष्ठ अमावस्या के दिन दो और भी धार्मिक पर्व पड़ते हैं। एक न्याय के देवता शनि की जयंती और दूसरा वट सावित्रि व्रत।

कब है ज्येष्ठ अमावस्या

ज्येष्ठ अमावस्या तिथि - 22 मई 2020वट सावित्रि व्रत - 22 मई 2020शनि जयंति - 22 मई 2020ज्येष्ठ अमावस्या तिथि आरंभ –  रात्रि 21:35  बजे (21 मई 20209) सेज्येष्ठ अमावस्या तिथि समाप्त – रात्रि 22:08 बजे (22 मई 2020) तक

ज्येष्ठ अमावस्या को मनाई जाती है शनि जयंति

ज्येष्ठ अमावस्या के दिन शनि जयंति भी मनाई जाती है। ज्येतिष और धार्मिक दृष्टि से शनि देव को कर्मों का देवता माना जाता है। इस दिन लोग शनिदेव को मनाने का उन्हें प्रसन्न करने के लिए पूजा-अर्चना करते हैं। शनि दोष से बचने के लिये इस दिन शनिदोष निवारण के उपाय विद्वान ज्योतिषाचार्यों के करवा सकते हैं। इस कारण ज्येष्ठ अमावस्या का महत्व बहुत अधिक बढ़ जाता है।

महिलाएं पति की लंबी उम्र के लिए रखती हैं व्रत

ज्येष्ठ अमावस्या पर विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिये इस दिन वट सावित्री व्रत भी रखती हैं। इसलिये उत्तर भारत में तो ज्येष्ठ अमावस्या विशेष रूप से सौभाग्यशाली एवं पुण्य फलदायी मानी जाती है।

ऐसे करें ज्येष्ठ अमावस्या की पूजा

1. ज्येष्ठ अमावस्या को स्त्रियां वट सावित्रि का व्रत करती हैं मगर इस दिन पति-पत्नी दोनों ही उपवास रख सकते हैं।2. सुबह उठकर स्नान आदि करें। 3. सूर्य देव को अर्घ्य जरूर दें।  इसके बाद बहते जल में तिल प्रवाहित करें।4. पीपल के पेड़ को जल का अर्घ्य दें। 5. आज के दिन शनिदेव की पूजा जरूर करें। 6. शनि का पाठ या मंत्र-जाप भी कर सकते हैं। 7. पूजा के बाद दान-दक्षिणा जरूर करें।

टॅग्स :अमावस्यावट पूर्णिमाशनि देव
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