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कांग्रेस और डीएमके में टकराव, द्रमुक नेता दुरईमुरुगन ने कहा- Congress के पास वोट बैंक नहीं

By भाषा | Updated: January 18, 2020 20:17 IST

बैठक के बाद अलागिरी ने कहा, ‘‘ विचारों में अंतर होने पर फैसला किया गया कि टीएनसीसी और द्रमुक प्रमुख इन्हें सुलझाएंगे और दोनों पार्टियों के नेताओं को अपने विचार सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं है।’’ दोनों पार्टियों के मदभेद नहीं होने के दावे को दोहराते हुए अलागिरी ने कहा कि दोनों पार्टियां एकजुट हैं और आगे भी रहेंगी।

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ठळक मुद्देकांग्रेस और द्रमुक ने विवाद निपटाने और मुद्दों को आतंरिक रूप से सुलझाने का फैसला किया।अलागिरी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन से मिलने उनके पार्टी मुख्यालय ‘‘ अन्ना अरविलयम’’ पहुंचे।

तमिलनाडु के स्थानीय चुनाव में सीटों के बंटवारों को लेकर हुए खींचतान के कई दिनों बाद शनिवार को कांग्रेस और द्रमुक ने विवादों को दबाने और मुद्दों को सार्वजनिक करने के बजाय आंतरिक आधार पर सुलझाने का फैसला किया।

विवाद को खत्म करने की पहल करते हुए तमिलनाडुकांग्रेस समिति (टीएनसीसी) के अध्यक्ष केएस अलागिरी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ द्रमुक प्रमुख एमके स्टालिन से मिलने उनके पार्टी मुख्यालय ‘‘ अन्ना अरविलयम’’ पहुंचे।

बैठक के बाद अलागिरी ने कहा, ‘‘ विचारों में अंतर होने पर फैसला किया गया कि टीएनसीसी और द्रमुक प्रमुख इन्हें सुलझाएंगे और दोनों पार्टियों के नेताओं को अपने विचार सार्वजनिक करने की जरूरत नहीं है।’’ दोनों पार्टियों के मदभेद नहीं होने के दावे को दोहराते हुए अलागिरी ने कहा कि दोनों पार्टियां एकजुट हैं और आगे भी रहेंगी।

उन्होंने द्रमुक नेता दुरईमुरुगन की इस टिप्पणी को अधिक तवज्जो नहीं दी की कांग्रेस के पास वोट बैंक नहीं है। उन्होंने कहा कि कहा कि नेता ने अपने विचार रखे थे और इसमें कोई समस्या नहीं है। अलागिरी ने भरोसा जताया कि उनकी पार्टी का द्रमुक के साथ गठबंधन वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव के बाद भी जारी रहेगा।

कांग्रेस नेताओं से विचार विमर्श के बाद स्टालिन ने दोनों पार्टियों के नेताओं से यह स्थिति दोबारा पैदा नहीं होने देने के लिए अपने विचार सार्वजनिक करने से बचने को कहा। अलागिरी पर आरोप लगाते हुए स्टालिन ने कहा कि सीट बंटवारा जैसे मुद्दे का हल बातचीत से होना चाहिए लेकिन कांग्रेस के सार्वजनिक बयान से दोनों तरफ से अवांछित बयान दिए गए। उन्होंने कहा की जुबानी जंग से राजनीतिक विरोधियों और मीडिया को मौका मिलता है।

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