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चिराग पासवान की नाराजगी प्रेशर पॉलिटिक्स का हिस्सा तो नहीं! ज्यादा सीटों की चाहत चर्चा में

By एस पी सिन्हा | Updated: August 5, 2020 18:51 IST

चिराग पासवान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बेहद नाराज हैं. वह लगातार नीतीश कुमार पर हमले कर रहे हैं. विकास कार्यों को लेकर, कानून व्यवस्था को लेकर तो कभी कोरोना संक्रमण और शराबबंदी को लेकर सवाल उठा रहे हैं.

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ठळक मुद्देकई बार क्षेत्र की समस्याओं को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बात नहीं की. चिराग पासवान की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई पार्टी के संसदीय दल की बैठक में लोजपा ने बिहार के 94 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी के संकेत दिए हैं.सवाल उठने लगा है कि क्या चिराग पासवान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए से अलग रास्ता तलाश रहे हैं?

पटनाः बिहार विधानसभा चुनाव के ठीक पहले मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के प्रति लोक जनशक्ति पार्टी (लोजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चिराग पासवान की तल्खी इन दिनों सुर्खियों में है.

वह सीधे-सीधे नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली सरकार के काम पर कड़वी टिप्पणी कर रहे हैं. वैसे कहा तो यह जा रहा है कि विधानसभा चुनाव में ज्यादा से ज्यादा सीटों को लेकर यह दबाव की राजनीति के तहत किया जा रहा है, लेकिन अध्यक्ष चिराग पासवान का कहना है कि मिलने की बात तो दूर नीतीश कुमार उनसे बात भी नहीं करते हैं. उन्होंने कहा है कि कई बार क्षेत्र की समस्याओं को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री से बातचीत की कोशिश की, लेकिन उन्होंने बात नहीं की. 

इस तरह से चिराग पासवान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से बेहद नाराज हैं. वह लगातार नीतीश कुमार पर हमले कर रहे हैं. विकास कार्यों को लेकर, कानून व्यवस्था को लेकर तो कभी कोरोना संक्रमण और शराबबंदी को लेकर सवाल उठा रहे हैं.

बैठक में लोजपा ने बिहार के 94 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी के संकेत दिए

वहीं, चिराग पासवान की अध्यक्षता में पिछले दिनों हुई पार्टी के संसदीय दल की बैठक में लोजपा ने बिहार के 94 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी के संकेत दिए हैं. ऐसे में सवाल उठने लगा है कि क्या चिराग पासवान मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले एनडीए से अलग रास्ता तलाश रहे हैं?

चिराग की ताजा नाराजगी की दो वजहें मानी जा रहीं हैं. पहली- उन्हें संदेह है कि विधानसभा चुनाव में लोजपा को लोकसभा चुनाव की उपलब्धियों के हिसाब से सीटें नहीं मिलेंगी. दूसरी- राज्यपाल कोटे से भरी जाने वाली विधान परिषद की 12 सीटों के मनोनयन के मामले में राजग के सहयोगी के नाते उनकी राय नहीं मांगी जा रही है.

जदयू और भाजपा के नेता ही आपस में ही बात कर रहे हैं

इस मामले में जदयू और भाजपा के नेता ही आपस में ही बात कर रहे हैं. वैसे, बिना किसी की राय मांगे, चिराग ने इन 12 सीटों में से दो की मांग की है. उनकी राय है कि बाकी बची 10 सीटें जदयू व भाजपा बराबरी से बांट लें. लेकिन जदयू उनकी राय को तरजीह नहीं दे रहा है.

उसका कहना है-सीटें तो जदयू व भाजपा के बीच ही बंटेगीं. भाजपा चाहे तो अपने हिस्से की सीटों में से लोजपा को भी दे दे. इस बीच, लोजपा नेता राजू तिवारी ने कहा है कि संगठन बिहार में विधानसभा की 94 सीटों पर चुनाव लडने के लिए तैयार है और जल्द अन्य 149 सीटों के बूथ लिस्ट जमा किए जाएंगे.

बूथ एजेंट से प्रदेश संसदीय बोर्ड बैठक कर पार्टी के विचारों से अवगत कराएगी

सभी बूथ एजेंट से प्रदेश संसदीय बोर्ड बैठक कर पार्टी के विचारों से अवगत कराएगी और उन्हें पार्टी की शपथ दिलाकर बिहार फर्स्ट-बिहारी फर्स्ट के बारे में बताएगी. राजू तिवारी ने कहा कि सभी प्रत्याशी चिराग पासवान के हर फैसले के साथ हैं. हर स्थिति के लिए प्रत्याशियों ने तैयारी कर रखी है.

वैसे कहा तो यह भी जा रहा है कि लोजपा बिहार की सभी सीटों पर चुनाव तैयारियों में जुटी है, जिसे प्रेशर पॉलिटिक्स के तौर पर भी देखा जा रहा है. हालांकि, चिराग पासवान ने पिछले दिनों कार्यकर्ताओं को कहा था कि बिहार में गठबंधन का स्वरूप बदल रहा है और पार्टी कार्यकर्ताओं को हर परिस्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए.

अगर जरूरत पड़ी तो अकेले भी चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए

लोजपा को बिहार चुनाव को लेकर अपनी तैयारी पूरी रखनी चाहिए और अगर जरूरत पड़ी तो अकेले भी चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहना चाहिए. चिराग पासवान ने अब तो यह भी साफ़ कर दिया है कि वह राजग के साथ तभी बने रहेंगे, जब उन्हें 2015 की तरह ही 2020 में भी 42 सीटें मिलेगीं.

उन्होंने साफ़ कर दिया है कि इससे कम पर कोई बात नहीं होनेवाली है. मसलन चिराग पासवान का दावा है कि लोजपा को बिहार में विधानसभा की 42 सीटें चाहिए और इस समीकरण से लोजपा समझौता नहीं करने वाली है. चिराग पासवान कहा कि सीटों को लेकर बात 2014 में ही हो चुकी है.

उन्होंने बताया कि 2017 में जब जदयू एनडीए में शामिल हुई थी, तब यह बात उठी थी कि सभी दलों को थोड़ा- थोड़ा एडजस्टमेंट करना होगा. चिराग पासवान ने कहा है कि उस वक्त 2019 में ही उन्होंने अमित शाह से कहा था ऐसे पार्टियां आती रही तो हमारी सीटें कम होती जाएंगी जो हमारे लिए चिंता का विषय होगा. लेकिन अमित शाह ने आश्वासन दिया था कि विधानसभा में सीटों को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं है.

पासवान 2015 से कम सीटों पर 2020 का विधान सभा चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हैं

ऐसे में यह स्पष्ट है कि चिराग पासवान 2015 से कम सीटों पर 2020 का विधान सभा चुनाव लड़ने को तैयार नहीं हैं. दरअसल, 2015 के बिहार चुनाव में लोजपा ने भाजपा के सहयोगी के तौर पर 42 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन इस बार नीतीश कुमार की एनडीए में वापसी के बाद लोजपा को पिछली बार की तरह तवज्जो नहीं मिल पा रही है.

इसीलिए चिराग पासवान चिंतित नजर आ रहे हैं. लोजपा 2005 के विधान सभा चुनाव का उदाहरण पेश कर रही है. लोजपा ने बिना तालमेल के 178 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिनमें 29 पर जीत मिली और उसे 12.62 फीसदी वोट मिले थे. इसी आधार पर वो खास तवज्जो चाहते हैं.

लोकसभा चुनाव में लोजपा को बिहार की 40 में से 6 सीटें दी गई थी. इसके अलावा रामविलास पासवान को भाजपा ने अपने कोटे से राज्यसभा भेजा है. इसी पैटर्न के तहत लोजपा विधानसभा चुनाव में करीब 43 सीटों पर दावेदारी कर रही है.

वहीं, बिहार की 243 सीटों में से भाजपा-जदयू 105-105 सीटों पर चुनाव लड़ने का मन बना रही है और शेष 33 सीटें लोजपा को देना चाहती है, जिस पर चिराग पासवान राजी नहीं है. ऐसे में चिराग पासवान ने अब 94 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर रहे हैं.

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