1 / 7गिलोय इसे गुड़ूची के नाम से भी जाना जाता है। यह बेल पथरी और पथरी से जुड़े अन्य विकारों के इलाज के लिए जानी जाती है। पेशाब करते समय यदि जलन महसूस हो तो गिलोय के तने का चूर्ण 10 ग्राम आंवला के फ लों का चूर्ण 10 ग्राम सोंठ चूर्ण 5 ग्राम गोखरु के बीजों का चूर्ण 3 ग्राम और अश्वगंधा की जड़ों का चूर्ण 5 ग्राम लिया जाए और इसे 100 उस पानी में उबाला जाए, प्राप्त काढ़े को रोगी को दिन में एक बार प्रतिदिन एक माह तक दिया जाना चाहिए।2 / 7पुनर्नवा: खरपतवार समझे जाने वाला यह पौधा किडनी में पथरी के लिए एक महत्वपूर्ण पौधा है। पातालकोट के आदिवासियों के अनुसार पथरी की वजह से कमर और पेट में दर्द होने पर पुनर्नवा, कचूर और अदरक की समान मात्रा लेकर रोगी को खिलाना चाहिए, दर्द में तुरंत आराम मिलता है।3 / 7ज्यादा पानी पीने से शरीर हाईड्रेट रहता है और इससे स्टोन भी यूरीन के रास्ते बाहर निकल जाता है। इसलिए, रोज़ाना कम से कम 8-10 गिलास पानी पियें। इसके अलावा आप नींबू और संतरे का रस भी पी सकते हैं। इसमें सिट्रिक एसिड होता है, जो स्टोन बनने से रोकता है। पथरी के मरीज को अपनी सुबह की शुरुआत चाय या कॉफी से न करें, क्योंकि इससे पथरी का आकार बढ़ सकता है। 4 / 7सौंफ और तुलसी: सौंफ मिश्री, सूखा धनिया, इनको 50-50 ग्राम मात्रा में लेकर रात को 11/2 कप ठंडा पानी मिलाकर पीने से पथरी पेशाब के रास्ते बाहर निकल निकल सकती है। तुलसी का इस्तेमाल करना किडनी स्टोन दूर करने का काफी प्रचलित घरेलू उपाय है। इसके लिए प्रतिदिन 5-7 तुलसी के पत्तों को चबाकर खाएँ। इसमें एसिटिक एसिड एवं अन्य जरूरी तेल होते है जो पथरी को तोड़कर पेशाब के रास्ते बाहर निकालते है।5 / 72-3 बेलपत्र को पानी के साथ पीस लें और इसमें एक चुटकी काली मिर्च मिलाकर सेवन करें। दो सप्ताह तक इसका सेवन करने से गुर्दे की पथरी निकल सकती है, शोध के अनुसार विटामिन बी की 100-150 एमजी की नियमित खुराक लेने से पथरी से निजात मिल सकती है।6 / 7इलायची- एक चम्मच इलायची, खरबूजे के बीज की गिरी और दो चम्मच मिश्री एक कप पानी में डालकर उबालें ठंडा होने के बाद सुबह-शाम पियें। यह पथरी के इलाज में दवा की तरह असर करती है।7 / 7अश्वगंधा की जड़ों का गुनगुना रस पीने से पथरी का दर्द कम होता है। अश्वगंधा की जड़ों का रस और आंवला के फ लों का रस समान मात्रा में आधा आधा कप लिया जाए तो मूत्राशय और मूत्र मार्ग में पेशाब करते समय जलन की शिकायत खत्म हो सकती है। माना जाता है कि यह पथरी को गलाकर पेशाब मार्ग से बाहर भी निकाल फेंकता है।