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कौन थीं रानी वेलु नचियार?, ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाली पहली भारतीय?

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 3, 2026 12:24 IST

बलिदान और दूरदर्शी नेतृत्व आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा तथा भारत की प्रगति की यात्रा में साहस और देशभक्ति की मशाल के रूप में काम करेगा।

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ठळक मुद्देसुशासन और सांस्कृतिक गौरव के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी अत्यंत सराहनीय है।तमिलनाडु में अपना शिवगंगा साम्राज्य वापस जीता था।

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को रानी वेलु नचियार की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि दी और उन्हें एक महान रानी तथा भारत के सबसे वीर योद्धाओं में से एक बताया, जो साहस और रणनीतिक कौशल की प्रतिमूर्ति थीं। मोदी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘उन्होंने औपनिवेशिक दासता के खिलाफ आवाज उठाई और भारतीयों के स्वशासन के अधिकार पर बल दिया। सुशासन और सांस्कृतिक गौरव के प्रति उनकी प्रतिबद्धता भी अत्यंत सराहनीय है।’’

मोदी ने कहा कि उनका बलिदान और दूरदर्शी नेतृत्व आने वाली पीढ़ियों को सदैव प्रेरित करता रहेगा तथा भारत की प्रगति की यात्रा में साहस और देशभक्ति की मशाल के रूप में काम करेगा। वर्ष 1730 में जन्मीं रानी वेलु नचियार ईस्ट इंडिया कंपनी के खिलाफ युद्ध छेड़ने वाली पहली भारतीय रानी थीं, जिन्होंने तमिलनाडु में अपना शिवगंगा साम्राज्य वापस जीता था।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शनिवार को सावित्रीबाई फुले को एक महान समाज सुधारक करार दिया, जिन्होंने सेवा और शिक्षा के माध्यम से समाज के परिवर्तन के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सावित्रीबाई फुले की जयंती पर, हम एक ऐसी महान महिला को याद कर रह हैं, जिन्होंने सेवा और शिक्षा के माध्यम से समाज के परिवर्तन के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया।’’ उन्होंने कहा कि सावित्रीबाई फुले समानता, न्याय और करुणा के सिद्धांतों के प्रति समर्पित थीं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि फुले का दृढ़ विश्वास था कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे शक्तिशाली साधन है और उन्होंने अपना जीवन ज्ञान व शिक्षा के माध्यम से लोगों के जीवन को बदलने के लिए समर्पित किया। मोदी ने कहा कि वंचित और हाशिए पर खड़े लोगों की देखभाल में फुले की कार्य सेवा और मानवता का एक प्रेरणादायक उदाहरण बना हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि फुले की दूरदृष्टि समावेशी और सशक्त समाज के निर्माण में राष्ट्र के प्रयासों का मार्गदर्शन करती रहेगी।

प्रख्यात समाज सुधारक ज्योतिबा फुले की पत्नी, सावित्रीबाई फुले का जन्म 1831 में महाराष्ट्र में हुआ था और उन्हें कई लोग भारत की पहली महिला शिक्षिका मानते हैं। उन्होंने महिलाओं, विशेष रूप से वंचित समूहों की महिलाओं को शिक्षित करने में अग्रणी भूमिका निभाई और वह भी ऐसे समय में जब महिलाओं की शिक्षा को उतना महत्व नहीं दिया जाता था।

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