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उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा, "यूसीसी इस देश को एक सूत्र में बांधने का काम करेगी"

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: July 5, 2023 08:13 IST

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आईआईटी-गुवाहाटी के 25वें दीक्षांत समारोह में यूसीसी की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे पूरे देश को एक सूत्र में बांधा जा सकता है।

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ठळक मुद्देउपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने आईआईटी-गुवाहाटी के 25वें दीक्षांत समारोह को किया संबोधित उन्होंने यूसीसी लागू करने पर बल देते हुए कहा कि इससे पूरे देश को एक सूत्र में बांधा जा सकता हैअगर यूसीसी लागू करने में देरी होती है तो उसका हमारे मूल्यों पर विपरित असर पड़ेगा

गुवाहाटी: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इससे पूरे देश को एक सूत्र में बांधा जा सकता है और इस लिहाज से यूसीसी के लागू करने में देरी होती है। उसका हमारे मूल्यों पर विपरित असर पड़ेगा। 

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को आईआईटी-गुवाहाटी के 25वें दीक्षांत समारोह में बोलते हुए कहा, “हमें मिला हुआ संविधान बहुत ही कुशाग्र और बुद्धिमान लोगों द्वारा दिया गया था। जिसके ड्राफ्टिंग कमेटी के प्रमुख डॉ बीआर अंबेडकर  थे और उन्होंने संविधान में जो सबसे महत्वपूर्ण भाग शामिल किया था वो राज्य का नीति निदेशक सिद्धांतों है। वे इसके लिए निश्चित थे कि ये सिद्धांत देश के शासन में मौलिक हैं और कानून बनाने में इन सिद्धांतों को लागू करना राज्य का कर्तव्य है।"

समाचार वेबसाइट इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार उपराष्ट्रपति ने कहा कि हम केवल यूसीसी की बात न करें, इस देश में पंचायती राज व्यवस्था, सहकारिता और शिक्षा का अधिकार जैसे कानून राज्य के नीति निदेशक सिद्धांतों से ही निकले हैं।

उन्होंने कहा, "मैं यूसीसी पर कुछ लोगों की प्रतिक्रिया से स्तब्ध हूं, जब कि अनुच्छेद 44 के तहत निदेशक सिद्धांतों में कहा गया है कि राज्य पूरे क्षेत्र में नागरिकों के लिए एक समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा और अब मुझे इस बात का भरोसा है कि देश में वह स्थिति आ गई है। इसलिए समान नागरिक संहिता के कार्यान्वयन में कोई भी देरी हमारे मूल्यों के लिए हानिकारक होगी।''

उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा कि यूसीसी भारत के राष्ट्रवाद को और भी अधिक प्रभावी ढंग से बांधेगा। यूसीसी संविधान के संस्थापकों की विचार प्रक्रिया थी। हमें इस पर विचार करना चाहिए कि जब आज के वक्त में हम आजादी के अमृत काल में हैं तो निदेशक सिद्धांतों के कार्यान्वयन में बाधा डालने या देरी करने का कोई औचित्य नहीं समझ में आता है।

इसके साथ ही उपराष्ट्रपति ने कहा कि अब भ्रष्टाचार के प्रति सभी को शून्य-सहिष्णुता का दृष्टिकोण अपनाना होगा और युवाओं को इस मामले पर चुप नहीं रहना होगा। उन्होंने कहा, “भ्रष्टाचार मुक्त समाज आपके विकास पथ की सबसे सुरक्षित गारंटी है। इसलिए मैं यहां उपस्थित प्रत्येक व्यक्ति से, विशेष रूप से मेरे युवा मित्रों से आग्रह करूंगा कि आपके पास समझने की क्षमता है, और आपके पास यह पता लगाने की क्षमता है कि क्या सही है और क्या गलत है। कृपया भ्रष्टाचार पर चुप्पी न साधें। आपकी चुप्पी देश के लिए बहुत महंगी पड़ सकती है।''

टॅग्स :समान नागरिक संहिता (यूनिफॉर्म सिविल कोड)भारत के उपराष्ट्रपतिजगदीप धनखड़असमIIT
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