शहर में तेंदुआ, 650 करोड़ रुपए खर्च कर यूपी में नसबंदी कर तेंदुओं की बढ़ती संख्या को रोकेंगे?, बिजनौर में 35 लोगों की जान, 50 से ज्यादा घायल?
By राजेंद्र कुमार | Updated: January 3, 2026 18:11 IST2026-01-03T18:10:31+5:302026-01-03T18:11:31+5:30
करीब 650 करोड़ रुपए के इस प्रस्ताव के प्रथम चरण में बिजनौर जिले में तेंदुओं की नसबंदी कर तेंदुओं की संख्या को बढ़ने से रोका जाएगा.

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लखनऊः उत्तर प्रदेश में इंसानी बस्तियों में भेड़िए और तेंदुओं के आने की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं. जिसके चलते भेड़ियों और तेंदुओं के हमलों से हर साल जनहानि ही क्षति हो रही है. यूपी के बहराइच जिले में भेड़ियों के कई लोगों पर हमला कर उन्हे अपना शिकार बनाया है.इसी तरफ सूबे के बिजनौर जिले में वर्ष 2023 से सितंबर 2025 तक तेंदुओं के हमलों की 90 घटनाएं हुई. इनमें 35 लोगों की जान गई और 50 से अधिक लोग घायल हुए. ऐसे में अब प्रदेश के वन विभाग ने तेंदुओं की नसबंदी करने का एक प्रस्ताव सरकार को भेजा हैं.
करीब 650 करोड़ रुपए के इस प्रस्ताव के प्रथम चरण में बिजनौर जिले में तेंदुओं की नसबंदी कर तेंदुओं की संख्या को बढ़ने से रोका जाएगा. इसके अलावा इस प्रस्ताव के तहत बाघ और तेंदुओं के लिए संवेदनशील माने गए गांवों में सीसीटीवी, हैलोजन लाइट लगाई जाएगी और इन वन्यजीवों से लोगों को बचाने के प्रबंध किए जाएंगे.
तेंदुओं से हमले के प्रभावित बिजनौर जिला
तेंदुओं की नसबंदी करने के इस प्रस्ताव का प्रेजेंटेशन वन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण सक्सेना से समक्ष हो चुका है. इसी के बाद इस प्रस्ताव को सरकार को भेजने पर सहमति बनी. अब इस बारे में यूपी के प्रधान मुख्य वन संरक्षक सुनील चौधरी का कहना है कि सरकार की अनुमति मिलने के बाद इस प्रस्ताव पर अमल किया जाएगा.
आखिर तेंदुओं की नसबंदी करने की योजना बनाने की जरूरत क्यों महसूस की गई? इस सवाल के उत्तर में वन विभाग के उच्चाधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में तेंदुओं की संख्या में लगातार इजाफा होने के कारण आए दिन लोगों के साथ तेंदुओं के संघर्ष ही घटनाएं बढ़ रही थी. ऐसी घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने राज्य में तेंदुओं द्वारा लोगों पर किए गए हमलों का ब्यौरा जुटाया.
इस ब्यौरे के अनुसार, राज्य में तेंदुओं के हमले से सबसे अधिक मौतें बिजनौर जिले में हुई. वर्ष 2023 से सितंबर 2025 तक इस जिले में तेंदुओं के हमले की कुल 90 घटनाएं हुई. इनमें 35 लोगों की मौत हुई और 55 लोग घायल हुए. इन जिले में तेंदुओं के हमले के लिहाज से 444 गांवों को संवेदनशील मानते हुए जिले के नजीबाबाद, नगीना और चांदपुर रेंज को हॉटस्पॉट कहा गया.
इसलिए तैयार हुआ नसबंदी का प्रस्ताव
इस जिले में आखिर तेंदुओं के हमले की घटनाएं सबसे अधिक क्यों हुई? इस बारे में कराए गए एक अध्ययन में यह पाया गया कि इस जिले में गन्ने के खेत तेंदुओं के छिपाने और शिकार करने करने के लिए सबसे मुफीद स्थल बन गए हैं.उत्तराखंड के राजाजी और कार्बेट नेशनल पार्क में बाघों और तेंदुओं की संख्या बढ़ रही है. बिजनौर जिले में 40 से अधिक तेंदुए हैं.
जबकि यूपी में वर्ष 2022 को हुई गणना के अनुसार, यूपी में 371 तेंदुआ और 222 बाघ पाए गए थे. वनाधिकारियों का कहना है कि राज्य में चल रहे टाइगर (बाघ) प्रोजेक्ट के चलते बाघ और तेंदुओं की संख्या हर साल 15 प्रतिशत के हिसाब से बढ़ रही है. इस तरह से अगले पांच वर्षों में तेंदुओं की संख्या 600 से अधिक हो जाएगी.
ऐसे में तेंदुओं के लोगों पर हमला करने की घटनाओं में इजाफा होगा. इसलिए तेंदुओं की संख्या को सीमित करने के लिए उनकी नसबंदी करने का प्रस्ताव तैयार किया गया. राज्य में लेप्रोस्कोपी विधि से तेंदुओं की नसबंदी करने पर सहमति बनी है. अधिकारियों का कहना है कि इससे तेंदुओं का कोई नुकसान नहीं होगा. यह कहा जा रहा है कि तेंदुओं को पकड़ने के बाद उनका मेडिकल टेस्ट होगा. फिर उनकी लेप्रोस्कोपी विधि से नसबंदी की जाएगी. इसके बाद कुछ दिन उन्हे निगरानी में रखने के बाद उन्हे जंगल में छोड़ दिया जाएगा.
अभी लोगों पर हमला करने वाले तेंदुओं को पकड़ कर कुछ दिन चिड़ियाघर में रखकर जंगल में छोड़ दिया जाता है. चूंकि राज्य के सभी चिड़ियाघरों में पकड़े गए तेंदुओं को रखने की जगह अब नहीं बची है,इस कारण से भी उनकी नसबंदी करने का प्रस्ताव तैयार किया गया है.
यह कदम उठाकर गांवों में तेंदुओं से हो रहा बचाव
- घरों में बकरी के बाड़े पर गेट लकड़ी के गेट लगाए जा रहे.
- रात लाठी और टार्च लेकर ही घर के बाहर निकलने रहे ग्रामीण
- गांवों के हर घर और झोपड़ी में में लकड़ी का गेट लगा रहे लोग.
- गांवों में घर-घर में कुत्ते पाल रहे लोग क्योंकि वह तेंदुओं के आने पर भौंकने लगते है.
यूपी में वर्ष 2022 की गणना के अनुसार
बाघों की संख्या : 222
तेंदुओं की संख्या : 371