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कश्मीर में आज भी यह सबसे बड़ा सवाल है, क्या सच में खत्म हो चुका है ‘दरबार मूव’

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: October 26, 2022 14:45 IST

जम्मू कश्मीर में अभी भी दो राजधानियां कायम हैं, भले ही दो साल पहले सूबे में दो संविधान और दो निशान समाप्त हो चुका हो।

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ठळक मुद्देजम्मू-कश्मीर की 'दरबार मूव' की परंपरा को आधिकरिक तौर पर पिछले साल 'बंद' कर दिया गया थाउसके बाद भी सांकेतिक तौर पर अब भी 'दरबार मूव' की परंपरा जारी है, जिस पर सवाल उठ रहे हैंजम्मू कश्मीर में 'दरबार मूव' की शुरूआत महाराजा रणवीर सिंह ने साल 1872 में शुरू की थी

जम्मू: जिस डेढ़ सौ साल पुरानी 'दरबार मूव' की परंपरा को समाप्त किए जाने की घोषणा दो साल पहले हो चुकी थी। उसके सांकेतिक तौर पर अभी भी जारी रहने के कारण उस पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। दरअसल जम्मू कश्मीर में अभी भी दो राजधानियां कायम हैं, भले ही दो साल पहले सूबे में दो संविधान और दो निशान समाप्त हो चुके हों।

इस 'दरबार मूव' की परंपरा को आधिकरिक तौर पर पिछले साल से 'बंद' किया जा चुका है, उसके प्रति सच्चाई यह है कि यह गैर सरकारी तौर पर लगभग 500 कर्मियों के साथ फिलहाल जारी है। ये सरकारी कर्मचारी उपराज्यपाल, मुख्य सचिव और वित्त विभाग के वित्त आयुक्त, सामान्य प्रशासनिक विभाग के आयुक्त सचिव तथा पुलिस महानिदेशक के कार्यालयों में तैनात हैं, जो दोनों राजधानियों में आ-जा रहे हैं।

दरअसल इस प्रक्रिया को सरकारी तौर पर दरबार मूव का नाम नहीं दिया जा रहा है बल्कि कहा जा रहा है कि कामकाज को सुचारू रूप से चलाने के लिए सरकार जम्मू व श्रीनगर के नागरिक सचिवालय में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर भिजवा सकती है। यह संख्या कोई भी हो सकती है।

दरबार मूव की नई व्यवस्था के तहत प्रदेश की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में उप राज्यपाल का दरबार अगले महीने बंद हो जाएगा। हालांकि दरबार मूव के साथ जरूरत के आधार पर कर्मचारियों के अलावा उप राज्यपाल मनोज सिन्हा, पुलिस महानिदेशक, मुख्य सचिव व प्रशासनिक सचिव नवंबर महीने से जम्मू से कामकाज संभालेंगे।

जम्मू में उप राज्यपाल मनोज सिन्हा का दरबार सजने में कुछ ही समय शेष रहने पर नागरिक सचिवालय से लेकर राजभवन में साज सज्जा व मरम्मत कार्य शुरू हो चुका है। उल्लेखनीय है कि उप राज्यपाल मनोज सिन्हा के जम्मू से कामकाज की कमान संभालने के बाद नवंबर महीने से जम्मू में प्रशासनिक सक्रियता भी बढ़ जाएगी।

क्या था दरबार मूव

जम्मू कश्मीर में दरबार मूव की शुरूआत महाराजा रणवीर सिंह ने 1872 में बेहतर शासन के लिए की थी। कश्मीर, जम्मू से करीब 300 किमी दूरी पर था, ऐसे में डोगरा शासक ने यह व्यवस्था बनाई कि दरबार गर्मियों में कश्मीर व सर्दियों में जम्मू में रहेगा। 19वीं शताब्दी में दरबार को 300 किमी दूर ले जाना एक जटिल प्रक्रिया थी व यातायात के कम साधन होने के कारण इसमें काफी समय लगता था।

जम्मू में अमूमन हर साल अप्रैल महीने में गर्मी दस्तक देती थी और उसके साथ ही महाराजा का काफिला श्रीनगर के लिए निकल पड़ता था। महाराजा का दरबार अक्तूबर महीने तक कश्मीर में ही रहता था। जम्मू से कश्मीर की दूरी को देखते हुए डोगरा शासकों ने शासन को ही कश्मीर तक ले जाने की व्यवस्था को वर्ष 1947 तक बदस्तूर जारी रखा।

जब 26 अक्तूबर 1947 को राज्य का देश के साथ विलय हुआ तो राज्य सरकार ने कई पुरानी व्यवस्थाएं बदल ले लेकिन दरबार मूव जारी रखा।  राज्य में 150 साल पुरानी यह व्यवस्था आज भी जारी है। दरबार को अपने आधार क्षेत्र में ले जाना कश्मीर केंद्रित सरकारों को सूट करता था, इस लिए इस व्यवस्था में कोई बदलाव नही लाया गया था।

टॅग्स :जम्मू कश्मीरJammuमनोज सिन्हा
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