ठाणे महानगरपालिका चुनाव: भाजपा के 20 और शिवसेना के 12 उम्मीदवार निर्विरोध जीते?, कांग्रेस, शरद पवार, उद्धव और राज ठाकरे ने कहा-धांधली, देखिए 68 सीटों की सूची, जीते निर्विरोध
By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: January 4, 2026 20:04 IST2026-01-04T20:01:39+5:302026-01-04T20:04:18+5:30
Thane Municipal Corporation Elections: ठाणे व भिवंडी में दोनों सत्तारूढ़ दलों में से प्रत्येक के छह-छह उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है।

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Thane:महाराष्ट्र के ठाणे जिले में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और शिवसेना के 32 उम्मीदवारों के निर्विरोध विजयी घोषित किए जाने के बाद विपक्षी शिवसेना (उबाठा) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) ने महानगरपालिका चुनाव में धांधली और राज्य मशीनरी एवं पुलिस के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। विपक्षी दलों ने ‘नोटा’ विकल्प और कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है। राज्यभर में नगर निकाय चुनाव में निर्विरोध विजयी घोषित किए गए 68 उम्मीदवारों में से 47 प्रतिशत (32 उम्मीदवार) उम्मीदवार अकेले ठाणे जिले से हैं। भाजपा 20 उम्मीदवारों के साथ इस सूची में सबसे आगे है।
उसके बाद एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना 12 निर्विरोध उम्मीदवारों के साथ दूसरे स्थान पर है। कल्याण में भाजपा के 14 और शिवसेना के छह उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए हैं जबकि ठाणे व भिवंडी में दोनों सत्तारूढ़ दलों में से प्रत्येक के छह-छह उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है।
शिवसेना (उबाठा) नेता राजन विचारे और मनसे की ठाणे-पालघर इकाई के प्रमुख अविनाश जाधव ने रविवार को एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में सरकारी तंत्र और पुलिस पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सहयोगियों के लिए ‘निर्विरोध’ चुनावी जीत की साजिश रचने का आरोप लगाया। जाधव ने एक वीडियो क्लिप साझा करते हुए दावा किया कि इसमें नामांकन वापस लेने के दिन शिवसेना (उबाठा) उम्मीदवार विक्रांत घाग को ठाणे शहर के नितिन कंपनी इलाके में शिंदे के ‘शुभदीप’ बंगले तक एक पुलिस अधिकारी के साथ जाते हुए दिखाया गया है।
जाधव ने आरोप लगाते हुए कहा, ‘‘इस उम्मीदवार को ठाकरे की ओर से टिकट मिला था। उन्हें वहां क्यों ले जाया जा रहा था? यह चुनाव पैसे और पुलिस के दबाव में हो रहा है।’’ उन्होंने दावा किया कि वह उम्मीदवार तब से लापता है। पूर्व सांसद विचारे ने आरोप लगाया कि राज्य भर में निर्विरोध चुने गए 68 उम्मीदवारों में से अधिकतर ने धोखाधड़ी से यह जीत हासिल की है।
उन्होंने दावा किया कि शिंदे के सहयोगियों को चुनाव जिताने का लगभग आधा काम चुनाव अधिकारियों ने किया, जिन्होंने महाराष्ट्र भर में 336 आवेदनों को खारिज कर दिया। विचारे ने दो चुनाव अधिकारियों के खिलाफ विशेष रूप से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि अगर इन अधिकारियों को 48 घंटे के भीतर नहीं बदला गया, तो मनसे ‘अपनी शैली’ में चुनाव कार्यालय को निशाना बनाएगी।
दोनों नेताओं ने उन उम्मीदवारों को चेतावनी दी जिन्होंने पार्टी टिकट स्वीकार कर लिया लेकिन बिना सूचना दिए अपना नाम वापस ले लिया। उन्होंने कहा, ‘‘गद्दारों को कोई क्षमा नहीं करेगा... चुनाव समाप्त होते ही हम विश्वासघात करने वालों की ‘खिदमत’ करेंगे।’’ इससे पहले शिवसेना (उबाठा) की ठाणे इकाई के प्रमुख केदार दिघे ने रविवार को चुनाव परिणामों की वैधता पर सवाल उठाते हुए इसे राज्य के निकाय चुनाव के इतिहास में अभूतपूर्व घटना बताया। दिघे ने कहा, ‘‘सत्तारूढ़ दल के उम्मीदवार ही निर्विरोध कैसे जीत सकते हैं?
अगर यह अवधारणा वैध है तो विपक्षी उम्मीदवारों को भी सूची में शामिल किया जाना चाहिए था।’’ उन्होंने तर्क दिया कि एक ही उम्मीदवार होने पर भी मतदाताओं को ‘उपरोक्त में से कोई नहीं’ (नोटा) का विकल्प उपलब्ध कराया जाना चाहिए। दिघे ने कहा, ‘‘नागरिकों को उनके मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।’’
मनसे ने शनिवार को संकेत दिया कि वह उम्मीदवारों को ‘‘निर्विरोध’’ विजयी घोषित किए जाने के फैसले को अदालत में चुनौती दे सकती है। इस बीच, ठाणे महानगरपालिका (टीएमसी) ने शनिवार को एक विज्ञप्ति जारी कर स्पष्ट किया कि छह उम्मीदवार अपने-अपने वार्ड में अकेले उम्मीदवार थे फिर भी उनके नाम अंतिम निर्णय के लिए राज्य निर्वाचन आयोग (एसईसी) को भेजे गए हैं। नवी मुंबई महानगरपालिका (एनएमएमसी) चुनाव में भाजपा और शिवसेना एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं और वहां किसी भी उम्मीदवार को निर्विरोध निर्वाचित घोषित नहीं किया गया है।