Shah Faesal, former civil servant and chief of Jammu & Kashmir People's Movement (JKPM), booked under Public Safety Act | पूर्व आईएएस शाह फैसल पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने लिया एक्शन, PSA के तहत हुआ मुकदमा
शाह फैसल जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) के चीफ हैं। 

Highlightsशाह फैसल पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने एक्शन लिया है जम्मू कश्मीर प्रशासन ने शाह फैसल पर PSA लगाया

पूर्व आईएएस शाह फैसल पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने पब्लिक सिक्योरिटी एक्ट (PSA) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। बता दें कि आईएएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आने वाले शाह फैसल जम्मू एंड कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट (JKPM) के चीफ हैं। 

पिछले साल 14 अगस्त को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद शाह फैसल को सीआरपीसी की धारा 107 के तहत गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन्हें एमएलए हॉस्टल में रखा गया था। अभी ये तय नहीं है कि शाह फैसल को उनके घर में शिफ्ट किया जाएगा अथवा एमएलए हॉस्टल में ही रखा जाएगा।

बता दें कि शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला को जम्मू-कश्मीर जन सुरक्षा कानून के तहत हिरासत में लिए जाने मामले पर सुनवाई की। सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से जवाब मांगा।

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी किया और मामले में दो मार्च तक जवाब देने के लिए कहा है। इससे पहले  पायलट की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पीठ से मामले को शुक्रवार के लिए सूचीबद्ध करने की अपील की थी। पीठ ने अनुरोध पर सहमति जताई थी और मामले में सुनवाई के लिए 14 फरवरी की तारीख तय की ती। 

उमर अब्दुल्ला की याचिका में कहा है कि ऐसा व्यक्ति जो पहले ही छह महीने से नजरबंद हो, उसे नजरबंद करने के लिए कोई नयी सामग्री नहीं हो सकती। इसमें कहा गया है, ‘‘यह विरला मामला है कि वे लोग जिन्होंने सांसद, मुख्यमंत्री और केन्द्र में मंत्री के रूप में देश की सेवा की और राष्ट्र की आकांक्षाओं के साथ खड़े रहे, उन्हें अब राज्य के लिए खतरा माना जा रहा है।’’ 

उमर अब्दुल्ला को इस कानून के तहत नजरबंद किए जाने के कारणों में दावा किया गया है कि राज्य के पुनर्गठन की पूर्व संध्या पर उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधानों और अनुच्छेद 35-ए को खत्म करने के फैसले के खिलाफ आम जनता को भड़काने का प्रयास किया। इस आदेश में एक अन्य वजह में इस फैसले के खिलाफ जनता को उकसाने के लिए सोशल नेटवर्क पर उनकी टिप्पणियों को भी शामिल किया गया है। 

उमर अब्दुल्ला 2000 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री थे। उन्हें इस नजरबंदी के संबंध में तीन पन्नों का आदेश दिया गया है जिसमें उनके दिए गए कथित बयान हैं जिन्हें विघटनकारी स्वरूप का माना गया है। इस आदेश में यह भी दावा किया गया है कि अनुच्छेद 370 और 35-ए के फैसले के खिलाफ सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर उनकी टिप्पणियों में सार्वजनिक व्यवस्था में गड़बड़ी पैदा करने की क्षमता है। 

राज्य में पांच अगस्त, 2019 से ही संचार संपर्क पर प्रतिबंध लगा दिया गया था। बाद में इसमें ढील दी गयी। कुछ स्थानों पर अब इंटरनेट सेवा काम कर रही है। मोबाइल इंटरनेट सुविधा भी अब शुरू हो गई है, लेकिन इसकी गति 2जी की है और शर्त यह है कि सोशल मीडिया साइट्स के लिए इसका इस्तेमाल नहीं होगा।

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