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बिहार में बंगले को लेकर गरमायी सियासत, राजद ने सांसद संजय झा, देवेशचंद्र ठाकुर और केन्द्रीय मंत्री जीतन राम मांझी के बंगले पर उठाया सवाल, लिखा विभाग क पत्र

By एस पी सिन्हा | Updated: December 30, 2025 17:43 IST

राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवल किशोर यादव ने भवन निर्माण विभाग को लिखे पत्र में कहा है कि उपर्युक्त विषय के आलोक में ध्यान आकृष्ट करते हुए सूचित करना है कि देवेश चन्द्र ठाकुर, सदस्य लोकसभा, सीतामढ़ी एवं राज्यसभा सांसद संजय झा जी का आवास दिल्ली में आवंटित है।

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पटना: बिहार में भवन निर्माण विभाग के द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधान परिषद में नेता विरोधी दल राबड़ी देवी को 10 सर्कूलर रोड का सरकारी बंगला खाली करने का आदेश जारी किए जाने किए जाने के बाद सियासत गरमा गई है। एनडीए में शामिल दल राजद पर कई तरह से आरोप लगा रहे हैं। इसके बाद अब राजद ने जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद संजय झा और जदयू सांसद देवेश चन्द्र ठाकुर पर सरकारी बंगला पर जबरन कब्जा जमाने का आरोप लगाया है। राजद ने पूछा है कि दोनों सांसदों को जब दिल्ली में आवास आवंटित किया गया है तो आखिर उन्होंने बिहार के सरकारी बंगला पर कब्जा क्यों जमा रखा है? 

राजद के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवल किशोर यादव ने भवन निर्माण विभाग को लिखे पत्र में कहा है कि उपर्युक्त विषय के आलोक में ध्यान आकृष्ट करते हुए सूचित करना है कि देवेश चन्द्र ठाकुर, सदस्य लोकसभा, सीतामढ़ी एवं राज्यसभा सांसद संजय झा जी का आवास दिल्ली में आवंटित है। आप स्वयं जानते हैं कि मंत्री एवं सभापति रहने के कारण बिहार सेंट्रल पुल का आवास आवंटित हुआ था, तब से लेकर अभी तक देवेश चन्द्र ठाकुर एवं संजय झा, उस आवास पर काबिज हैं। भवन निर्माण विभाग को इस सन्दर्भ में अद्यतन स्थिति स्पष्ट नहीं किया है। आवास खाली नहीं कराया जाना और रसूख का इस्तेमाल कर बंगलो पर काबिज रहना किस नियम के अन्तर्गत आता है? क्या इस बंगले का दस गुणा अधिक भुगतान कर रहे हैं, या रसूख के बल पर? इस बंगले से दोनों सदस्यों का मोह का कारण क्या है? क्या बंगले के अन्दर तहखाना तो नहीं है, जिसको बचाए और खपाए जाने के कारण अभी तक बंगला में काबिज हैं? 

वहीं, जीतन राम मांझी, केन्द्रीय मंत्री, भारत सरकार किस हैसियत से पटना सेंट्रल पुल के बंगला में रह रहे हैं? क्या उनके पुतोह को यह बंगला आवंटित किया जा सकता है? क्या वरियता इसकी इजाजत देती है? पत्र में एक चौंकाने वाला आरोप लगाते हुए पूछा गया है कि "क्या बंगले के अंदर तहखाना तो नहीं है, जिसको बचाए और खपाए जाने के कारण अभी तक बंगला में काबिज हैं?" अतः अनुरोध है कि इस सन्दर्भ में वस्तुस्थिति स्पष्ट करना चाहेंगे तथा कब तक आवास खाली होगा इसकी तिथि बताना चाहेंगे और अभी तक रह रहे हैं उनसे कितना गुणा अधिक वसूली की गई है, वर्णित होना चाहिए? मुझे उम्मीद है कि पत्र को गंभीरता से लेंगे?” 

उन्होंने पूछा है कि आखिर किस नियम के तहत ये नेता अभी तक इन बंगलों में रह रहे हैं? प्रो. नवल किशोर यादव ने विभाग से अनुरोध किया है कि इस संदर्भ में वस्तुस्थिति स्पष्ट की जाए। उन्होंने उम्मीद जताई है कि पत्र को गंभीरता से लेते हुए सरकार बंगलों के अवैध कब्जे को समाप्त कराएगी। यह पत्र 30 दिसंबर 2025 की तारीख में जारी किया गया है, जिसने नए साल से पहले बिहार में एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है।

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