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शीतकालीन सत्र के पहले दिन 60 ट्रैक्टर के साथ संसद कूच करेंगे किसान, आज मनाया जा रहा 'संघर्ष दिवस'

By अनिल शर्मा | Updated: November 24, 2021 09:14 IST

शीतकालीन सत्र के पहले दिन किसान 60 ट्रैक्टर के साथ संसद कूच करेंगे। किसानों ने सरकार से साफतौर पर कह दिया है कि जब तक उनकी अन्य मांगें मान नहीं ली जाती, तब तक वे आंदोलन को खत्म नहीं करेंगे

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ठळक मुद्देसंयुक्त किसान मोर्चा किसान नेता सर छोटू राम की जयंती के उपलक्ष्य में आज संघर्ष दिवस मना रहा हैकिसानों ने हैदराबाद में 25 नवंबर को 'महा धरना' का ऐलान किया है शीतकालीन सत्र के पहले दिन किसान 60 ट्रैक्टर के साथ संसद कूच करेंगे

नयी दिल्ली। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम)  किसान नेता सर छोटू राम की जयंती के उपलक्ष्य में आज संघर्ष दिवस मना रहा है। तीन कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत एसकेएम ने एक बयान में कहा कि दिल्ली की सीमाओं पर जारी किसानों के विरोध-प्रदर्शन को एक साल पूरा होने के मौके पर उसके कई नेता हैदराबाद में 25 नवंबर को होने वाले 'महा धरना' में शामिल होंगे। एसकेएम द्वारा मंगलवार को जारी बयान में कहा गया कि किसान आंदोलन के समर्थन में शुक्रवार को प्रवासी भारतीयों द्वारा ब्रिटेन, अमेरिका, फ्रांस, आस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, कनाडा और नीदरलैंड में भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 

वहीं शीतकालीन सत्र के पहले दिन किसान 60 ट्रैक्टर के साथ संसद कूच करेंगे। किसानों ने सरकार से साफतौर पर कह दिया है कि जब तक उनकी अन्य मांगें मान नहीं ली जाती, तब तक वे आंदोलन को खत्म नहीं करेंगे। इसस बाबत किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि 60 ट्रैक्टरों के साथ दिल्ली में मार्च निकालकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की वैधानिक गारंटी के लिए दबाव डालेंगे। टिकैत ने कहा कि 29 नवंबर को ट्रैक्टर मार्च निकाल संसद जाएंगे। गौरतलब है कि संसद का शीतकालीन सत्र 29 नवंबर से शुरू हो रहा है जिसके 23 दिसंबर तक चलने की उम्मीद है।

किसान नेता ने कहा कि वह खाली रास्ते से संसद जाएंगे। सिर्फ 60 ट्रैक्टर जाएंगे। उन्होंने कहा कि पिछली बार हम पर सड़कों को ब्लॉक करने का आरोप लगा था। लेकिन ये हमने नहीं किया था। सड़कों को ब्लॉक करना हमारा आंदोलन नहीं है।  

बीते 19 नवंबर को प्रधानमंत्री मोदी ने तीनों कृषि कानून वापस लेने का ऐलान किया था। पीएम ने एमएसपी सहित दूसरे मुद्दों पर एक कमेटी बनाने का आश्वासन भी दिया था। हालांकि भारतीय किसान यूनियन के नेता राकेश टिकैत ने साफ कह दिया था कि जब तक तीनों कानून को संसद में रद्द नहीं किया जाता, आंदोलन ऐसे ही चलता रहेगा। टिकैत का कहना है कि सिर्फ एक मुद्दा कम हुआ और बाकी सभी मुद्दे बचे हैं। साथ ही उन्होंने पेनाल्टी सिस्टम का जिक्र कर कहा कि 750 किसान शहीद हुए उनकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

टॅग्स :राकेश टिकैतकिसान आंदोलनKisan MorchaParliament House
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