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राजस्थान चुनावः बुलेट ट्रेन के लिए कमी नहीं, लेकिन यहां की रेल के लिए खजाना खाली?

By प्रदीप द्विवेदी | Updated: November 5, 2018 07:23 IST

पिछली बार अशोक गहलोत की प्रादेशिक सरकार ने केन्द्र के साथ समझौता करके रतलाम-बांसवाड़ा-डूंगरपुर-अहमदाबाद रेल का सपना साकार करने की दिशा में कदम उठाए, किन्तु इस बार वसुंधरा राजे सरकार ने आते ही वागड़ की रेल को ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया।

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वागड़ की रेल इस बार भाजपा का खेल बिगाड़ सकती है। वागड़ में दो जिले आते हैं- बांसवाड़ा और डूंगरपुर। राजस्थान में बांसवाड़ा एकमात्र ऐसा जिला है जिसकी एक इंच जमीन पर से भी रेल नहीं गुजरती है। आजादी के बाद लंबे समय तक यहां रेल की मांग की जाती रही, परन्तु बीसवीं सदी गुजर गई, यहां रेल नहीं आई।

पिछली बार अशोक गहलोत की प्रादेशिक सरकार ने केन्द्र के साथ समझौता करके रतलाम-बांसवाड़ा-डूंगरपुर-अहमदाबाद रेल का सपना साकार करने की दिशा में कदम उठाए, किन्तु इस बार वसुंधरा राजे सरकार ने आते ही वागड़ की रेल को ठंडे बस्ते के हवाले कर दिया। कारण न तो केन्द्र सरकार और न ही प्रादेशिक सरकार इस रेल लाइन के लिए आवश्यक पैसा देने को तैयार थीं। 

इस मुद्दे को लेकर स्थानीय भाजपा नेताओं ने भी प्रयास किए, किन्तु कोई नतीजा नहीं निकला। जनता इस बात से नाराज है कि केन्द्र के पास बुलेट ट्रेन के लिए तो पैसा है, लेकिन वागड़ की रेल के लिए सरकारी खजाना खाली है। 

राजस्थान सरकार के पूर्व केबीनेट मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता महेन्द्रजीत सिंह मालवीया का कहना हैं कि- पीएम नरेन्द्र मोदी और भाजपा को केन्द्र एवं राज्य में सरकार बनाने के लिये वागड़ के लोगों से वोट तो चाहिएं परन्तु सरकार में आने के बाद उनकी प्राथमिकता में  वागड़ के विकास की योजनाओं के लिये धन नहीं होता है? 

उनका कहना है कि बांसवाड़ा जिले को रेल से जोड़ने की योजना को पूर्व की कांग्रेस सरकार ने प्रारम्भ करके इसे गति दी, परन्तु केन्द्र में भाजपा की सरकार आने के बाद काम ठप हो गया। 

उनका कहना है कि- पीएम मोदी अपने मित्र उद्योगपतियों की सुविधाओं को बढ़ाने के लिये बुलेट ट्रेन की योजना तो ले आए, किन्तु बांसवाड़ा को रेल से जोड़ने के लिये उनके मंत्रालय ने जरूरी धनराशि नहीं दीं और वागड़ की रेल का काम बंद हो गया। 

वागड़ की रेल एमपी-राजस्थान-गुजरात के करीब आधा दर्जन लोकसभा क्षेत्रों और एक दर्जन विधानसभा क्षेत्रों के नतीजों को प्रभावित कर सकती है। अकेले वागड़ में ही नौ विधानसभा क्षेत्र हैं जिनमें से पहली बार भाजपा ने आठ में जीत हांसिल की थी। सवाल यह है कि- भाजपा अपनी विजय यात्रा इस बार भी जारी रख पाएगी या वागड़ की रेल उसे सियासी पटरी से उतार देगी?

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