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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'वीर बाल दिवस' पर श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के पुत्रों को नमन किया

By आशीष कुमार पाण्डेय | Updated: December 26, 2023 12:53 IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज मंगलवार के दिन भारत मंडपम पहुंचे, वहां उन्होंने 'वीर बाल दिवस' के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

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ठळक मुद्देप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज 'वीर बाल दिवस' के उपलक्ष्य पर भारत मंडपम पहुंचेपीएम मोदी दिन में 'वीर बाल दिवस' के मौके पर युवा मार्च को हरी झंडी भी दिखाएंगेमोदी सरकार गुरु गोविंद सिंह के पुत्रों के बलिदान को याद करते हुए 'वीर बाल दिवस' मनाती है

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते सोमवार को क्रिसमस दिवस पर अपने आवास पर ईसाई समुदाय से मुलाकात करने के बाद आज मंगलवार के दिन भारत मंडपम पहुंचे और वहां उन्होंने 'वीर बाल दिवस' के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

इस कार्यक्रम के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिन में 'वीर बाल दिवस' के मौके पर एक युवा मार्च को हरी झंडी भी दिखाएंगे। मोदी सरकार हर साल 26 दिसंबर को सिख धर्म के दसवें और अंतिम गुरु, गुरु गोविंद सिंह के पुत्रों के अनुकरणीय बलिदान को याद करते हुए 'वीर बाल दिवस' मनाती है।

इस दिन विशेषकर गुरु गोविंद सिंह के छोटे बच्चों को साहिबजादों (दो युवा खालसा, जिनका इस दिन स्मरण किया जाता है) के साहस को समर्पित करते हुए पूरे देश में विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

जानकारी के मुताबिक साहिबजादों की जीवन कहानी और बलिदान का विवरण देने वाली एक डिजिटल प्रदर्शनी देश भर के स्कूलों और बाल देखभाल संस्थानों में प्रदर्शित की जाएगी। इसके अलावा 'वीर बाल दिवस' पर एक फिल्म भी देशभर में प्रदर्शित की जाएगी।

वहीं MyIndia और MyGovt पोर्टल पर 'वीर बाल दिवस' के संबंध में इंटरैक्टिव क्विज शो सहित अन्य ऑनलाइन प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी।

मालूम हो कि 9 जनवरी 2022 को श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के प्रकाश पर्व के दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि उनके पुत्रों साहिबजादों बाबा जोरावर सिंह और बाबा फतेह सिंह जी की शहादत को चिह्नित करने के लिए 26 दिसंबर को हर साल 'वीर बाल दिवस' के रूप में मनाया जाएगा।

यह दिन महान क्रांतिकारी उधम सिंह की जयंती भी है, जिन्होंने 1919 में बैसाखी के दिन जनरल ओ'डायर की हत्या करके अमृतसर के जलियांवाला बाग नरसंहार का बदला लिया था। जिन्होंने मार्च 1940 में अपनी सेना को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने का आदेश दिया था। शहीद उधम सिंह को बाद में अंग्रेजों ने लंदन में फांसी दी थी।

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