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उल्फा(आई) के एकतरफा संघर्ष विराम की घोषणा के बाद तत्काल अभियान पर रोक नहीं : सरमा

By भाषा | Updated: May 18, 2021 21:00 IST

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टीटाबार (असम), 18 मई असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने मंगलवार को कहा कि उल्फा(आई) के एकतरफा संघर्ष विराम की घोषणा के परिणाम स्वरूप सुरक्षा बलों द्वारा चलाये जा रहे अभियानों पर तत्काल रोक नहीं लगेगी । हालांकि, मुख्यमंत्री इस कदम को 'आशा की किरण' के रूप में देखते हैं ।

ओएनजीसी कर्मचारी रितुल सैकिया के घर का दौरा करने के बाद मुख्यमंत्री ने प्रतिबंधित संगठन के सरगना परेश बरूआ से बातचीत करने के लिये आगे आने और संघर्ष विराम को स्थायी कदम बनाने की अपील की ।

गौरतलब है कि युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट आफ असम (इंडिपेंडेंट) के उग्रवादी सैकिया का अपहरण कर उसे म्यामां ले गये । संगठन ने 15 मई को बयान जारी कर प्रदेश में कोविड—19 की स्थिति के मद्देनजर एकतरफा संघर्ष विराम की घोषणा की और कहा कि इस अवधि में कोई अभियान नहीं चलाया जायेगा ।

मुख्यमंत्री ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ''इस मामले में हम इतना ही कह सकते हैं कि आशा की एक किरण है । मैं इस बारे में सकारात्मकता से सोच रहा हूं । लेकिन, इस बयान के आधार पर, भविष्य में सरकार चुप्पी साध लेगी अथवा पुलिस को अभियान नहीं चलाने के लिये निर्देश देगी तो -- इस स्तर तक पहुंचने में समय लगेगा ।''

उल्फा (आई) के एकतरफा निर्णय के बारे में पूछे जाने पर सरमा ने कहा कि यह एक सकारात्मक कदम है लेकिन संगठन ने सरकार के साथ कोई चर्चा के संघर्ष विराम की घोषणा के बारे में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर दी है । उन्होंने कहा, ''सरकार अपना काम जारी रखेगी । अगर कोई हथियार के साथ घूमेगा तो ऐसा नहीं हो सकता कि हम उसे नहीं पकड़ेंगे। यदि चर्चा की मेज पर आने के बाद संघर्ष विराम की घोषणा की जाती है, तो रहने के लिए शिविर आवंटित करने जैसे कुछ आधार तैयार किए जाते ।''

उन्होंने बताया, ''मुझे उम्मीद है कि उल्फा (आई) की तरफ से चर्चा का प्रस्ताव आयेगा । हम इस संघर्ष विराम को सकारात्मक कदम के रूप में देख रहे हैं । सरकार की सीमाओं पर विचार करते हुये अगले कदम पर चर्चा होनी चाहिये । अगर ऐसा होता है तो हमारे समुदाय को राहत मिलेगी ।''

मुख्यमंत्री ने बरूआ से चर्चा की मेज पर आने की अपील की क्योंकि असम के लोग ऐसा चाहते हैं ।

सरमा ने कहा, ''असम के लोग ऐसा दृश्य दोबारा नहीं चाहते हैं । मैं तिंगराई गया था और देखा कि माता पिता अपने बच्चों को खो रहे हैं । कोई भी ऐसा दृश्य दोबारा नहीं देखना चाहता है । मुझे नहीं लगता कि वह (बरूआ) यदि असम में रह रहे होते तो स्वयं ऐसे पल देखना पसंद नहीं करते ।''

चौदह मई को संदिग्ध उल्फा आई के उग्रवादियों द्वारा तिंगराई के बाजार में किये गये ग्रेनेड धमाके में कम से कम दो लोगों की मौत हो गयी थी जबकि एक अन्य घायल हो गया था।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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