पटना:बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 14 अप्रैल को कैबिनेट की अंतिम बैठक के बाद मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे देंगे। लेकिन इन सभी बातों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सोमवार को विकास कार्यों का जायजा लेने हाजीपुर गए। उनके साथ विजय चौधरी भी मौजूद थे। इस बीच जदयू कार्यालय से ‘फिर से नीतीश’ वाले करीब 25-30 पोस्टर हटा दिए गए हैं, जो बड़े बदलाव की ओर इशारा कर रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, बिहार में 15 अप्रैल को सुबह 11 बजे नई सरकार का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित किया जाएगा। यह कार्यक्रम पटना स्थित लोकभवन में होगा, जहां नए मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद को शपथ दिलाई जाएगी। यह बदलाव सिर्फ नेतृत्व परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत हो सकता है।
ऐसे में नीतीश कुमार के लंबे कार्यकाल के बाद बनने वाली नई सरकार के सामने विकास की गति को बनाए रखने और जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने की बड़ी चुनौती होगी। दो दशक तक बिहार में मुख्यमंत्री रहने वाले नीतीश कुमार ने अपने कार्यकाल में अनगिनत बड़े फैसले लिए। इनकी खासियत रही है कि इन्होंने जितनी भी घोषणाएं की, उसे अधूरा नहीं छोड़ा। नवंबर 2025 में नई सरकार बनने के बाद भी मुख्यमंत्री ने कई बड़ी घोषणाओं को लागू किया है।
हाल के दिनों में नीतीश कुमार एक घोषणा बार-बार कर रहे थे, हर जिला मुख्यालय में जाकर ऐलान कर रहे थे, लेकिन लागू नहीं हो पाया था। अंतिम समय में बिना कैबिनेट की स्वीकृति के ही, आनन-फानन में उक्त घोषणा को लागू करने का संकल्प जारी किया गया। इसबीच बिहार की सरकार ने सरकारी डॉक्टरों के प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक का संकल्प जारी किया है। स्वास्थ्य विभाग ने 11 अप्रैल को रोक संबंधी संकल्प जारी किया है।
इतना बड़ा फैसला कैबिनेट की स्वीकृति के बिना ही लागू करने का संकल्प लिया गया। हालांकि सरकार ने कहा है कि इस संबंध में विस्तृत दिशा निर्देश बाद में जारी किए जाएगे। इस तरह के फैसले लिए जाने के पहले नीतीश कुमार कैबिनेट की बैठक करेंगे, इसके बाद पद छोड़ेंगे। पद छोड़ने से पहले इनकी कोई भी घोषणा अधूरी न रह जाए, इसकी समीक्षा की गई। वहीं, जैसे ही सरकार ने सरकारी चिकित्सकों के प्राईवेट प्रैक्टिस पर रोक का संकल्प जारी किया, विरोध शुरू हो गया है। सरकारी चिकित्सकों का संघ विरोध में उतर गया है।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन, बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ और विश्व आयुर्वेद परिषद ने इसे एकतरफा निर्णय बताया है। तीनों संगठनों ने अलग-अलग बैठकों और बयानों के माध्यम से सरकार के समक्ष अपनी आपत्तियां और सुझाव रखा है। आईएमए बिहार शाखा एवं बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ की पटना में आयोजित बैठक में इस प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में चिकित्सकों ने कहा कि निजी प्रैक्टिस को अनिवार्य रूप से बंद करने के बजाय वैकल्पिक (ऑप्शनल) रखा जाना चाहिए। उनका तर्क था कि सरकारी सेवा में आने वाले डॉक्टरों और चिकित्सा शिक्षकों पर प्रैक्टिस नहीं करने का दबाव नहीं बनाया जाना चाहिए, बल्कि उन्हें विकल्प दिया जाना चाहिए।