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ओवैसी के सीमांचल दौरे से घबराई नीतीश सरकार ने खेला रमजान कार्ड, भाजपा ने बोला हमला, कहा- हिंदुओं को रामनवमी पर मिले अवकाश

By एस पी सिन्हा | Updated: March 18, 2023 15:41 IST

अल्पसंख्यक वोटों के विखराव को कैसे रोका जाये और उसे अपने पाले में लाया जाये, इसको लेकर ही नीतीश सरकार ने रमजान पर राजनीति शुरू कर दी है। भाजपा ने बिहार सरकार के फैसले को तुष्टिकरण से जोड़ते हुए मांग रखी है कि चैत्र नवरात्र में भी श्रद्धालुओं को मुस्लिम कर्मचारियों की तरह कार्यालय आने और जाने में रियायत दी जाए।

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ठळक मुद्देबिहार सरकार ने दिया रमजान के दौरान मुस्लिम कर्मचारियों को तोहफाभाजपा ने बिहार सरकार के फैसले को तुष्टिकरण से जोड़ाभाजपा ने बोला हमला, कहा- हिंदुओं को रामनवमी पर मिले अवकाश

पटना: बिहार सरकार के द्वारा रमजान को देखते हुए अपने मुस्लिम कर्मचारियों को बड़ी राहत दिये जाने के फैसले पर राज्य में सियासत भी तेज हो गई है। भाजपा ने बिहार सरकार के फैसले को तुष्टिकरण से जोड़ते हुए मांग रखी है कि चैत्र नवरात्र में भी श्रद्धालुओं को मुस्लिम कर्मचारियों की तरह कार्यालय आने और जाने में रियायत दी जाए। ऐसे में कहा जा रहा है कि आगामी लोकसभा चुनाव 2024 और विधानसभा चुनाव 2025 के पहले बिहार में सभी दलों की सियासी गतिविधियां तेज होते देख नीतीश कुमार ने यह फैसला लिया है।

दरअसल, राज्य के सीमांचल इलाके की सीटों पर पक्ष और विपक्ष की निगाहें टिकी हुई हैं। अभी हाल ही में सीमांचल में महागठबंधन की तरफ से एक बड़ी रैली की गई थी। ऐसे में राजनीति के जानकारों का मानना है कि एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के दो दिवसीय सीमांचल अभियान से सबसे ज्यादा संकट राजद और जदयू को होने वाला है। राजद अल्पसंख्यकों को अपना पारंपरिक वोट बैंक मानती है। वहीं जदयू भी अल्पसंख्यक वोट को लेकर काफी सचेत है। अल्पसंख्यक वोटरों के बीच जदयू की पकड़ भी रही है। लेकिन, ओवैसी की राजनीति का एकमात्र आधार मुसलमानों के हक की लड़ाई है। ऐसे में राजद और जदयू के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। वहीं ओवैसी के दौरे से राजद और जदयू को अपना जमीन खिसकता दिखने लगा है। ऐसे में अल्पसंख्यक वोटों के विखराव को कैसे रोका जाये और उसे अपने पाले में लाया जाये, इसको लेकर ही नीतीश सरकार ने रमजान पर राजनीति शुरू कर दी है।

इस आदेश के अनुसार दिसंबर 2020 का आदेश स्थायी रूप से प्रतिवर्ष के रमजान महीने में लागू रहना है। अगस्त 2022 में बायोमीट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था लागू होने के बाद 2023 में रमजान महीना 22 मार्च से 21 अप्रैल तक (संभावित) के बीच रहेगा और बायोमीट्रिक प्रणाली में भी एक घंटा पहले का प्रावधान लागू करने के लिए यह आदेश जारी किया गया है। ड्यूटी के समय में किए गए इस बदलाव का फैसला केवल एक साल के लिए नहीं है, बल्कि इसे स्थाई कर दिया गया है। बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से जारी आदेश के मुताबिक इस सुविधा का लाभ सरकार के स्थाई और संविदा पर काम करने वाले सभी कर्मियों के अलावा आउटसोर्सिंग कर्मियों को भी मिलेगा। सरकार की ओर से यह दावा किया गया है कि इससे  सरकारी कामकाज पर कोई असर नहीं पड़ेगा और सबको मिलजुल कर काम करना चाहिए।

इस मामले को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डा. संजय जायसवाल ने नीतीश सरकार पर हमला बोला है। उन्होंने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि अगर यह छूट रमजान पर दी जाती है तो फिर हिंदू त्योहारों में छूट क्यों नहीं दी जाती?

भाजपा प्रदेश कार्यालय में शनिवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में डा. जायसवाल ने कहा कि अभी आने वाले दिनों में रामनवमी का त्यौहार होने वाला है। हिंदुओं को तो सुबह से ही इस पूजा की तैयारी में बैठना पड़ता है। हर हिंदू के घर में रामनवमी होती है, तो फिर हिंदुओं को भी छूट मिलनी चाहिए। उनको क्यों नहीं छूट मिलेगी। इस तरह से किसी जाति विशेष के लिए अलग से छूट देना उचित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि रमजान के महीने में बिहार के अल्पसंख्यक समाज के लोगों के लिए राज्य सरकार के द्वारा पारित आदेश का हम विरोध करते हैं। राज्य सरकार ने पहली बार इस तरह का आदेश पारित किया है। डा. जायसवाल ने कहा कि इतने दिनों में कल हम लोगों ने पहली बार एक नया तरीका देखा, जिसमें रमजान के मौके पर अल्पसंख्यक कर्मियों को एक घंटा पहले आने और जाने की छूट दी गई है। इसके बाद अब यह साफ हो गया है कि अगस्त महीने में जो यह सरकार बनी है वह पीएफआई के जुड़े हुए लोगों की सरकार है। पूरे हिंदुस्तान में और बिहार में ऐसा कभी नहीं होता था। यह अलग से नियम करना यह संकेत है कि सरकार में जो अधिकारी बैठे हैं, वह पीएफआई के एजेंट के रूप में काम कर रहे हैं। अल्पसंख्यक तुष्टिकरण करने के लिए इस तरह के सरकारी कार्यालय के आदेश निकाले गए हैं जो कि कहीं से भी ठीक नहीं है।

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