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नितिन गडकरी को क्या ये पता नहीं है कि नरेन्द्र मोदी की 2002 की छवि धुल चुकी है!

By विकास कुमार | Updated: January 28, 2019 14:36 IST

हाल ही में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नितिन गडकरी ने ही नरेन्द्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव पेश किया था. तो फिर क्या नितिन गडकरी के बयान भविष्य के राजनीतिक समीकरणों के मद्देनजर देखते हुए हैं ताकि खुद की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा किया जा सके.

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ठळक मुद्देनितिन गडकरी मोदी-शाह की जोड़ी से खफा दिख रहे हैं.भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नितिन गडकरी ने ही नरेन्द्र मोदी के फिर से प्रधानमंत्री बनने का प्रस्ताव पेश किया था.

मोदी सरकार में सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी के तेवर आज कल कुछ ज्यादा ही बगावती दिख रहे हैं. उनके एक बयान पर विवाद थमता नहीं है कि उनका दूसरा बयान सामने आ जाता है. हंगामा और फिर से वही सफाई कि मीडिया ने मेरे बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया है. लेकिन लगातार आते उनके बयान इतेफाक नहीं लगते, बल्कि एक सुनियोजित राजनीतिक हमला लगता है. लेकिन ये हमला बार-बार मोदी-शाह की जोड़ी की तरफ ही होता हुआ क्यों दिख रहा है?

ऐसे नितिन गडकरी की छवि रही है कि वो हमेशा खड़ी-खड़ी बोलते हैं. लेकिन उनका ये बिंदास अंदाज अगर बार-बार पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को निशाना साध रहा है तो ये अनायास नहीं है बल्कि एक सोची समझी पॉलिटिकल प्लानिंग लगती है. उनके बयानों की सीरीज को अगर देखा जाये तो उसमें बार-बार समानता और एक ही बात का दोहराव नजर आता है. जैसे कि नेताओं को जनता से बड़े-बड़े वादे नहीं करने चाहिए, क्योंकि अगर वादे पूरा नहीं हुए तो जनता पिटाई भी करती है. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक पिटाई से उनका मतलब हाल ही में तीन राज्यों में हुई भाजपा की हार से है.  

नितिन गडकरी के बागी बयान का लॉन्चिंग टाइम 

मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनावों में भाजपा की हार ने कांग्रेस और विपक्ष के साथ-साथ भाजपा में भी मोदी-शाह के कार्यप्रणालियों से नाराज नेताओं को एक बेहतरीन मौका उपलब्ध करवाया. पिछले 5 सालों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार केंद्र में है लेकिन जिस तरह से पार्टी और संगठन पर मोदी-शाह की जोड़ी का दबदबा बन चुका है उससे बाकी नेताओं की नाराजगी भीतर ही भीतर बढ़ रही है. नितिन गडकरी उन्हीं नेताओं में से एक हैं. लेकिन बात यही नहीं थमती. 

ऐसा कहा जा रहा है कि तीन राज्यों में हार के बाद देश में ये माहौल बनने लगा है कि नरेन्द्र मोदी के लिए इस बार स्थितियां मुश्किल होने वाली हैं. इस चर्चा को बल मिल रहा है हाल ही में आये तमाम सर्वे में जो ये दिखा रहे हैं कि बीजेपी अपने दम पर इस बार सरकार बनाती हुई नहीं दिख रही है. एनडीए भी पूर्ण बहुमत से 40-50 सीटें दूर दिख रही हैं. ऐसे में नितिन गडकरी को ये लग रहा है कि ये अपने पक्ष में माहौल बनाने के लिए ये अनुकूल समय है. 

नितिन गडकरी की दावेदारी कितनी मजबूत 

नितिन गडकरी संघ के बहुत करीबी और दुलारे माने जाते हैं. नागपुर से सांसद हैं और अपने क्षेत्र के एक चर्चित नेता भी. गडकरी को मोदी सरकार के सबसे बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले मंत्रियों में गिना जाता है. मीडिया में भी उनकी छवि एक परफार्मिंग मिनिस्टर और पारदर्शी नेता की है. बिज़नेस की अच्छी समझ और महाराष्ट्र से होने के कारण नितिन गडकरी की कॉर्पोरेट लॉबी भी बहुत मजबूत मानी जाती है. अरविन्द केजरीवाल की बीजेपी में एक मात्र नितिन गडकरी से ही अच्छी बनती है. विपक्ष में भी ऐसे तमाम नेता हैं जिनके गडकरी से अच्छे संबंध हैं. गोवा में भाजपा की कम सीटें होने के बावजूद उन्होंने भाजपा की सरकार बनवाकर उन्होंने खुद को एक बेहतरीन पॉलिटिकल मैनेजर भी साबित कर दिया है.

नरेन्द्र मोदी की 2002 की छवि विलुप्त 

नरेन्द्र मोदी भारतीय राजनीति में 2014 से पहले सबसे बड़े अछूत नेता माने जाते थे. करीब डेढ़ दशक तक बीजेपी के अलावा किसी भी पार्टी के नेता के लिए मंच साझा करना भी परेशानी का सबब बन जाता और इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार. लेकिन आज उन्हीं नीतीश कुमार ने नरेन्द्र मोदी को साम्प्रदायिकता के मोर्चे पर क्लीनचिट दे दिया है. नीतीश कुमार के मुताबिक, नरेन्द्र मोदी की छवि अब बदल चुकी है और वो अब 'सबका साथ और सबका विश्वास' के मंत्र के साथ आगे बढ़ रहे हैं.

तमिलनाडु में मोदी का साथी AIADMK

हाल ही में तमिलनाडु में एआइएडीएमके ने ये संकेत दिया है कि वो भाजपा से गठबंधन कर सकते हैं. तो क्या समय के साथ नरेन्द्र मोदी की 2002 की छवि धूल चुकी है, तमाम राजनीतिक संकेत इसी तरफ इशारा कर रहे हैं. ऐसे में अब नरेन्द्र मोदी के लिए चुनाव बाद 40 से 50 सीटें जुगाड़ना कोई मुश्किल काम नहीं है और उनके साथ अमित शाह भी तो हैं, जो तमाम राजनीतिक दांव-पेंच के लिए जाने जाते हैं.

ऐसे में नितिन गडकरी के बयान अप्रासंगिक और गैरजरूरी लगते हैं. लेकिन एक बात ये भी है कि हाल ही में भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में नितिन गडकरी ने ही नरेन्द्र मोदी को फिर से प्रधानमंत्री बनाने का प्रस्ताव पेश किया था. यह बीजेपी की मजबूत लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सबसे ज्वलंत उदाहरण है. क्या नितिन गडकरी के बयान को मीडिया ट्विस्ट कर रही है या फिर उनका बयान भविष्य के राजनीतिक समीकरणों के मद्देनजर देखते हुए दिया जा रहा है ताकि खुद की राजनीतिक महत्वाकांक्षा को पूरा किया जा सके.

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