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महाराष्ट्र: दलित छात्र ने तीन साल से जातिगत उत्पीड़न का आरोप लगाया, 15 छात्रों और दो वार्डन के खिलाफ एफआईआर दर्ज

By विशाल कुमार | Updated: January 16, 2022 09:31 IST

पुलिस ने कहा कि छात्रों और दो कॉलेज वार्डन के नाम मामले में आरोपी के रूप में उल्लेख किया गया है।  शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वे दिसंबर 2018 से 24 वर्षीय छात्र को उसकी जाति के कारण परेशान कर रहे थे, गाली दे रहे थे और टिप्पणी कर रहे थे।

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ठळक मुद्देपुलिस ने कहा कि छात्रों और दो कॉलेज वार्डन के नाम मामले में आरोपी के रूप में उल्लेख किया गया है।आरोप है कि वे दिसंबर 2018 से 24 वर्षीय छात्र को उसकी जाति के कारण परेशान कर रहे थेपुलिस ने कहा कि इस मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

मुंबई:महाराष्ट्र की भोइवाड़ा पुलिस ने शनिवार को केईएम अस्पताल के एक पोस्ट ग्रेजुएशन छात्र को अनुसूचित जाति समुदाय से कथित रूप से परेशान करने और रैगिंग करने के आरोप में 16 से अधिक लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने कहा कि छात्रों और दो कॉलेज वार्डन के नाम मामले में आरोपी के रूप में उल्लेख किया गया है।  शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वे दिसंबर 2018 से 24 वर्षीय छात्र को उसकी जाति के कारण परेशान कर रहे थे, गाली दे रहे थे और टिप्पणी कर रहे थे।

अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (मध्य क्षेत्र) ज्ञानेश्वर चव्हाण ने कहा कि इस मामले में अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। मामला महाराष्ट्र रैगिंग निषेध अधिनियम, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज किया गया है।

पुलिस ने कहा कि शिकायतकर्ता सुगत भारत पदघन हिंगोली जिले का रहने वाला है और अपनी पोस्ट ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करने के लिए मुंबई आए हैं। वह किंग एडवर्ड मेमोरियल (केईएम) अस्पताल के ऑक्यूपेशनल थेरेपी स्कूल एंड सेंटर में पढ़ रहे हैं।

अपने बयान में पदघन ने आरोप लगाया है कि चूंकि वह अनुसूचित जाति से आते हैं, इसलिए छात्र और वार्डन जानबूझकर उन्हें कॉलेज के फर्श की सफाई करवाते हैं, उनसे अपने कपड़े और बर्तन धुलवाते हैं और उन्हें एक बेंच पर खड़ा करते हैं।

छात्र ने अस्पताल के अधिकारियों के सामने इस मुद्दे को उठाया था जिसके बाद अस्पताल में 10 सदस्यों की एक आंतरिक समिति बनाई गई, जिसने आरोपों की जांच की। लेकिन उन्होंने सभी दावों को खारिज कर दिया। इसके बाद शिकायतकर्ता को दूसरे छात्रावास भवन में स्थानांतरित कर दिया गया।

अखबार से अधिकारियों ने स्वीकार किया कि दिसंबर में अपनी जांच के दौरान केंद्र द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन नहीं करने के लिए उनकी आलोचना की गई थी। पिछले हफ्ते, अस्पताल ने फिर से 20 सदस्यों की एक समिति बनाई, जिसमें दो माता-पिता, पुलिस, एक रिपोर्टर, एक एनजीओ के एक प्रतिनिधि सहित अन्य शामिल थे।

अस्पताल की डीन डॉ संगीता रावत ने कहा कि समिति ने कुछ खामियां पाई हैं, जो रैगिंग की तरह नहीं है। शिकायत पत्र में जिन छात्रों पर आरोप लगाया गया है, उन्हें हमने नोटिस भेजा है।

टॅग्स :महाराष्ट्रमुंबई पुलिसदलित विरोध
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