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Coronavirus: मुंबई-पुणे में इसलिए हैं राज्य के 91% सबसे ज्यादा मरीज, सामने आया चौंकाने वाला आंकड़ा

By लोकमत समाचार ब्यूरो | Updated: April 25, 2020 09:25 IST

महाराष्ट्र में कोरोना संक्रमण के चलते लागू लॉकडाऊन को आज (शुक्रवार) 31 दिन पूरे हो चुके हैं. राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से पहले ही कर्फ्यू लागू कर दिया था. देश में सबसे ज्यादा मरीज होने के बावजूद यही कहा जा सकता है कि राज्य में स्थिति नियंत्रण में है. यदि लॉकडाऊन नहीं होता तो स्थिति काफी भयावह हो सकती थी, जिसका अनुमान लगाया नहीं जा सकता.

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ठळक मुद्देराज्य में कोरोना संक्रमण के चलते लागू लॉकडाऊन को आज (शुक्रवार) 31 दिन पूरे हो चुके हैं. राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से पहले ही कर्फ्यू लागू कर दिया था.देश में सबसे ज्यादा मरीज होने के बावजूद यही कहा जा सकता है कि राज्य में स्थिति नियंत्रण में है. यदि लॉकडाऊन नहीं होता तो स्थिति काफी भयावह हो सकती थी

मुंबई। राज्य में कोरोना संक्रमण के चलते लागू लॉकडाऊन को आज (शुक्रवार) 31 दिन पूरे हो चुके हैं. राज्य सरकार ने केंद्र सरकार से पहले ही कर्फ्यू लागू कर दिया था. देश में सबसे ज्यादा मरीज होने के बावजूद यही कहा जा सकता है कि राज्य में स्थिति नियंत्रण में है. यदि लॉकडाऊन नहीं होता तो स्थिति काफी भयावह हो सकती थी, जिसका अनुमान लगाया नहीं जा सकता. मौजूदा समय में राज्य में कुल 6437 संक्रमित हैं, जिसमें से मुंबई, ठाणे और उपनगरीय परिसर में कुल मिलाकर 4980 संक्रमित हैं।

जिसे प्रतिशत में समझें तो राज्य के 77.50% मरीज यहीं है. इसी तरह पुणे के कुल 913 संक्रमितों का प्रतिशत 14.20% है. मतलब साफ है कि राज्य के 91.70% मरीज मुंबई-पुणे में थे. एक और गणना की जाए तो पता चलता है कि देश के कुल मरीजों में से 25.60 फीसदी मरीज मुंबई-पुणे में हैं. रही बात मुंबई-पुणे की तो यही कहा जा सकता है कि यहां सबसे ज्यादा मरीज होने के अपने कारण हैं, जिन पर गौर फरमाना जरूरी है. इसमें कोई संदेह नहीं कि देश में सबसे ज्यादा गंभीर स्थिति महाराष्ट्र की है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि इसके कुछ कारण हैं.

देश में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले प्रमुख 8 शहरों में से दो शहर महाराष्ट्र में हैं. देश की व्यावसायिक राजधानी मुंबई सबसे ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें संचालित होती हैं. चूंकि कोरोना वाइरस बाहर से यहां आया है, तो स्वाभाविक है कि सबसे ज्यादा कोरोना वाहक भी महाराष्ट्र में ही आए हैं. राज्य में कोरोना का पहला मरीज 9 मार्च को मिल गया था. राज्य सरकार उसी समय हरकत में आ गई थी. लेकिन विदेशों से आने वाले लोगों को घरों में रखने के बजाय संस्थात्मक क्वारंटाइन रखा जाता, तो स्थिति काफी बेहतर होती. ये भी बड़े कारण - व्यावसायिक, पर्यटन और शैक्षिक कारणों के चलते विदेशों में जाने वालों की संख्या सर्वाधिक - फरवरी के अंत में और मार्च के आरंभ में विदेशों से सबसे ज्यादा लौटने वाले मुंबई और पुणे के थे.

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