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जेंडर जस्टिस: मध्यप्रदेश के शाजापुर में अनूठी पहल, सार्वजनिक शौचालयों में की गई थर्ड जेंडर के लिए स्वतंत्र व्यवस्था

By विनीत कुमार | Updated: March 20, 2021 16:08 IST

मध्य प्रदेश के शाजापुर में ग्रामीण इलाकों में जो सार्वजनिक शौचालय तैयार किए जा रहे हैं, उसमें महिला एवं पुरुष के साथ थर्ड जेंडर के लिए भी अलग से व्यवस्था की गई है।

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ठळक मुद्दे शाजापुर के ग्रामीण इलाकों में तैयार किए जा रहे 87 सार्वजनिक शौचालयों में थर्ड जेंडर के लिए भी सुविधाइन शौचालयों की खास बात है कि इनमें स्त्री एवं पुरुष के साथ ही ट्रांसजेंडर के लिए भी स्वतंत्र व्यवस्था की गयी है।

शाजापुर: मध्यप्रदेश में जेंडर जस्टिस के दिशा में अनूठी पहल देखने को मिली है। राज्य के शाजापुर जिले के ग्रामीण इलाकों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत बनने वाले शौचालयों में पुरुष एवं महिला के साथ ट्रांसजेंडर के लिए भी शौचालय की व्यवस्था की जा रही है।  स्थानीय प्रशासन तीनों जेंडर को एक साथ सुविधा प्रदान करने वाले 87 सामुदायिक स्वच्छता परिसर तैयार कर रहा है जिनमें से 19 का काम पूरा हो चुका है।  

इससे पहले साल 2017 में मध्यप्रदेश सरकार ने राज्य की राजधानी भोपाल में थर्ड जेंडर के लिए अलग से शौचालय बनवाकर दुनिया का ध्यान अपनी तरफ खींचा था। भोपाल देश का दूसरा ऐसा शहर बना था जिसमें थर्ड जेंडर के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था की गयी।

थर्ड जेंडर के लिए अलग शौचालय की व्यवस्था सबसे पहले कर्नाटक के मैसूर शहर में की गयी। लेकिन शाजापुर में  थर्ड जेंडर के लिए बने शौचालय इस मामले में भोपाल और मैसूर से अलग हैं कि इनमें एक ही शौचालय में महिला एवं पुरुष के साथ थर्ड जेंडर के लिए व्यवस्था की गयी है। इस तरह ये शौचालय थर्ड जेंडर को अलग देखने के बजाय बाकी दो जेंडर (स्त्री एवं पुरुष) के समान मानने की सोच को प्रेरित करते हैं। 

सुप्रीम कोर्ट ने साल 2014 में दिए गए एक ऐतिहासिक फैसले में ट्रांसजेंडरों को पुरुष या स्त्री से अलग थर्ड जेंडर के तौर पर मान्यता देने का निर्णय दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में केंद्र एवं राज्य सरकारों को थर्ड जेंडर को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़ा मानकर उनका विकास सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया था। उच्चतम अदालत ने थर्ड जेंडर के लिए अलग शौचालय बनाने की भी बात कही थी।

इन पहल की खास बात यह कि ये शौचालय किसी खास या अलग फंड या योजना के तहत नहीं बन रहे हैं। ये सारे शौचालय  स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत नियमित तौर पर बनाये जा रहे शौचालयों के अंतर्गत ही बने हैं।  एक ही शौचालय में थर्ड जेंडर को जगह देने का विचार साल युवा आईएएस मिशा सिंह का है। साल 2016 बैच की IAS मिशा सिंह इस समय शाजापुर जिला पंचायत की CEO के रूप में तैनात हैं। 

प्रधानमंत्री आवास योजना का बेटी कनेक्शन

शाजापुर में बेटियों के नाम पर रखा गया एक भवन जिसे प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत तैयार किया गया।
मिशा सिंह इससे पहले प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी एक सृजनात्मक प्रयोग किया था जिसकी स्थानीय मीडिया में तारीफ हुई। मिशा ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत शाजापुर में बनने रहे आवास को प्रधानमंत्री की 'बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ' योजना से जोड़ दिया था।

परिणामस्वरूप प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले एक घरों के नाम घर की बेटियों के नाम पर रखे जाने लगे। अभी तक शाजापुर के ऐसे एक हजार घरों के नाम बेटियों के नाम पर रखे गये।

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस (International Women Day) पर एक ट्वीट करके मिशा सिंह ने बताया था कि इन एक हजार घरों को बेटी के नाम रखा गया। 

बेंगलुरु और दिल्ली में थर्ड जेंडर के लिए शौचालय

वहीं, 2019 में बेंगलुरु में भी ऐसे शौचालय बनाए गए। देश की राजधानी दिल्ली में भी जल्द ही ऐसे अलग से सार्वजनिक शौचालय बनाए जाने की योजना है। न्यू दिल्ली म्यूनिसिपल काउंसिल (एनडीएमसी) ने 2021-22 के बजट में इस संबंध में घोषणा भी कर दी है।

दिल्ली के शास्त्री भवन में थर्ड जेंडर के लिए सार्वजनिक शौचालय बनाया जा रहा है। की योजना सबसे पहले है। इसे लेकर काम शुरू भी कर दिया गया है। शास्त्री भवन में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों के दफ्तर हैं।

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