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मध्य प्रदेशः जो चावल मवेशी ना खाएं, उसे गरीबों को देने की तैयारी, आयोग ने मांगा जवाब

By शिवअनुराग पटैरया | Updated: October 31, 2020 21:03 IST

एफसीआई की टीम ने जिले के गोदामों में चावलों का सेम्पल लेकर जांच करवाई थी. इसमें 55 हजार क्विंटल बीआरएल चावल और 29 हजार क्विंटल चावल अमानक मिला था.

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ठळक मुद्देअपग्रेड करवा कर मिलर्स ने गोदामों में रखवाना शुरू कर दिया गया है, लेकिन अमानक चावल की खेप जस की तस रखी थी. चावल को खपाने की जुगत लगाई जा रही है. इस मामले को लेकर मप्र मानव अधिकार आयोग ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है.खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति भोपाल तथा कलेक्टर  एवं जिला आपूर्ति अधिकारी, शहडोल से एक माह में प्रतिवेदन मांगा है.

भोपालः शहडोल जिले में एफसीआई की रिपोर्ट में जिस चावल को मवेशियों को खाने लायक तक नहीं बताया गया था, उसे अब गरीबों को देने की तैयारी है.

अधिकारी इस अमनक चावल का अपगे्रेडेशन करवा रहे हैं. इसके लिए मिलर्स की सूची तैयार कर ली गई है. मालूम हो कि एफसीआई की टीम ने जिले के गोदामों में चावलों का सेम्पल लेकर जांच करवाई थी. इसमें 55 हजार क्विंटल बीआरएल चावल और 29 हजार क्विंटल चावल अमानक मिला था.

बीआरएल श्रेणी के चावल को पूर्व में अपग्रेड करवा कर मिलर्स ने गोदामों में रखवाना शुरू कर दिया गया है, लेकिन अमानक चावल की खेप जस की तस रखी थी. इस चावल को खपाने की जुगत लगाई जा रही है. इस मामले को लेकर मप्र मानव अधिकार आयोग ने संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगा है.

जानकारी के मुताबिक 12 मिलर्स को अमानक चावल अपग्रेड करना है. इनमें मदनी राइस मिलर को 1980 क्विंटल, गुड्डू सरावगी मिलर को 5820 क्विंटल, प्रयागराज राइस मिलर को 5438 क्विंटल, तिरूपति मिलर को 2032 क्विंटल, नूरजहां राइस मिलर को 2125 क्विंटल, मुख्तार राईस मिलर को 1740 क्विंटल, हदीश राइस मिलर को 1095 क्विंटल सर्वोदय राइस मिलर को 1714 क्विंटल अमानक चावल अपग्रेड करना है. इसी तरह विराट मिलर को 200 क्विंटल, महाकाल मिलर को 211 क्विंटल, इंडियन मिलर को 172 क्विंटल तो लक्ष्मी मिलर को 1756 क्विंटल चावल अपग्रेड कर गोदामों में जमा करना है. इस मामले में आयोग ने मुख्य सचिव, मध्य प्रदेश शासन, प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति भोपाल तथा कलेक्टर  एवं जिला आपूर्ति अधिकारी, शहडोल से एक माह में प्रतिवेदन मांगा है.

लड़की को भूल जाओ, वह जिसके साथ भागी है, उसका सरनेम लगाना शुरू कर दो: भोपाल शहरर के छोला थाने में रिपोर्ट लिखाने पहंची एक महिला को बदसलूकी का मामला सामने आया है. गीता नगर इलाके में रहने वाले एक परिवार की लड़की घर से लापता हो गई. लड़की की मां अपनी बेटी की रिपोर्ट लिखाने थाने पहुंची, तो हेड कांस्टेबल लड़की की मां से कहता है कि अपनी लड़की के नाम के आगे अब उस लड़के का सरनेम लगाना चालू कर दो, जिसके साथ वह भागी है.  मप्र मानव अधिकार आयोग ने इस मामले को लेकर पुलिस अधिकारियों से जवाब मांग है.

आयोग के अनुसार लड़की की मां का कहना है कि लड़ने ने जानबूझकर उसकी लड़की को को बहला फुसलाकर भगाया है, तो दूसरा पुलिसकर्मी कहता है कि लड़की की भूल जाओ, वह अपनी मर्जी से भागी है.लड़की की मां जिस हेड कांस्टेबल और सिपाही पर आरोप लगा रही है, वह इस मामले की जांच नहीं कर रहे है. मामला दर्ज किया है, एक अन्य अधिकारी इस मामले की जांच कर रहे है. लापता लड़की की मां जिस लड़के पर आरोप लगा रही थी, पुलिस ने उसे थाने में बिठा लिया था, लेकिन आरोप खारिज कर दिये थे.

इधर देर शाम लापता लड़की ने थाने में बैठे लड़के के मोबाइल पर फोन किया और पूछा कि बताओ कहां आना है, तब पुलिस सतर्क हुई. मोबाइल स्पीकर पर लेकर लड़की की लोकेशन पूछी तो पता चला कि थाने के नजदीक छोला मंदिर के पास से ही वो फोन कर रही थी. पुलिस ने लड़की को वापस लाकर माता पिता के हवाले किया. मां ने आरोप लगाया है कि उनकी बच्ची एक कोचिंग संस्थान में पढ़ने जाती थी, जहां आरोपी लड़के ने उनकी लड़की को प्रेम जाल में फंसा लिया. इस मामले में आयोग ने पुलिस पर महानिरीक्षक, भोपाल से एक माह में प्रतिवेदन मांगा है.

छुट्टी के लिए बनाया दबाव, नहीं किया इलाज, महिला की मौत:  भोपाल शहर के हमीदिया अस्पताल में बीते बुधवार को एक महिला की मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि यहां डाक्टर इलाज करने के बजाय छुट्टी करने के लिए दबाव बना रहे थे. जब छुट्टी नहीं कराई, तो उसके बाद से कोई देखने ही नहीं आया. ऐसे में इलाज नहीं मिलने से मरीज की मौता हो गई.  

यह आरोप सागर निवासी आशा रानी शर्मा के परिजनों ने लगाए. बेटे सोनू ने बताया कि सिर में चोट लगने के बाद मां को 19 अक्टूबर को यहां भर्ती किया गया था. पांच दिन चले इलाज के बाद डा. ए.के. चौरसिया ने उन्हें घर ले जाने को कहा था. जबकि उस वक्त मां बेसुध थी. परिवार ने हाथ पेर जोड़े तो वे छुट्टी नहीं करने के लिए तो राजी हो गए थे, लेकिन इसके बाद से कोई देखने तक नहीं आया. इस मामले में आयोग ने अधीक्षक, हमीदिया अस्पताल, भोपाल से तीन सप्ताह में प्रतिवेदन मांगा है.

टॅग्स :ह्यूमन राइट्समध्य प्रदेशभोपालशिवराज सिंह चौहान
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