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कुलभूषण जाधव केस अपडेट: भारत को मिला दूसरा कांसुलर एक्सेस, पाकिस्तान में भारत के दो अधिकारियों को मिलेगी अनुमति

By लोकमत न्यूज़ डेस्क | Updated: July 16, 2020 19:23 IST

भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान से कुलभूषण जाधव के पास राजनयिक पहुंच देने की मांग की है। जाधव पाकिस्तान की जेल में बंद हैं और उन्हें पाकिस्तान की सैन्य कोर्ट ने मौत की सजा सुनाई है।

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ठळक मुद्देपिछले ही हफ्ते हालांकि पाकिस्तान ने दावा किया था कि मौत की सजा पाए जाधव ने कोई रिव्यू पिटिशन दाखिल करने से मना किया है।भारत ने पाकिस्तान से बिना किसी शर्त के भारतीय कुलभूषण जाधव के लिए राजनयिक पहुंच की मांग की है। सूत्रों के हवाले से ये जानकारी सामने आई है।

नई दिल्लीः कुलभूषण जाधव केस में भारत को जीत हुई है। भारत को दूसरा कांसुलर एक्सेस मिल गया है। पाकिस्तान में भारत के दो अधिकारियों को अनुमति दी जाएगी।

पाकिस्तान ने मौत की सजा का सामना कर रहे भारतीय कैदी कुलभूषण जाधव को बृहस्पतिवार को राजनयिक संपर्क मुहैया कराया। कुछ ही दिन पहले, इस्लामाबाद ने दावा किया था कि जाधव ने एक सैन्य अदालत द्वारा उन्हें दोषी करार दिये जाने के खिलाफ यहां एक अदालत में अपील दायर करने से इनकार कर दिया है।

पाकिस्तान विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा कि जाधव को मुहैया कराया गया यह दूसरा राजनयिक संपर्क है। पहला राजनयिक संपर्क दो सितंबर 2019 को मुहैया कराया गया था। जाधव (50) भारतीय नौसेना के एक सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। उन्हें जासूसी एवं आतंकवाद के आरोपों में अप्रैल 2017 में पाकिस्तान की एक सैन्य अदालत ने फांसी की सजा सुनाई थी। इसके कुछ ही हफ्तों बाद, भारत ने जाधव को राजनयिक संपर्क मुहैया नहीं किये जाने के खिलाफ और उनकी मौत की सजा को चुनौती देने के लिये हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) का रुख किया।

पाकिस्तान को जाधव की दोषसिद्धि एवं सजा की प्रभावी समीक्षा करनी होगी

अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने पिछले साल जुलाई में कहा था कि पाकिस्तान को जाधव की दोषसिद्धि एवं सजा की प्रभावी समीक्षा करनी होगी और पुनर्विचार करना होगा, साथ ही बगैर किसी देर के भारत को राजनयिक स्तर पर उनसे संपर्क करने की भी इजाजत दी जाए। पाक विदेश कार्यालय ने एक बयान में कहा, ‘‘इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के दो अधिकारियों को दोपहर तीन बजे कमांडर जाधव से बेरोक-टोक और निर्बाध संपर्क कराया गया। ’’

बयान में इस बात का भी जिक्र किया गया है कि जाधव की मां और पत्नी को 25 दिसंबर 2017 में उनसे मिलने की अनुमति दी गई थी। बयान में कहा गया है, ‘‘पाकिस्तान आईसीजे के 17 जुलाई 2019 के फैसले का पूरी तरह से क्रियान्वयन करने के लिए प्रतिबद्ध है। उसे उम्मीद है कि भारत इस फैसले को पूर्ण रूप से प्रभावी बनाने में पाकिस्तानी अदालत का सहयोग करेगा। ’’ पिछले हफ्ते पाकिस्तान के अतिरिक्त महान्यायवादी अहमद इरफान ने कहा था कि 17 जून 2020 को जाधव को अपनी सजा एवं दोषसिद्धि के खिलाफ इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में एक अपील दायर करने की पेशकश की गई थी।

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार ने 20 मई को एक अध्यादेश जारी किया , ताकि भारत सरकार, जाधव या उनके कानूनी प्रतिनिधि 60 दिनों के अंदर इस्लामाबाद उच्च न्यायालय में एक पुनर्विचार याचिका दायर कर सकें।

पाकिस्तान का दावा है कि उसके सुरक्षा कर्मियों ने जाधव को अशांत बलूचिस्तान प्रांत से तीन मार्च 2016 को गिरफ्तार किया था। उन्होंने वहां कथित तौर पर ईरान से लगी सीमा से प्रवेश किया था। हालांकि, भारत यह कहता आ रहा है कि जाधव का ईरान से अपहरण कर लिया गया, जहां वह नौसेना से सेवानिवृत्त होने के बाद कारोबार के सिलसिले में गये थे। भारत ने पाकिस्तान से बिना किसी शर्त के भारतीय कुलभूषण जाधव के लिए राजनयिक पहुंच की मांग की थी। सूत्रों के हवाले से ये जानकारी सामने आई है।

पिछले ही हफ्ते हालांकि पाकिस्तान ने दावा किया था कि मौत की सजा पाए जाधव ने कोई रिव्यू पिटिशन दाखिल करने से मना किया है और इसके बदले दया याचिका दायर करना चाहते हैं। भारत ने कि यह कहते हुए दावे को खारिज कर दिया था कि ये इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) के आदेश को लागू करने के खिलाफ इस्लामाबाद का स्वांग है।

बता दें कि सजा के खिलाफ रिव्यू पिटिशन दाखिल करने के लिए के लिए जाधव के सामने 20 जुलाई तक का वक्त है। पिछले हफ्ते भी भारत ने कहा था कि वह मौत की सजा पाए भारतीय कुलभूषण जाधव के मामले में कानूनी विकल्पों को टटोल रहा है। 

कुलभूषण जाधव (फाइल फोटो)

गौरतलब है कि पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने अप्रैल 2017 में भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त जाधव को जासूसी और आतंकवाद के आरोप में मौत की सजा सुनाई थी। इसके कुछ हफ्तों बाद भारत ने जाधव को दूतावास पहुंच नहीं दिये जाने और उसे सुनाई गई मौत की सजा को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ आईसीजे में अपील की थी। 

आईसीजे ने तब पाकिस्तान को सजा पर अमल करने से रोक दिया था। हेग स्थित अदालत ने पिछले साल जुलाई में हुई कहा था कि पाकिस्तान को जाधव को दोषी ठहराए जाने और सजा पर 'प्रभावी समीक्षा और पुनर्विचार' करना चाहिए और बिना किसी देरी के उसे भारतीय दूतावास की पहुंच उपलब्ध करानी चाहिए।

कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान ने मार्च-2016 में जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया था। एक साल बाद ही जाधव को मौत की सज सुना दी गई। इसके बाद भारत ने इस फैसले को आईसीजे में चुनौती दी थी। पाकिस्तान जहां दावा करता रहा है कि जाधन को बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया गया था, वहीं भारत का कहना है कि उन्हें ईरान से अगवा कर लिया गया था, जहां वे बिजनेस के सिलसिले में थे।

टॅग्स :कुलभूषण जाधवपाकिस्तानसंयुक्त राष्ट्रनरेंद्र मोदी
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