लाइव न्यूज़ :

जानें क्या है मेटाडेटा, जिसे खंगालने पर मिले विदेशी लिंक, शक के घेरे में राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी?

By रुस्तम राणा | Updated: September 12, 2025 23:39 IST

खुरपेंच टीम ने इसकी तहक़ीक़ात की तो हमें म्यांमार के ट्रेस मिले जो कि बहुत हैरान करने वाला है।

Open in App

नई दिल्ली: आरोप है कि चुनाव आयोग पर तीखे हमले के लिए राहुल गांधी द्वारा अपनी विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिखाए गए "वोट चोरी" वाले पीडीएफ म्यांमार में बनाए गए थे। इसका खुलासा सबसे पहले खरपेंच नामक एक्स अकाउंट ने किया। इस अकाउंट ने कांग्रेस नेता की पीसी की वीडियो का एक स्क्रीन शॉट को पोस्ट करते हुए लिखा, '7 अगस्त,2025 को विपक्ष के नेता माननीय राहुल गांधी जी द्वारा वोट चोरी पर एक प्रेस कॉन्फ्रेस की गई,जो कि पूरे देश में चर्चा का विषय बनी, जिसमें देश के बड़े बड़े सोशल मीडिया इन्फ़्लुएंसर्स ने बढ़चढ़कर हिस्सा लिया। लेकिन जब खुरपेंच टीम ने इसकी तहक़ीक़ात की तो हमें म्यांमार  के ट्रेस मिले जो कि बहुत हैरान करने वाला है।' इसी प्रकार इस अकांट से खुलासे के रूप में और भी ट्वीट किए गए।

वहीं सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) भी इस मुद्दे को लेकर हमलावर है। उसने गुरुवार को विपक्ष के नेता राहुल गांधी और कांग्रेस पर नए आरोप लगाते हुए दावा किया कि चुनाव आयोग पर हमला तेज करने के लिए गांधी द्वारा अपनी विशेष प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिखाए गए "वोट चोरी" पीडीएफ म्यांमार में बनाए गए थे।

वहीं, इस खुलासे से कॉन्ग्रेस खेमे में हलचल मच गई। आरोपों का जवाब देने के लिए कॉन्ग्रेस की आईटी सेल के ट्रोल और समर्थक एक्स पर सक्रिय हो गए। खुरपेंच के दावों को कॉन्ग्रेस नेता और समर्थक नकारने में लग गए। गुरुवारको कॉन्ग्रेस की प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने राहुल गाँधी की सफाई में चैट जीपीटी की मदद लेने की कोशिश की, लेकिन इसका ज्यादा असर नहीं हुआ।

उन्होंने दावा किया कि टाइमजोन में गड़बड़ी किसी सॉफ्टवेयर कॉन्फ़िगरेशन की समस्या या फिर एडोबी बग के कारण हुई है। सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “यह एक घंटे का फर्क किसी स्थान परिवर्तन का सबूत नहीं है, बल्कि यह आम तकनीकी गड़बड़ी है। एडोबी प्रोडक्ट्स में अक्सर टाइमस्टैम्प से जुड़ी ऐसी दिक्कतें आती हैं, जहाँ मेटाडाटा फील्ड्स में ऑफसेट मेल नहीं खाता।”

क्या है मेटाडाटा?

मेटाडाटा को ‘डेटा के बारे में डेटा’ कहा जाता है। यह एक महत्वपूर्ण संदर्भ परत है, जो रॉ डाटा को मीनिंगफूल ढाँचे में लाता है और उसको इस्तेमाल करने लायक बनाता है। मेटाडाटा डेटा और उसके इस्तेमाल के बीच पुल का काम करता है, ताकि ये यूजर और सिस्टम दोनों जानकारी को सही तरीके से समझ सके और उपयोग कर सके।

चाहे किसी दस्तावेज के लेखक की पहचान करनी हो, डेटाबेस के फ़ील्ड की संरचना तय करनी हो या किसी फोटो में स्थान से जुड़ा टैग जोड़ना हो, मेटाडाटा वह ढाँचा देता है जो बिखरे हुए डेटा को उपयोगी जानकारी में बदल देता है।

टॅग्स :राहुल गांधीकांग्रेसचुनाव आयोग
Open in App

संबंधित खबरें

ज़रा हटकेVIDEO: असम में योगी का बड़ा बयान, 'घुसपैठियों को बाहर करना ही होगा'

भारतश्रीपेरंबुदूर से उम्मीदवार तमिलनाडु कांग्रेस अध्यक्ष सेल्वापेरुन्थगई, 27 उम्मीदवार घोषित, देखिए

क्राइम अलर्टमालदा में 7 न्यायिक अधिकारी को बनाया बंधक?, बागडोगरा हवाई अड्डे से मुख्य आरोपी अधिवक्ता मोफक्करुल इस्लाम अरेस्ट, अब तक 35 अरेस्ट, वीडियो

भारतबिहार चुनावः 2026 में 17 सीट खाली, राज्यसभा के बाद MLC इलेक्शन में भी तेजस्वी यादव को लगेगा झटका, 1 सीट के लिए 25 विधायक?

भारतएक शांत दिखने वाली विदाई से हुई भारी क्षति!

भारत अधिक खबरें

भारतदिल्ली और उत्तरी भारत के कुछ हिस्सों में महसूस हुए भूकंप के झटके, अफगानिस्तान में आया भूकंप

भारतकेंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ग्रीनविच मीन टाईम को महाकाल स्टेंडर्ड टाईम में बदलने पर दिया जोर

भारतदलित समुदाय के 22 फीसदी वोट पर जमीन अखिलेश की निगाह , 14 अप्रैल पर अंबेडकर जयंती पर गांव-गांव में करेगी कार्यक्रम

भारतराघव चड्ढा पर आतिशी का बड़ा आरोप, 'BJP से डरते हैं, अगला कदम क्या होगा?'

भारतउत्तर प्रदेश उपचुनाव 2026ः घोसी, फरीदपुर और दुद्धी विधानसभा सीट पर पड़ेंगे वोट?, 2027 विस चुनाव से पहले सेमीफाइनल, सीएम योगी-अखिलेश यादव में टक्कर?