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किरण मजूमदार ने निजी अस्पतालों में मुफ्त टीका उपलब्ध कराने की अपील को अतार्किक कहा

By भाषा | Updated: March 5, 2021 20:52 IST

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बेंगलुरु, पांच मार्च जैवप्रौद्योगिकी कंपनी बॉयोकॉन लिमिटेड की कार्यकारी अध्यक्ष किरण मजूमदार शॉ ने निजी अस्पतालों में कोविड-19 के टीके नि:शुल्क उपलब्ध कराने की कुछ विशेषज्ञों और नेताओं की अपील की आलोचना की है तथा इसे अतार्किक बताया है।

उन्होंने इस बात का जिक्र किया कि लोगों के पास टीके के लिए भुगतान करने या नि:शुल्क लगवाने का विकल्प है।

उन्होंने शुक्रवार को पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘इसलिए, यदि वे निजी अस्पताल का विकल्प चुनते हैं तो उन्हें टीके के लिए भुगतान करने को भी तैयार रहना चाहिए।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लोगों को किसी भी सरकारी अस्पताल में नि:शुल्क टीका लगाया जा रहा है।’’

स्वास्थ्य मंत्राल ने पिछले हफ्ते कहा था कि कोविड-19 टीकाकरण केंद्र के तौर पर काम कर रहे निजी अस्पताल इसके लिए शुल्क ले सकते हैं, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति खुराक 250 रुपये होगी।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों और नेताओं ने इस कदम पर सवाल उठाते हुए कई देशों में अपनाई गई नीति का जिक्र किया है, जहां निजी अस्पतालों में नि:शुल्क टीकाकरण किया जा रहा है।

मजूमदार शॉ ने कहा, ‘‘सरकार गरीबों और अमीरों के लिए (सरकारी अस्पतालों में) टीके मुफ्त उपलब्ध करा रही है।’’

उन्होंने कहा कि निजी क्षेत्र को टीके का शुल्क चुका सकने वाली आबादी से भुगतान प्राप्त करने देना चाहिए और कोई भी इसे लेकर शिकायत नहीं करेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि लोग कोविड-19 जांच के लिए भुगतान करने को इच्छुक हैं, जो प्रति जांच 500 से 1000 रुपये हैं, तो वे जीवन रक्षक टीके के लिए भुगतान क्यों नहीं करेंगे? ’’

कांग्रेस नेता एवं कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरमैया ने कहा है कि निजी अस्पतालों को टीके की प्रति खुराक 250 रुपये लेने की अनुमति देने का सरकार का फैसला हर किसी का टीकाकरण सुनिश्चित करने और महामारी के प्रसार की रोकथाम की कोशिशों को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करेगा।

सिद्धरमैया ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निजी अस्पतालों को प्रति टीका 250 रुपये शुल्क वसूलने की अनुमति दिये जाने के निर्णय पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया और कहा कि यह महामारी के खिलाफ संघर्ष में एक निवारक के रूप में काम करेगा।

वही, मजूमदार शॉ ने कहा, ‘‘मैं सिद्धरमैया के इस विचार से सहमत नहीं हूं।’’

उन्होंने कहा कि यह सिद्धरमैया का अतार्किक अनुरोध है।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि आप मुफ्त में टीका लगवाना चाहते हैं तो आप सरकारी अस्पताल जा सकते हैं। लेकिन यदि आप निजी अस्पताल जा रहे है तो आपको इसके लिए भुगतान करना चाहिए। ’’

उन्होंने कहा, ‘‘टीका कंपनियां भी भी पैसे चाहती हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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