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कारगिल विजय: 'हमसे गलती हुई कि पाकिस्तान में घुस कर नहीं मारा...', सेवानिवृत्त उप सेना प्रमुख ने कहा- कारगिल से सीखे गए सबक पर विचार करने जरूरत

By शिवेन्द्र कुमार राय | Updated: August 5, 2024 11:37 IST

पूर्व उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सतीश नांबियार (सेवानिवृत्त) ने कहा है कि हमने पाकिस्तानियों पर उनके इलाके में जोरदार हमला करके लड़ाई नहीं लड़ी, जहां उन्हें नुकसान होता।

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ठळक मुद्देकारगिल की जंग में भारतीय सैनिकों ने जो वीरता दिखाई उस पर देश गर्व करता हैहाल ही में कारगिल विजय दिवस की 25वीं वर्षगांठ मनाई गई कई पूर्व अधिकारियों ने विभिन्न मंचों और लेखों के माध्यम से कारगिल संघर्ष पर स्पष्ट विचार रखे हैं

नई दिल्ली: लद्दाख की ऊंची चोटियों पर लड़ी गई कारगिल की जंग में भारतीय सैनिकों ने जो वीरता दिखाई उस पर देश गर्व करता है। हाल ही में कारगिल विजय दिवस की 25वीं वर्षगांठ मनाई गई। इसके बाद सेना और वायु सेना के कई पूर्व अधिकारियों ने विभिन्न मंचों और लेखों के माध्यम से कारगिल संघर्ष पर स्पष्ट विचार रखे हैं। इसी क्रम में पूर्व उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सतीश नांबियार (सेवानिवृत्त) का नाम भी आता है।

पूर्व उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल सतीश नांबियार (सेवानिवृत्त) ने कहा है कि कुछ सम्मानजनक अपवादों को छोड़कर, कारगिल में सैन्य अभियानों के संचालन में शायद ही कोई जनरलशिप शामिल थी। उन्होंने यह भी कहा कि रणनीति या परिचालन कला का कोई प्रदर्शन नहीं हुआ। 

पूर्व सैन्य अधिकारी ने ये बातें  1 अगस्त को नई दिल्ली में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (आईआईसी) में आयोजित एक सेमिनार में कही थी। सेमिनार का विषय  'कारगिल एट 25' था। इसमें जनरल के अलावा, मोडोर उदय भास्कर (सेवानिवृत्त), रणनीतिक मामलों के जाने-माने लेखक, पूर्व राजनयिक और विदेश सचिव श्याम सरन और वरिष्ठ पत्रकार सुशांत सिंह भी शामिल हुए।

कागरिल के बारे में बात करते हुए जनरल सतीश नांबियार (सेवानिवृत्त) ने कहा कि हमने पाकिस्तानियों पर उनके इलाके में  जोरदार हमला करके लड़ाई नहीं लड़ी, जहां उन्हें नुकसान होता। हमने वैसा नहीं किया जैसा कि सितंबर 1965 में तत्कालीन प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने किया था। जनरल नांबियार ने पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ने में मिली सफलता का श्रेय कनिष्ठ नेतृत्व और सैनिकों की बहादुरी को दिया।

उन्होंने कहा कि अब कारगिल से सीखे गए सबक पर विचार करने और राष्ट्रीय और सैन्य रणनीति, परिचालन अवधारणाओं और संगठनात्मक संरचनाओं को प्रासंगिक बनाने का समय है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में आमने-सामने की लड़ाई में 15,000 से 18,000 फीट तक की ऊंचाइयों पर दुश्मन के कब्जे वाले ठिकानों पर हमला करना और नियंत्रण रेखा पर यथास्थिति बहाल करना एक उपलब्धि थी जिसे तब याद किया जाएगा जब सैन्य रणनीति की समीक्षा और अध्ययन किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों से मेरी विनती है कि हमारे युवाओं को कारगिल जैसी स्थिति में न डालें। सुनिश्चित करें कि, कारगिल के विपरीत, उन्हें विरोधियों से निपटने का एक समान मौका दिया जाए। 

टॅग्स :Kargilभारतीय सेनाIndian armyPakistan Army
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