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जज लोया की मौत से जुड़ा फैसला कांग्रेस के मुंह पर तमाचा: सीएम रघुवर दास

By स्वाति सिंह | Updated: April 19, 2018 22:27 IST

सुप्रीम कोर्ट ने जज बीएच लोया की मौत मामले की एसआईटी से जाँच कराने से जुड़ी याचिकाएं खारिज कर दीं।

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जमशेदपुर , 19 अप्रैल: झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने गुरुवार को जज बीएच लोया की मौत पर आए फैसले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस पर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को गलत तरीके से फंसाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला 'कांग्रेस के मुंह पर तमाचा' है। 

ये भी पढ़ें: जज लोया मामलाः मीडिया ने उठाए थे ये 10 बड़े सवाल, सुप्रीम कोर्ट का फैसला- जज लोया की मौत प्राकृतिक

सीएम दास ने रांची लौटने से ठीक पहले सोनारी एरोड्रम लाउंज में मीडिया से कहा कि कुछ अदृश्य ताकतें बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को फंसाने में लगी हुई थीं लेकिन जज लोया की मौत के संबंध में सुप्रीम कोर्ट की पीठ द्वारा सुनाया गया फैसला 'कांग्रेस के मुंह पर तमाचा' है। उन्होंने आरोप लगाया कि ये अदृश्य ताकतें कोई और नहीं बल्कि कांग्रेस है और दावा किया कि कांग्रेस नेतृत्व वाली संप्रग सरकार ने फर्जी मामलों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शाह को फंसाने की भी कोशिश की थी लेकिन वे नाकाम रहे। मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस तेजी से पूरे देश में अपना आधार खो रही है और वे अब भाजपा के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ न्यायपालिका का दुरूपयोग करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस पार्टी को भाजपा से जनता की अदालत ( चुनाव ) में टक्कर लेने की चुनौती दी। ये भी पढ़ें: जज लोया मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला भारत के इतिहास का दुखद दिन- कांग्रेस

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को जज बीएच लोया की मौत मामले की एसआईटी से जाँच कराने से जुड़ी याचिकाएं खारिज कर दीं। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जज लोया के साथ मौजूद जजों के बयान पर संदेह नहीं किया जा सकता। यह फैसला चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली तीन जजों की बेंच ने दिया। याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राजनीतिक और कारोबारी वजहों से पीआईएल का इस्तेमाल गलत है। 

सीबीआई की विशेष अदालत के जज बीएच लोया की एक दिसंबर 2014 को मौत हुई थी। मृत्यु के समय वो सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ केस की सुनवाई कर रहे थे। सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले में बीजेपी नेता अमित शाह भी अभियुक्त थे जिन्हें बाद में आरोप मुक्त कर दिया गया। नवंबर 2017 में 'कारवां' नाम की पत्रिका ने एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी जिसके बाद से लगातार बीएच लोया की मौत पर सवाल उठ रहे थे। उसके बाद कारवाँ एवं अन्य मीडिया संस्थानों में जज लोया से जुड़ी कई खबरें आईं जिनमें अलग-अलग सवाल उठाए गये।

टॅग्स :बीएच लोयारघुवर दासझारखंडअमित शाह
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