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झारखंडः दुमका जिले में पुलिस और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, मारा गया 15 लाख रुपये का इनामी नक्सली

By एस पी सिन्हा | Updated: January 14, 2019 01:27 IST

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार तड़के शिकारीपारा थाना क्षेत्र के छातुपाड़ा में नक्सलियों के साथ पुलिस की मुठभेड़ हो गई. मुठभेड़ में दो नक्सलियों के मारे जाने की खबर है. जबकि, चार-पांच नक्सलियों को गोली लगने की भी खबर है. हालांकि एक नक्सली का शव बरामद किया गया है.

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झारखंड की उपराजधानी दुमका से करीब 43 किलोमीटर दूर स्थित शिकारीपारा में पुलिस और नक्सलियों के बीच हुई मुठभेड में पुलिस ने एक इनामी नक्सली को मार गिराया है. मौके पुलिस को तीन इंसास और एक एके-47 राइफल बरामद हुई है. इलाके में सर्च ऑपरेशन अभी भी जारी है. पुलिस का दावा है कि और चार-पांच नक्सलियों को गोली लगी है.

प्राप्त जानकारी के अनुसार, रविवार तड़के शिकारीपारा थाना क्षेत्र के छातुपाड़ा में नक्सलियों के साथ पुलिस की मुठभेड़ हो गई. मुठभेड़ में दो नक्सलियों के मारे जाने की खबर है. जबकि, चार-पांच नक्सलियों को गोली लगने की भी खबर है. हालांकि एक नक्सली का शव बरामद किया गया है.

 सूत्रों के अनुसार, सुरक्षबलों को गुप्त सूचना मिली थी कि छातूपाड़ा के जंगलों में कुछ नक्सलियों का दस्ता मौजूद है. इसके बाद सुरक्षाबलों ने पूरे इलाके को घेर लिया. इस सूचना पर पुलिस के जवान मौके पर पहुंचे तो नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी. 

सूत्रों की मानें, तो मृतक एक नक्सली सहदेव राय उर्फ ताला दा है. ताला दा ने ही पाकुड के एसपी अमरजीत बलिहार को गोली मारी थी. इस दुर्दांत नक्सली पर 15 लाख रुपये का इनाम था. नक्सलियों के खिलाफ कार्रवाई में इसे सबसे बड़ी सफलता माना जा रहा है.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) की टीम देर रात नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन पर निकली थी. पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि छातुपाड़ा में नक्सलियों की गतिविधियां देखी गई है. इसी के आधार पर जवान कार्रवाई के लिए निकले. जवानों को अपनी ओर आते देख नक्सलियों ने फायरिंग शुरू कर दी. 

दोनों ओर से हुई भीषण गोलीबारी में इस दुर्दांत नक्सली की मौत हो गई. वहीं, जान बचाकर अलग-अलग दिशाओं में भागे दर्जन भर नक्सलियों की तलाश में पुलिस जुट गई है. पुलिस की अलग-अलग टीमों को उनकी तलाश करने के लिए भेजा गया है. मौके पर भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद है. एसपी वाइएस रमेश खुद घटनास्थल पर कैंप कर रहे हैं. संथाल परगना के डीआईजी राज कुमार लकडा भी घटनास्थल पर पहुंच गये हैं. पुलिस ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है. सर्च ऑपरेशन जारी है. 

यहां बता दें कि 2 जुलाई, 2013 को दुमका-पाकुड मार्ग पर काठीकुंड के अमतल्ला के पास हुई पाकुड के तत्कालीन एसपी अमरजीत बलिहार एवं उनके पांच अंगरक्षकों को भाकपा माओवादियों ने मार डाला था. बलिहार दुमका में डीआईजी की बैठक में भाग लेने के बाद लौट रहे थे. 

काठीकुंड से दो-तीन किमी आगे बढ़ने के बाद ही एक नवनिर्मित पुलिया के पास उछाल की वजह से जैसे ही पाकुड एसपी की स्कॉर्पियो धीमी हुई थी, घात लगाकर बैठे सशस्त्र नक्सलियों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी. एसपी के अंगरक्षकों की वहीं मौत हो गई थी. 

नक्सलियों से घिरने के बाद भी एसपी बलिहार ने उनका सामना करने का भरपूर प्रयास किया था, पर भारी संख्या में मौजूद नक्सलियों ने ताबडतोड फायरिंग की. फलस्वरूप बलिहार ज्यादा देर तक उनका मुकाबला नहीं कर सके और नक्सलियों से लोहा लेते हुए शहीद हो गये. 

टॅग्स :झारखंडनक्सल
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