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जया स्मारक: अन्नाद्रमुक को एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील की अनुमति

By भाषा | Updated: December 15, 2021 19:23 IST

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चेन्नई, 15 दिसंबर मद्रास उच्च न्यायालय ने बुधवार को तमिलनाडु में अन्नाद्रमुक और उसके पूर्व कानून मंत्री सी. वी. षणमुगम को पिछली पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार के सभी आदेशों को रद्द के एकल न्यायाधीश के उस हालिया फैसले के खिलाफ अपील करने की अनुमति दी, जिसके जरिये दिवंगत मुख्यमंत्री जे. जयललिता के आवास को स्मारक में बदला गया था।

न्यायमूर्ति परेश उपाध्याय और न्यायमूर्ति साथी कुमार सुकुमारा कुरुप की खंडपीठ ने तीसरे पक्ष को अपील दायर करने की अनुमति देने के साथ ही इस मामले को अगली सुनवाई के लिए 20 दिसंबर की तारीख निर्धारित कर दी।

इससे पहले, एकल न्यायाधीश ने 2017 से आगे के उन सभी आदेशों को रद्द कर दिया था जिनकी परिणति आलीशान पाएस गार्डन में स्थित जयललिता के आवास वेद निलयम को उनके स्मारक के रूप में तब्दील करने में हुई थी।

न्यायमूर्ति एन शेषशायी ने 24 नवंबर को अपने फैसले में टिप्पणी की थी कि जयललिता का मरीना पर पहले से ही एक स्मारक है और अब एक अन्य स्मारक की कोई आवश्यकता नहीं है और यह राज्य के खजाने की बर्बादी है तथा इसमें कोई सार्वजनिक हित भी शामिल नहीं है। इन टिप्पणियों के साथ ही न्यायमूर्ति एन शेषशायी ने 2017 से किये गए सभी आदेश रद्द कर दिये थे। स्मारक का औपचारिक उद्घाटन इस साल जनवरी में तत्कालीन मुख्यमंत्री के पलानीस्वामी ने किया था।

अन्नाद्रमुक और षणमुगम का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ए एल सोमयाजी ने कहा कि पार्टी को एकल न्यायाधीश के आदेश के खिलाफ अपील का अधिकार है।

उन्होंने कहा कि जब अधिग्रहण की कार्यवाही शुरू की गई थी, तब अन्नाद्रमुक राज्य में सत्ताधारी पार्टी थी। चूंकि प्रशासन में बदलाव हुआ था और द्रमुक अब सत्ता में आ गई है, इसलिए वर्तमान सरकार ने कोई अपील नहीं की है और न ही करेगी। इसलिए, अन्नाद्रमुक इस मुद्दे को अच्छी तरह से उठा सकती है और अपील दायर कर सकती है।

याचिका का विरोध करते हुए, जयललिता के भतीजे जे. दीपक के वकील ने कहा कि पार्टी को अपील करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि अधिग्रहण पार्टी ने नहीं बल्कि राज्य ने किया था।

उन्होंने कहा कि अपील की अनुमति मांगने वाली याचिका अब निष्फल हो गई है क्योंकि मौजूदा सरकार ने उन्हें और उनकी बहन जे. दीपा को चाबियां पहले ही सौंप दी हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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