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Jammu and Kashmir: झेलम का लेवल कम होने से धान के मौसम के लिए चिंता बढ़ी, पानी नहीं तो सब सुन्न हो जाएगा

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: March 8, 2026 16:10 IST

अधिकारियों ने इसे माना है कि कश्मीर में आने वाले धान की खेती के मौसम को लेकर चिंता बढ़ रही है क्योंकि सर्दियों में कम बारिश के कारण झेलम नदी का पानी का लेवल बहुत कम हो गया है। यह सूख चुका है।

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जम्मू: कश्मीरियों की चिंता दिनोंदिन बढ़ती जा रही है क्योंकि कश्मीर में पानी की कमी अपना रोद्र रूप दिखाने लगी है। झेलम सूख गया है और मौसम विभाग की बारिश व बर्फबारी की भविष्यवाणी पर कश्मीरियों को अब विश्वास नहीं रहा है। अधिकारियों ने इसे माना है कि कश्मीर में आने वाले धान की खेती के मौसम को लेकर चिंता बढ़ रही है क्योंकि सर्दियों में कम बारिश के कारण झेलम नदी का पानी का लेवल बहुत कम हो गया है। यह सूख चुका है।

हाइड्रोलाजिकल विभाग के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिण कश्मीर के संगम में झेलम में पानी का लेवल माइनस 0.86 फीट दर्ज किया गया, जिसे अधिकारियों ने मार्च की शुरुआत के लिए काफी कम बताया। विशेषज्ञों का मानना था कि सर्दियों के महीनों में घाटी के कई हिस्सों में सामान्य से कम बर्फबारी और बारिश के कारण पानी का बहाव कम हो गया है। ऐसे में पानी के कम लेवल ने उन किसानों के बीच चिंता बढ़ा दी है जो गर्मियों के मौसम में धान की खेती के लिए झेलम से मिलने वाले सिंचाई चैनलों पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं।

खेती के जानकारों का कहना था कि अगर आने वाले हफ्तों में बारिश में सुधार नहीं हुआ तो लंबे समय तक सूखे की स्थिति सिंचाई की प्लानिंग पर असर डाल सकती है। हालांकि इस बीच, मौसम विभाग ने 12 मार्च तक जम्मू कश्मीर में मैदानी इलाकों में हल्की बारिश और ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की बर्फबारी का अनुमान लगाया है। पर कश्मीरी इस भविष्यवाणी पर अब विश्वास नहीं करते हैं।

मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना था कि इस बारिश की वजह से केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में दिन के तापमान में लगभग तीन से पांच डिग्री सेल्सियस की गिरावट आ सकती है। मौसम विभाग कहता था कि मैदानी इलाकों में रुक-रुक कर बादल छाए रहने और हल्की बारिश होने की संभावना है, जबकि कश्मीर और जम्मू संभाग के ऊंचाई वाले इलाकों में इस दौरान हल्की बर्फबारी हो सकती है। 

अधिकारियों के बकौल, बारिश की भविष्यवाणी से मौजूदा सूखे मौसम से कुछ समय के लिए राहत मिल सकती है, हालांकि स्थिति पर करीब से नजर रखी जा रही है।

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