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जम्मू-कश्मीर: कश्‍मीर में एसओपी की अनदेखी का खामियाजा सुरक्षाबल ही भुगत रहे

By सुरेश एस डुग्गर | Updated: December 10, 2023 12:56 IST

यह एक कड़वी सच्चाई है कि कश्मीर में 36 सालों से फैले हुए पाक समर्थित आतंकवाद के दौर में न जाने कितनी बार मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करने के निर्देश निकाले गए होंगें और कितनी बार उनकी अनदेखी की गई होगी, इसका कोई रिकार्ड ही नहीं है।

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श्रीनगर: करीब 39 दिनों के उपरांत जिस पुलिस अधिकारी को डाक्टरों ने सिर में गोली लगने के कारण मृत घोषित कर दिया उसकी मृत्यु के उपरांत कश्मीर में एक बार फिर एसओपी अर्थात मानक संचालन प्रक्रिया चर्चा में है।

यह चर्चा में इसलिए है क्योंकि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने फिर दोहराया है कि पुलिस को एसओपी का सख्ती से पालन करना होगा। पर यह एक कड़वी सच्चाई है कि कश्मीर में पुलिस पर हुए प्रत्येक आतंकी हमले के उपरांत ऐसे दिशा निर्देशों को हमेशा ही नजरअंदाज किया जाता रहा है।

ज्यादा पुरानी बात न करें तो भी 13 दिसम्बर 2021 को आतंकियों ने श्रीनगर के जेवान चौक में एक उस पुलिस बस पर हमला बोल कर तीन पुलिसवालों को मार डाला था जो बिना किसी सुरक्षा कवच के अपनी ड्यूटी निभा कर वापस आ रही थी। इस हमले के उपरांत जब बहुत हो हल्ला मचा तो यह फैसला लिया गया था कि भविष्य में पुलिसकर्मियों को बुलेट प्रूफ वाहन मुहैया करवाने के अतिरिक्त उन्हें एस्कार्ट भी दिए जाएंगें।

और इस साल 31 अक्तूबर को आतंकियों ने एक पुलिसकर्मी गुलाम मुहम्मद डार को पटन में उस समय गोली मार कर मार डाला जब वह अपने घर आया हुआ था। ऐसे कई मामले हैं जिसमें छुट्टी पर घर आए पुलिसकर्मियों पर आतंकियों ने हमले कर मार डाला था।और प्रत्येक ऐसी घटना के लिए एसओपी का पालन न करने की बात कही गई और फिर से दोहराया गया कि सभी को एसओपी का सख्ती से पालन करना होगा।

जिस पुलिस इंस्पेक्टर मसरूर वानी को श्रीनगर के खेल मैदान में गोली मार दी गई थी उसके प्रति अब वरिष्ठ पुलिस अधिकारी दावा करते थे कि उन पर हमला किए जाने के इनपुट थे लेकिन मानक संचालन प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था जो एक भारी भूल थी।ऐसे ही एसओपी की अनदेखी 14 फरवरी 2019 को पुलवामा हमले के दौरान भी सामने आई थी जब केरिपुब के 47 से अधिक जवान कश्मीर में आज तक के हुए सबसे भयानक विस्फोट में मारे गए थे।

यह एक कड़वी सच्चाई है कि कश्मीर में 36 सालों से फैले हुए पाक समर्थित आतंकवाद के दौर में न जाने कितनी बार मानक संचालन प्रक्रिया का पालन करने के निर्देश निकाले गए होंगें और कितनी बार उनकी अनदेखी की गई होगी, इसका कोई रिकार्ड ही नहीं है। लेकिन इतना जरूर था कि हर बार ऐसी कथित लापरवाही का ख्मियाजा सुरक्षाबलों को ही भुगतना पड़ा है।

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