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जम्मू-कश्मीरः चार चरण के निपट गए चुनाव, अब अंतिम की सताने लगी चिंता, आतंकवादी भी अब बौखलाहट में

By सुरेश डुग्गर | Updated: May 2, 2019 08:55 IST

जम्मू-कश्मीर लोकसभा चुनावः चुनावाधिकारी मानते हैं कि अनंतनाग के शोपियां तथा पुलवामा क्षेत्रों में आतंकी खतरा ज्यादा है अतः सुरक्षाबलों को एतिहात बरतने तथा अधिक कड़े प्रबंध करने को कहा गया है।

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ठळक मुद्देपिछले चार चरणों की सफलता को रोकने के लिए आतंकी कुछ नहीं कर पाए तो उनमें अब बौखलाहट भी है।अभी तक कश्मीर में होने वाले चार चरणों के मतदान के दौरान कहीं भी अतिरिक्त सुरक्षाबलों की आवश्यकता महसूस नहीं की गई। चुनाव अधिकारी दावा कर रहे हैं कि पहले चार चरणों की ही तरह इस संसदीय क्षेत्र में अंतिम चरण का मतदान शांतिपूर्ण ढंग से होगा मगर सुरक्षाधिकारियों को ऐसा नहीं लगता।

संसदीय चुनावों के शांतिपूर्ण ढंग से गुजर चुके चार चरणों के बाद अब चिंता पांचवें और अंतिम चरण के चुनाव की है। यह चिंता अनंतनाग के शोपियां और पुलवामा में इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि इस संसदीय क्षेत्र की संवेदनशील स्थिति ऐसी चिंता प्रकट करने पर मजबूर करती है। दूसरा कारण, पिछले चार चरणों की सफलता को रोकने के लिए आतंकी कुछ नहीं कर पाए तो उनमें अब बौखलाहट भी है।

चुनाव अधिकारियों ने भी इसके प्रति चिंता को प्रकट किया है। चुनावाधिकारी आप मानते हैं कि अनंतनाग के शोपियां तथा पुलवामा क्षेत्रों में आतंकी खतरा ज्यादा है अतः सुरक्षाबलों को एतिहात बरतने तथा अधिक कड़े प्रबंध करने को कहा गया है।

अभी तक कश्मीर में होने वाले चार चरणों के मतदान के दौरान कहीं भी अतिरिक्त सुरक्षाबलों की आवश्यकता महसूस नहीं की गई। मगर दक्षिण कश्मीर के इस संसदीय क्षेत्र के हालात को देखते हुए अतिरिक्त सुरक्षाबलों की आवश्यकता आन पड़ी है। यही कारण है कि अन्य स्थानों से सुरक्षाबल इस संसदीय क्षेत्र में पहुंचने आरंभ हो गए हैं जहां 6 मई को मतदान होना है।

वैसे अभी तक सुरक्षाधिकारी तथा चुनाव अधिकारी इस पर खुशी प्रकट कर रहे थे कि चार चरणों के मतदान हिंसामुक्त हुए हैं। यह बात अलग है कि अब आतंकी राजनीतिज्ञों पर हथगोलों के हमले करने लगे हैं। ऐसा ही एक हमला पूर्व कुछ राजनेताओं के निवास पर भी किया गया। लेकिन मतदान के दिन किसी प्रकार की हिंसा की वारदात न होना सच में खुशी की बात थी।

परंतु लगता नहीं हैं कि यह खुशी अधिक समय तक रह पाएगी क्योंकि अनंतनाग संसदीय क्षेत्र में होने वाले चुनावों के दौरान होने वाली चुनावी हिंसा का अपना इतिहास रहा है कि इस संसदीय क्षेत्र में जम कर हिंसा हुई है। पिछले लोकसभा चुनावों में अगर महबूबा मुफ्ती के काफिलों पर जम कर हमले हुए तो उससे पहले विधानसभा चुनावों में सबसे अधिक हमले इसी संसदीय क्षेत्र में हुए थे।

हालांकि चुनाव अधिकारी दावा कर रहे हैं कि पहले चार चरणों की ही तरह इस संसदीय क्षेत्र में अंतिम चरण का मतदान शांतिपूर्ण ढंग से होगा मगर सुरक्षाधिकारियों को ऐसा नहीं लगता। वे आतंकी हिंसा में होने वाली वृद्धि को लेकर आशंकित इसलिए भी हैं क्योंकि अब यह सामने आ गया है कि चार चरणों के दौरान आतंकी अधिक कुछ नहीं कर पाने के कारण बौखलाहट में हैं और यह बौखलाहट अंतिम चरण में हिंसा के रूप में सामने आ सकती है। 

सुरक्षाधिकारियों ने आप स्पष्ट किया है कि सीमा पार से मिली फटकार के कारण भी वे बौखलाहट में हैं और इसे भूला नहीं जा सकता कि जब जब आतंकवादी बौखलाहट से भरे नजर आए हैं उन्होंने हमलों को बढ़ाने के साथ ही सामूहिक नरसंहारों को अंजाम दिया है। जबकि चुनावों के दौरान सामूहिक नरसंहारों को अंजाम देकर वे पहले भी मतदाताओं को आतंकित करते रहे हैं।

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