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आईपीसीसी की रिपोर्ट विकसित देशों से कार्बन मुक्त होने का आह्वान करती है: पर्यावरण मंत्री

By भाषा | Updated: August 10, 2021 00:13 IST

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नयी दिल्ली, नौ अगस्त केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को कहा कि जलवायु परिवर्तन पर आईपीसीसी (जलवायु परिवर्तन पर अधिकार प्राप्त अंतर सरकारी समिति) की रिपोर्ट विकसित देशों से उत्सर्जन में तत्काल कटौती करने और अपनी अर्थव्यवस्थाओं को कार्बन मुक्त करने का स्पष्ट आह्वान करती है।

मंत्री ने आईपीसीसी की छठी मूल्यांकन रिपोर्ट (एआर6) का स्वागत करते हुए कहा कि भारत ने जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं और वह अपने उत्सर्जन को आर्थिक प्रगति से अलग करने की राह पर है।

यादव ने ट्वीट किया, ‘‘भारत आईपीसीसी द्वारा आज जारी छठी आकलन रिपोर्ट 'जलवायु परिवर्तन 2021: भौतिक विज्ञान' में जलवायु परिवर्तन पर अधिकार प्राप्त अंतर सरकारी समिति (आईपीसीसी) कार्य समूह 1 के योगदान का स्वागत करता है। इस रिपोर्ट को तैयार करने में कई भारतीय वैज्ञानिकों ने भाग लिया है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत ने जलवायु परिवर्तन की वैश्विक समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं और वह अपने उत्सर्जन को आर्थिक विकास से अलग करने की राह पर है। आईपीसीसी रिपोर्ट इसका प्रमाण है।’’

मंत्री ने कहा, ‘‘ आईपीसीसी ने छठी आकलन रिपोर्ट 'जलवायु परिवर्तन 2021: भौतिक विज्ञान' आज जारी की। यह रिपोर्ट विकसित देशों के लिए उत्सर्जन में तत्काल एवं भारी कटौती करने और अपनी अर्थव्यवस्थाओं को कार्बन मुक्त बनाने का स्पष्ट आह्वान है।’’

पर्यावरण मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि विकसित देशों ने वैश्विक कार्बन बजट के अपने उचित हिस्से से कहीं अधिक ले लिया है। बयान में कहा गया है, ‘‘शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य अकेले हासिल करना पर्याप्त नहीं है, क्योंकि सभी देशों के उत्सर्जन के शुद्ध शून्य होने से ही तापमान निर्धारित होता है। यह आईपीसीसी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से बताया गया है। यह भारत के इस रुख की पुष्टि करता है कि आज दुनिया जिस जलवायु संकट का सामना कर रही है, वह अतीत में मिलकर किए गए उत्सर्जन का परिणाम है।’’

बयान में कहा गया है कि कार्बन डाइऑक्साइड सभी ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन परिदृश्यों के तहत ग्लोबल वार्मिंग का प्रमुख कारण रही है और रहेगी। मंत्रालय ने कहा, ‘‘भारत इस बात पर गौर करता है कि जलवायु परिवर्तन दक्षिण एशियाई मानसून को प्रभावित कर रहा है। रिपोर्ट बताती है कि अनुमानित परिदृश्यों की सभी श्रेणियों में मानसून की वर्षा तेज होने की अपेक्षा है। भारी वर्षा की घटनाएं बढ़ने का अनुमान है। भारत इस बात पर गौर करता है कि बढ़ते तापमान से अत्यधिक गर्म हवा और भारी वर्षा समेत मौसम संबंधी चरम घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि होगी।’’

उसने कहा कि भारत का संचयी और प्रति व्यक्ति वर्तमान उत्सर्जन वैश्विक कार्बन बजट के अपने उचित हिस्से से काफी कम है। मंत्रालय ने कहा कि भारत ने जलवायु परिवर्तन की समस्या से निपटने के लिए कई कदम उठाए हैं।

Disclaimer: लोकमत हिन्दी ने इस ख़बर को संपादित नहीं किया है। यह ख़बर पीटीआई-भाषा की फीड से प्रकाशित की गयी है।

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