जम्मू, 29 नवंबर जम्मू कश्मीर के एक पूर्व नौकरशाह समेत कई मुस्लिम कार्यकर्ताओं ने रविवार को आरोप लगाया कि ''कुछ तत्व'' केंद्र शासित प्रदेश के जम्मू क्षेत्र में सांप्रदायिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने के लिए जानबूझकर प्रयास कर रहे हैं और उप राज्यपाल मनोज सिन्हा से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की ।
हालांकि उन्होंने उन तत्वों की पहचान नहीं की लेकिन दावा किया कि जिला विकास परिषद के चुनाव की घोषणा के बाद उनके प्रयास बढ़ गये हैं । पिछले साल जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने की घोषणा के बाद से प्रदेश में यह पहला चुनाव होने जा रहा है।
पूर्व नौकरशाह खालिद हुसैन एवं अधिवक्ता शेख शकील अहमद ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जम्मू क्षेत्र के मुसलमान राष्ट्रवादी हैं और उन्हें अपना राष्ट्रवाद साबित करने के लिये किसी प्रमाण पत्र की आवश्यकता नहीं है ।
हुसैन ने कहा, ''कुछ तत्व जानबूझ कर जम्मू क्षेत्र के शांत माहौल को खराब करने का प्रयास कर रहे हैं । वे लोग मुसलमानों को जमीन हड़पने वाला बता कर झूठ फैला रहे हैं । सच्चाई यह है कि रौशनी अधिनियम के तहत कुछ ही मुसलमानों को जमीन मिली है।''
जम्मू कश्मीर उच्च न्यायालय ने पिछले महीने कथित रौशनी भूमि घोटाले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो से कराने का निर्देश दिया था । इसके बाद संघ शासित प्रदेश के प्रशासन ने कहा था कि यह सभी कार्रवाइयों को रद्द कर देगा, इनके म्यूटेशन रद्द कर देगा और छह महीने में सभी जमीनों को फिर से वापस ले लेगा ।
उसके बाद से जम्मू कश्मीर प्रशासन ने उन लोगों की सूची जारी की है जिन्होंने रौशनी अधिनियम अथवा रौशनी भूमि घोटाले में अवैध रूप से जमीन प्राप्त की और प्रदेश की भूमि हड़पी है ।
इस संवाददाता सम्मेलन के दौरान मुस्लिम समुदाय की प्रमुख हस्तियां मौजूद थी, जिनमें व्यवसायी जावेद इकबाल, सामाजिक कार्यकर्ता अब्दुल माजीद एवं बठिंडी के सरपंच हफीजुल्ला एवं अन्य शामिल हैं ।
उपायुक्त रह चुके हुसैन ने आरोप लगाया कि कुछ ऐसे तत्व हैं जो मुसलमानों के खिलाफ घृणा फैला रहे हैं और उन पर जम्मू की जनसांख्यिकी बदलने का प्रयास करने का आरोप लगा रहे हैं।
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