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भारत में कोविड-19 से अब तक 100 से ज्यादा पत्रकारों की मौत, अप्रैल में गई 52 जान: रिपोर्ट

By दीप्ती कुमारी | Updated: April 30, 2021 15:23 IST

दिल्ली के इंस्टीट्यूट ऑफ परसेप्शन स्टीडज के एक अध्ययन 'रेट द डिबेट' के अनुसार कोरोना महामारी के कारण कुल 101 पत्रकारों की जान अब तक भारत में जा चुकी है। ये आंकड़े 28 अप्रैल तक के हैं।

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ठळक मुद्देभारत में पत्रकारों पर भी कोरोना की मार, 101 पत्रकारों की हो चुकी है मौतदिल्ली इंस्टीट्यूट ऑफ परसेप्शन के एक अध्ययन के अनुसार केवल इसी साल अप्रैल में 52 मौतें हुई हैंसबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 19 पत्रकारों की मौत हुई है, तेलंगाना में 17 पत्रकारों की जान गई है

दिल्ली: भारत में कोरोना वायरस संक्रमण का आकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है । पिछले 24 घंटों में 3 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए हैं और साथ ही देश में कुल मौत का आकड़ा भी 2 लाख तक पहुंच चुका है। इस दूसरी लहर में आप तक खबर पहुचांने वाले पत्रकारों को भी इसका दंश झेलना पड़ रहा है।

फर्स्टपोस्ट ने 'रेट द डिबेट' के एक रिपोर्ट के हवाले से बताया है कि  इस साल केवल अप्रैल महीने में 52 पत्रकारों की जान गई है। इसका मतलब हर एक दिन में 2 लोगों की जान गई है। 'रेट द डिबेट' की पहल दरअसल दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ परसेप्शन स्टडीज की ओर से कई गई है। इसमें एक के अनुसार भारत में 1 अप्रैल 2020 से 28 अप्रैल 2021 के बीच कोविड-19 के कारण 101 पत्रकारों की मौत हो चुकी है।

'रेट द डिबेट' की संस्थापक डॉ कोटा नीलिमा के अनुसार ये डाटा 28 अप्रैल तक है। इसका मकसद लोगों को ये बताना भी है कि जो खबरें उन तक पहुंचती हैं, उसके पीछे की क्या कीमत चुकानी पड़ती है।

उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा पत्रकारों की गई जान

आकड़ों की बात करें तो 1 अप्रैल 2020 से 28 अप्रैल 2021 तक कोविड-19 से कुल 101 पत्रकारों की मौत हो चुकी है। वहीं केवल 1 अप्रैल 2021 से 28 अप्रैल 2021 तक 52 पत्रकारों की जान गई है। सबसे ज्यादा उत्तर प्रदेश में 19 पत्रकारों की मौत हुई है। इसके बाद तेलंगाना में 17 और महाराष्ट्र में 13 पत्रकारों ने अपनी जान गवाई है।

इस अध्ययन में जुटाए गए डाटा और उसके वेरिफिकेशन की प्रक्रिया के बारे में बताते हुए डॉक्टर कोटा ने कहा कि  टीम ने काफी सख्त प्रक्रिया का पालन किया था। उन्होंने कहा, 'हमने 3 स्टेप वेरिफिकेशन प्रोसेस अपनाया था , जिसमें डाटा संग्रह, क्रॉस चेकिंग और व्यक्तिगत कॉल करना। हमें शत प्रतिशत यकीन है कि हमने अपनी सूची में जिन पत्रकारों का नाम शामिल किया है , उनकी मौत कोरोना के कारण हुई है।'   

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