लाइव न्यूज़ :

ठंड में ठिठुरता देख भिखारी की मदद के लिए DSP ने रोकी गाड़ी, पास जाकर देखा तो शख्स निकला उन्हीं के बैच का अधिकारी

By विनीत कुमार | Updated: November 15, 2020 09:52 IST

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में दो पुलिस अधिकारी उस समय हैरान रह गए जब सड़क पर ठंड से ठिठुरता एक भिखारी उन्हीं के बैच का साथी निकला। मानसिक हालत खराब होने के बाद पिछले करीब 10 साल वो लापता था।

Open in App
ठळक मुद्देलावारिस हालात में घूमते और भीख मांगते मिले मध्य प्रदेश पुलिस के अधिकारी, ग्वालियर की घटना10 साल पहले हो गए थे लापता, मानसिक स्थिति खराब होने के बाद घर से भाग गए थे

मध्य प्रदेश के ग्वालियर से एक बेहद ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कभी मध्य प्रदेश पुलिस में बेहद काबिल अधिकारी और शूटर रहे मनीष मिश्रा भिखारी के रूप में लावारिस हालात में घूमते मिले हैं। इनकी पहचान भी तब हुई जब इनके ही बैच के दो अफसर उन्हें भिखारी समझ कुछ देने जाते हैं। कहानी फिल्मी जरूर लगती है लेकिन सच जानकर सभी अवाक है। 

दरअसल, ग्वालियर में उपचुनाव की मतगणना के बाद डीएसपी रत्नेश सिंह तोमर और विजय सिह भदौरिया झांसी रोड से जा रहे थे। दोनों अधिकारी जैसे ही बंधन वाटिका के पास से गुजरे तो उनकी नजर सड़क किनारे एक अधेड़ उम्र के भिखारी पर पड़ी। वह ठंड से ठिठुर रहा था। 

दोनों ने उसकी मदद करने का विचार किया। दोनों गाड़ी रोककर भिखारी के पास गए। रत्नेश ने अपने जूते जबकि डीएसपी विजय सिंह भदौरिया ने अपनी जैकेट उसे दी। इसी दौरान उस भिखारी से बातचीत करते हुए दोनों उस समय हतप्रभ रह गए कि वह भिखारी दरअसल डीएसपी के बैच का ही अफसर था।

10 साल पहले लापता हो गए थे मनीष

मनीष ने साल 1999 में पुलिस की नौकरी जॉइन की थी। इसके बाद एमपी के विभिन्न थानों में थानेदार के तौर पर पदस्थ भी रहे। उन्होंने 2005 तक पुलिस की नौकरी की। इस बीच उनकी तबीयत खराब होने लगी थी। अंतिम बार में वे दतिया में बतौर थाना प्रभारी पोस्टेड थे। इस दौरान उनकी मानसिक स्थिति खराब होती चली गई। 

घरवाले उन्हें इलाज के लिए कई जगह ले गए, लेकिन एक दिन वह सभी की नजरों से बचकर भाग गए। बहुत खोजबीन के बाद भी परिवार को पता नहीं चल पाया कि मनीष कहां गए। इस बीच वह मनीष भीख मांगने लगे और इस तरह करीब दस साल गुजर गए। 

बहरहाल, मनीष के 10 साल बाद इस तरह सामने आने के बाद मनीष के दोनों पुराने साथियों ने उनसे काफी देर तक पुराने दिनों की बात करने की कोशिश की और अपने साथ ले जाने की जिद की। मनीष हालांकि साथ जाने को राजी नहीं हुए। 

इसके बाद मनीष को एक समाजसेवी संस्था में भिजवाया गया जहां उनकी देखभाल शुरू हो गई है। मनीष के पिता और चाचा एडिशनल एसपी के पद से रिटायर हुए हैं। उनके भाई थाना इंचार्ज हैं। उनकी बहन किसी दूतावास में काम करती है।

टॅग्स :मध्य प्रदेशग्वालियर
Open in App

संबंधित खबरें

ज़रा हटकेबनारस में सीएम यादव श्री राम भंडार में रुके और कचौड़ी, पूरी राम भाजी और जलेबी का स्वाद लिया?, वीडियो

भारतMohan Yadav Bankura Visit: ममता अब दीदी नहीं, 'अप्पी' हो गई हैं?, पश्चिम बंगाल में जमकर गरजे सीएम मोहन

कारोबार1 अप्रैल को झटका, मध्य प्रदेश में दूध महंगा, 2-4 रुपये प्रति लीटर का इजाफा?

कारोबारविश्वनाथ मंदिर और महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट के बीच एमओयू, सीएम मोहन यादव बोले- नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा देश

कारोबारMP-UP Sahyog Sammelan: मप्र-उप्र मिलकर लिखेंगे विकास की नई इबारत?, बाबा विश्वनाथ की शरण में सीएम डॉ. मोहन

भारत अधिक खबरें

भारतबारामती विधानसभा उपचुनावः सीएम फडणवीस की बात नहीं मानी?, कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार के खिलाफ आकाश मोरे को चुनाव मैदान में उतारा

भारतUP की महिला ने रचा इतिहास! 14 दिनों में साइकिल से एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं

भारतLadki Bahin Yojana Row: महाराष्ट्र में 71 लाख महिलाएं अयोग्य घोषित, विपक्ष ने किया दावा, सरकार की जवाबदेही पर उठाए सवाल

भारतयूपी बोर्ड ने 2026-27 के लिए कक्षा 9 से 12 तक NCERT और अधिकृत पुस्तकें अनिवार्य कीं

भारतपाकिस्तान के रक्षामंत्री ख्वाजा आसिफ के कोलकाता पर हमले की धमकी वाले बयान पर सोशल मीडिया पर 'धुरंधर' अंदाज़ में आई प्रतिक्रिया