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मेरे बारे में सरकार के नकारात्मक विचार मेरी न्यायिक स्वतंत्रता साबित करती है: जस्टिस अकील कुरैशी

By विशाल कुमार | Updated: March 6, 2022 07:00 IST

अपने कार्यकाल के अंतिम दिन जस्टिस अकील अब्दुलहमीद कुरैशी ने कहा कि मैंने (पूर्व सीजेआई की) आत्मकथा नहीं पढ़ी है, लेकिन मीडिया में प्रकाशित खबरें देखी हैं, जिसमें यह कहा गया है कि सरकार के पास मेरे न्यायिक विचारों के आधार पर मेरे प्रति नकारात्मक अवधारणा बनी हुई थी।

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ठळक मुद्देराजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश अकील कुरैशी अपने कार्यकाल के अंतिम दिन विदाई भाषण दे रहे थे।उन्होंने कहा कि हमारा कर्तव्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों और मानवाधिकारों की रक्षाा करना है।

जोधपुर (राजस्थान): राजस्थान हाईकोर्ट के निवर्तमान मुख्य न्यायाधीश अकील अब्दुलहमीद कुरैशी ने शनिवार को कहा कि उनके बारे में सरकार की नकारात्मक अवधारणा उनकी न्यायिक स्वतंत्रता का प्रमाणपत्र है। जस्टिस कुरैशी की यह टिप्पणी भारत के एक पूर्व प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) की आत्मकथा में की गयी टिप्पणियों के संदर्भ में है।

पूर्व सीजेआई ने आत्मकथा में इस बारे में विस्तार से चर्चा की है कि मध्य प्रदेश और त्रिपुरा हाईकोर्टों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति पर राजस्थान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की सिफारिशें क्यों खारिज कर दी गयी थीं?

अपने कार्यकाल के अंतिम दिन राजस्थान हाईकोर्ट के वकीलों और न्यायाधीशों को सम्बोधित करते हुए जस्टिस कुरैशी ने न्यायाधीश के तौर पर नियुक्ति के लिए हाईकोर्टों द्वारा भेजी गयी अधिवक्ताओं की सूची में शीर्ष अदालत द्वारा व्यापक रूप से काट-छांट करने करने को लेकर आश्चर्य व्यक्त किया। उन्होंने आगाह किया कि इस तरह के कदम से बेहतर न्यायिक सोच वाले न्यायाधीशों का अभाव हो जाएगा।

जस्टिस कुरैशी ने किसी पूर्व सीजेआई का नाम नहीं लिया, लेकिन उनका इशारा स्पष्ट तौर पर पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई की ओर था, जिनकी आत्मकथा दिसम्बर में विमोचित की गई थी।

इसमें उन्होंने (पूर्व सीजेआई ने) गुजरात हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश जस्टिस कुरैशी और मद्रास हाईकोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश सहित कई न्यायाधीशों के तबादले के बारे में चर्चा की है।

जस्टिस कुरैशी ने कहा, ‘‘मैंने (पूर्व सीजेआई की) आत्मकथा नहीं पढ़ी है, लेकिन मीडिया में प्रकाशित खबरें देखी हैं, जिसमें मध्य प्रदेश और त्रिपुरा हाईकोर्टों के मुख्य न्यायाधीश के तौर पर मेरे नाम की सिफारिशों में हेरफेर के बारे में कुछ खुलासे किये गये हैं। यह कहा गया है कि सरकार के पास मेरे न्यायिक विचारों के आधार पर मेरे प्रति नकारात्मक अवधारणा बनी हुई थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘एक संवैधानिक अदालत के न्यायाधीश के तौर पर हमारा कर्तव्य नागरिकों के मौलिक अधिकारों और मानवाधिकारों की रक्षाा करना है, मेरा मानना है कि यह न्यायिक स्वतंत्रता का प्रमाणपत्र है।’’ जस्टिस कुरैशी ने युवा वकीलों से अपने सिद्धांत पर अडिग रहने की भी अपील की।

टॅग्स :Rajasthan High Courtमोदी सरकारmodi governmentजस्टिस रंजन गोगोईJustice Ranjan Gogoi
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